Pakistan: मरते दम तक इमरान खान का जेल में रहना तय! इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने दिया रुलाने वाला झटका

Imran Khan News: इस्लामाबाद हाई कोर्ट (आईएचसी) ने शुक्रवार को पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान को बहुत बड़ा झटका दिया है और अब ऐसा लग रहा है, कि पाकिस्तान को 1992 क्रिकेट वर्ल्ड कप जिताने वाला कप्तान मरते दम तक जेल में ही रहने वाला है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने इमरान खान की साइफर केस में जमानत याचिका और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने की याचिका को खारिज कर दिया है।

71 साल के पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके करीबी शाह महमूद कुरैशी, जो पाकिस्तान के विदेश मंत्री थे, 23 अक्टूबर को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें आरोपी ठहराया है।

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जियो न्यूज के मुताबिक, इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक ने 16 अक्टूबर को पहले से सुरक्षित रखे गए फैसले की घोषणा कर दी है। इमरान खान के वकील सरदार लतीफ खोसा ने तर्क दिया था, कि पूर्व पीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती, क्योंकि उनके संघीय कैबिनेट ने साइफर को सार्वजनिक किया था।

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) अध्यक्ष ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी और अपने और पार्टी के उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी के खिलाफ, राजनीतिक लाभ के लिए गुप्त दस्तावेज का दुरुपयोग करने के मामले में जमानत की मांग की थी। आईएचसी ने 26 अक्टूबर को मामले में सुनवाई रोकने की इमरान की याचिका खारिज कर दी थी।

साइफर मामला है क्या?

साइफर किसी देश के विदेशी मिशन की तरफ से अपने देश को भेजा जाने वाला वो संवाद होता है जिसमें मिशन के डिप्लोमेट्स की मेजबान देश के डिप्लोमेट्स या अधिकारियों आदि के बीच बातचीत का ब्योरा होता है। ये बातचीज कोड वर्ड्स में होती है, जिसे डिकोड कर उसका अनुवाद किया जाता है।

पीएम पद पर रहने के दौरान इमरान खान ने अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत मजीद से अमेरिकियों के बीच पाकिस्तान को लेकर क्या सोच है, इस बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में मजीद ने साइफर लिखा था।

इसी मामले में पीटीआई के उपाध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी के खिलाफ भी कार्यवाही चल रही है और इमरान खान के साथ साथ कुरैशी को भी आरोपी ठहराया गया है।

इसमें अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी डॉनल्ड लू और अमेरिका में तब के पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद के बीच की बातचीत का संक्षिप्त विवरण था। इस साइफर में कुछ बाते लिखी थीं जिसका अनुवाद मीडिया में भी आया था। इसके मुताबिक-

- यूक्रेन मसले पर पाकिस्तान की नीति से अमेरिका में बहुत नाराजगी है।
- व्हाइट हाउस को लगता है कि इमरान सरकार के रहते पाकिस्तान से रिश्ते बेहतर नहीं हो सकते।
-अगर इमरान खान को अविश्वास मत में हरा दिया जाए तो अमेरिका पाकिस्तान की इन गलतियों को माफ कर देगा वरना आगे का समय बहुत कठिनाई भरा होगा।
- IMF भी पाकिस्तान सरकार से खुश नहीं था। वो इस बात से भी नाराज थे कि पिछली सरकार के साथ जो डील हुई थी उसे लागू नहीं किया गया।

इसके बाद अपनी सरकार गिरने से ठीक पहले इमरान खान ने मार्च 2022 में पाकिस्तान के फैजाबाद की रैली में एक पर्ची निकाल कर दावा किया था कि उनको ये साइफर मिला है, जिसमें उनकी सरकार को गिराने की कोशिश के पीछे अमेरिकी साजिश का पता चलता है।

इसके बाद अप्रैल में सरकार गिरने के बाद भी इमरान खान ने इस साइफर को अपनी हर सभा में बहुत तूल दिया और जमकर अमेरिका के खिलाफ बयान दिए।

इमरान खान द्वारा साइफर को सार्वजनिक करना आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत अपराध माना गया और इस मामले में मुकद्दमा दर्ज किया गया। इमरान खान के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहे आजम खान सरकारी गवाह बन गये और उन्होंने अदालत में इमरान खान के खिलाफ बयान दिए।

पाकिस्तान सीनेट में हाल ही में सेना अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम में संशोधन किया है। इसके मुताबिक देश से जुड़े किसी गोपनीय कागजात के जरिये पाकिस्तान या पाकिस्तान की सेना को बदनाम करने वाले को कड़ी सजा का प्रावधान है।

जाहिए है कि यह संशोधन साइफर मामले में इमरान खान पर शिंकजा कसने के मकसद से किया गया। अब FIA की आतंकवाद-निरोधक शाखा (CTW) साइफर लीक करने के मामले में इसकी जांच कर रही है।

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