तो क्या चीन ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली को कर लिया 'Honeytrap'?
काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चीन से करीबियों के चलते अपने ही देश में घिरते जा रहे हैं। अब उनकी रक्षा के लिए चीन ने अपने राजनियक को सक्रिय कर दिया है। नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांकी ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के नेता झालानाथ खनल से मंगलवार को मुलाकात की है। चीन के काठमांडू स्थित दूतावास की तरफ से कहा गया है कि वह नहीं चाहता है कि एनसीपी पर कोई मुश्किल आए। इस बात पर अब बड़े स्तर पर बहस शुरू हो गई है कि क्या पीएम ओली को चीन ने पूरी तरह से अपने प्रभाव में ले लिया है? चीनी राजदूत होऊ यांकी जिनकी करीबियां अब ओली के लिए मुश्किल पैदा कर रही हैं।

भारत के साथ बिगड़े संबंध
जहां एक तरफ नेपाल, चीन के करीब हो रहा है तो उसने दूसरी तरफ भारत के साथ नक्शा विवाद छेड़ दिया है। नेपाल की तरफ यह नक्शा विवाद ठीक उसी समय छेड़ा गया जब पांच मई को पूर्वी लद्दाख में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने घुसपैठ की। यहां से नेपाल और भारत के रिश्तों में दूरी आनी शुरू हो गई और उसके बाद कुछ और बड़े घटनाक्रम हुए। इंडियन आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि भारत यह बात अच्छी तरह से जानता है नेपाल किसके उकसाने पर एक ऐसा विवाद छेड़ रहा है जिस पर कभी पहले कोई आपत्ति नहीं हुई। चीन के समर्थक ओली की तरफ से प्रस्तावित उस नक्शे को नेपाली संसद में मंजूरी मिल गई जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख पर नेपाल ने अपना दावा जताया जबकि ये जगहें भारत की सीमा में आती हैं।

राजदूत की वजह से बदले नेपाल के सुर
इन सबके बीच ही पिछले दिनों इंटेलीजेंस एजेंसियों की एक ऐसी रिपोर्ट आई जिसमें इशारा किया गया था कि चीनी राजदूत यांकी के हस्तक्षेप के बाद ओली ने भारत विरोधी हरकतों को बढ़ावा दिया। नेपाल और भारत के रिश्तें हमेशा से ही मधुर रहे हैं लेकिन चीन के हस्तक्षेप के बाद से इनमें तल्खियां आने लगी। अक्टूबर 2019 में चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक सम्मेलन में हिस्सा लेकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नेपाल के रास्ते अपने देश वापस लौटे थे। एजेंसियों के मुताबिक नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांकी ने नक्शे में बदलाव के लिए पीएम केपी ओली को राजी किया था। इसके बाद ही ओली ने ऐसा नक्शा तैयार किया जिसे भारत के खिलाफ एक बड़े कदम की तरह देखा जा रहा है। नेपाल की मीडिया का एक वर्ग यहां तक कह रहा है कि यांकी की वजह से ही ओली और पूर्व पीएम पुष्प दहल कमल 'प्रचंड' में दूरियां आ गई हैं।
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ओली को बचाने में लगी चीनी राजदूत
कहा जा रहा है कि अब वह लगातार एनसीपी के उन नेताओं से मुलाकात करने में बिजी हैं जो ओली के विरोध में हैं। पूर्व नेपाली पीएम पुष्प दहल कमल 'प्रचंड', राष्ट्रपति बिधया देवी भंडारी और पार्टी के सीनियर लीडर्स माधव कुमार नेपाल से यांकी अब तक मिल चुकी हैं। यांकी ने अप्रैल 2018 में नेपाल राजदूत की जिम्मेदारी संभाली है। इसी वर्ष फरवरी में ओली नेपाल के पीएम बने थे। पेइकिंग यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाली 50 साल की यांकी को दक्षिण एशियाई मामलों का जानकार माना जाता है। इसी वजह से उन्हें चीन के विदेश मंत्रालय में भी लंबे समय तक डिप्टी डायरेक्टर का पद दिया गया था। यांकी ने इस पद रहते हुए कई ऐसे अहम फैसले लिए जिनसे जिनसे चीन का संबंध पड़ोसी देशों से प्रभावित हुआ। यांकी ने चीनी राजदूत के तौर पर पाकिस्तान में भी तीन साल बिताए हैं।

11 गांवों पर चीन का कब्जा
ओली के अपने ही देश में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। महंगाई आम जनता की कमर तोड़ती जा रही है और नमक जैसी जरूरी चीजों के दाम 100 रुपए तक पहुंच गए हैं। देश में केपी ओली के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार किसी भी पल गिर सकती है। नेपाल में केपी ओली की सरकार को कोविड-19 और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जनता का भारी गुस्सा झेलना पड़ रहा है। नेपाल के 11 गांवों पर चीन के कब्जे की खबरें भी
पिछले दिनों सुर्खियों में थी। 12 जून को बिहार के सीतामढ़ी स्थित नेपाल बॉर्डर की तरफ से फायरिंग हुई थी। इसके बाद से ही नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा में लगी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की तरफ से चौकसी बढ़ा दी गई है। नेपाल और भारत का बॉर्डर खुला हुआ है और इसे हमेशा से ही दक्षिण एशिया में एक अनोखा घटनाक्रम करार दिया जाता है। नेपाल की जनता अपनी ही सरकार को कोस कर रही है और बार-बार भारत के साथ संबंधों को सामान्य बनाने और आपसी रिश्तों को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। लेकिन ओली किसी की सुनने को तैयार नहीं हैं। वह यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि नई दिल्ली में उनके तख्तापलट की
साजिशें हो रही हैं।

पाकिस्तान में रहीं तो सीख डाली उर्दू
चीनी नागरिक होऊ यांकी को दक्षिण एशियाई मामलों का जानकार माना जाता है। इसी लिहाज से यांकी ने मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स में भी लंबे वक्त तक डिप्टी डायरेक्टर की भूमिका निभाई और कई अहम फैसले लिए, जिनसे चीन का संबंध पड़ोसी देशों से प्रभावित हुआ। यांकी ने चीनी राजदूत के तौर पर पाकिस्तान में भी तीन साल बिताए। यांगी किस कदर कूटनीति की बाजी चलती हैं इसे समझना बहुत ही आसान है। चीनी देश से आने वाली यांकी को जब पाकिस्तान में जिम्मा दिया गया तो उन्होंने मेलजोल बढ़ाने के लिए उर्दू भाषा तक सीख ली थी और पाक राजनेताओं से मेलजोल के मौके पर फ्लूएंट उर्दू बोला करती थीं ताकि उन्हीं में से एक लगें।

नेपाल की संसद को करवाया राजी
भारतीय खुफिया एजेंसियों की मानें तो पाकिस्तान में राजदूत रहते हुए यांकी ने कई पाकिस्तानी नीतियों के लिए काम किया, जिसका भारत से कहीं न कहीं ताल्लुक था। पाकिस्तान जैसे जटिल देश में तीन अहम साल देने के बाद यांकी को नेपाल भेजा गया। इसके पीछे एक राजदूत के तौर पर यांकी की सफलता ही मानी जाती है। भारत-नेपाल के संबंध हमेशा से ही बड़े-छोटे भाई जैसे ही रहे और कूटनीतिक टकराव की नौबत नहीं आई थी। अब माना जा रहा है कि नेपाल के पीएम के विवादित नक्शा बनाने के पीछे यांकी का ही हाथ है। उन्होंने ही पीएम ओली और नेपाल की संसद को इसके लिए तैयार किया।

चीन की इमेज चमकाने की कोशिश
यांकी को चीन में फिलहाल सबसे ताकतवर राजनयिकों में गिना जाता है और उनकी पोस्टिंग पहले पाकिस्तान और फिर नेपाल में होना चीन की किसी खास रणनीति की ओर इशारा करता दिख रहा है। यांकी सोशल मीडिया को भी अपने देश की स्थिति मजबूत करने के लिए प्रयोग करती आई हैं। ट्विटर जो चीन में बैन है, उस पर वह चीन की छवि को बेहतर बनाने के लिए जानी जाती हैं।इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वे चीन की सांस्कृतिक और सामाजिक बातों का बखान करती हैं ताकि बड़े स्तर पर लोगों के मन में चीन की स्थिति बेहतर की जा सके। इसे राजनीतिक शब्दों में सॉफ्ट पावर बढ़ाना कहते हैं।












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