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Chinmoy Das Case: बांग्लादेश में संत चिन्मय को जमानत, जेल में बीते 5 महीने, जानें रिहाई अब भी अधर में क्यों?

Chinmoy Das Bangladesh Case Update: बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को आज यानी बुधवार (30 अप्रैल) को आखिरकार हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। वे पिछले 5 महीनों से देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद थे। हालांकि, उनकी रिहाई अभी भी तय नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर रोक लगा सकता है। न्यायमूर्ति मोहम्मद अताउर रहमान और न्यायमूर्ति मोहम्मद अली रजा की पीठ ने चिन्मय द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।

पिछले साल अक्टूबर में चटगांव में 'सनातन जागरण मंच' की एक रैली हुई थी। चिन्मय दास ने इसे संबोधित किया। उसी दिन, न्यू मार्केट इलाके में भगवा ध्वज लहराया गया - उस पर लिखा था 'आमी सनातनी'। कुछ ही दिनों बाद, BNP नेता फिरोज खान ने आरोप लगाया कि इस घटना में बांग्लादेश का राष्ट्रीय ध्वज अपमानित हुआ है। 19 लोगों पर राजद्रोह का केस दर्ज हो गया - जिसमें सबसे बड़ा नाम था 'चिन्मय कृष्ण दास'। आइए जानते हैं विस्तार से सबकुछ...

Chinmoy Das Bangladesh Case Update

Who is Chinmoy Das: कौन हैं चिन्मय कृष्ण दास?

चिन्मय दास, जिनका असली नाम चंदन कुमार धर है, बांग्लादेश के चटगांव ISKCON मंदिर से जुड़े एक प्रमुख संत हैं। उन्होंने सनातन जागरण मंच नाम के संगठन के प्रवक्ता के रूप में काम किया, जो बांग्लादेशी हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था।

गिरफ्तारी से रिहाई तक पूरा घटनाक्रम

  • 25 नवंबर 2024: ढाका एयरपोर्ट से चिन्मय दास को गिरफ्तार किया गया।
  • 26 नवंबर: उन्हें जेल भेज दिया गया।
  • 2 जनवरी और 11 दिसंबर: उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
  • 23 अप्रैल 2025: वकीलों ने हाईकोर्ट में दोबारा जमानत मांगी।
  • 30 अप्रैल 2025: हाईकोर्ट ने जमानत दे दी, लेकिन अभी रिहाई तय नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक भी लगा सकता है।

क्या था गिरफ्तारी का तरीका?

इस्कॉन के सदस्यों का दावा है कि गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने कोई वारंट नहीं दिखाया। बस यह कहा कि "कुछ बात करनी है", और फिर उन्हें एक गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। चिन्मय दास के नेतृत्व में हिंदुओं की हिफाजत के लिए आवाज उठाई गई, लेकिन अब उनके ही खिलाफ देशद्रोह का आरोप है।

अब आगे क्या?

हालांकि हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट इस आदेश पर रोक लगा देता है, तो उनकी रिहाई फिर टल सकती है।

चिन्मय दास को जेल क्यों भेजा गया था?

उन्हें बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान और देशद्रोह के आरोप में 25 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने चटगांव में एक रैली के दौरान "भगवा ध्वज" फहराने की अनुमति दी थी, जिससे राजनीतिक विवाद पैदा हुआ।

चिन्मय दास को जमानत कब और किसने दी?

उन्हें 30 अप्रैल 2025 को बांग्लादेश हाईकोर्ट से जमानत मिली। यह फैसला न्यायमूर्ति मोहम्मद अताउर रहमान और न्यायमूर्ति मोहम्मद अली रजा की पीठ ने सुनवाई के बाद सुनाया।

क्या चिन्मय दास की रिहाई अब तय है?

हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई अभी सुप्रीम कोर्ट की अनुमति पर निर्भर है। अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाता, तभी उनकी रिहाई संभव है।

चिन्मय दास के खिलाफ केस किसने दर्ज कराया था और कब?

31 अक्टूबर 2024 को बीएनपी के पूर्व नेता फिरोज खान ने चटगांव के कोतवाली थाने में चिन्मय दास और 18 अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप था कि 25 अक्टूबर को एक रैली के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया।

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