क्या Internet apocalypse आ रहा है, इस भयानक सौर तूफान से धरती पर मच सकती है तबाही?

आज आपसे कोई कह दे कि अनिश्चितकाल के लिए बिना इंटरनेट या फोन के रहना पड़ सकता है तो आपको कैसा लगेगा? वास्तविकता यही है कि ज्यादातर लोगों के लिए इसकी कल्पना ही परेशान करने वाला है।

दरअसल, वैज्ञानिकों के बीच इन दिनों इंटरनेट सर्वनाश या कयामत (Internet apocalypse) की चर्चा छिड़ी हुई है। यह ऐसी संभावित स्थिति है, जिसमें न ही इंटरनेट काम करेंगे और न ही फोन। कोई भी इमरजेंसी सेवा नहीं होगी। बिजली भी रह सकती है गुल। यूं समझ लीजिए कि धरती पर भागती-दौड़ती लाइफ पूरी तरह से ठप।

internet apocalypse due to solar storm

आ सकता है 'इंटरनेट अपोकेलिप्स'-रिपोर्ट
सवाल है क्या वास्तव में कभी 'इंटरनेट अपोकेलिप्स' की स्थिति सही में आ सकती है या आने वाली है? इसका जवाब हां है। हालांकि, अमेरिकी एजेंसी नासा या किसी अन्य संगठन ने आधिकारिक तौर पर इसके बारे में न तो कोई बयान ही जारी किया है और ना ही अभी तक कोई चेतावनी ही दी है।

बहुत ही भयानक सौर तूफान हो सकता है जिम्मेदार
वैज्ञानिकों ने धरती और अंतरिक्ष में मानव-निर्मित टेक्नोलॉजी की मदद से जुटाए गए डेटा पर व्यापक रिसर्च किए हैं। इसके अनुसार धरती से टकराने वाले बहुत ही भयानक सौर तूफान से निश्चित ही 'इंटरनेट अपोकेलिप्स' जैसी घटना हो सकती है।

2012 में बाल-बाल बच गई थी धरती!
वैज्ञानिकों के अनुसार तथ्य ये है कि 2012 में ही ऐसी स्थिति पैदा हो गई थी, लेकिन हम भाग्यशाली रहे कि वह खतरनाक सौर तूफान पृथ्वी के बहुत नजदीक से गुजर गया। सवाल है कि 'इंटरनेट अपोकेलिप्स' आने की आशंका क्यों जताई जा रही है। पिछले कुछ समय में हमने एक से बढ़कर एक भयंकर सौर तूफानों की चर्चा की है। ये सौर तूफान सोलर फ्लेयर, कोरोनल मास इजेक्शन (CME) और सोलर विंड के तौर पर सूर्य से निकलते हैं और पृथ्वी और इसके वायुमंडल तक के लिए खतरा पैदा कर देते हैं।

1859 में सूरज ने दिखाया था ट्रेलर!
सूर्य इस समय अपने 11 वर्षीय चक्र में है और यह अपने अधिकतम गतिविधियों वाली स्थिति (solar maximum)की ओर बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2024-25 में यह बहुत ही ज्यादा सक्रिय होने जा रहा है। बहुतों को लगता है कि आज दुनिया जिस तरह से आपस में संचार माध्यमों से जुड़ी हुई है, उसकी वजह से यह 1859 की तरह के सौर तूफान को झेलने की स्थिति में नहीं है। इसे 'कैंरिग्टन इवेंट' नाम से जाना जाता है। इसकी वजह से उस समय टेलीग्राफ उपकरणों में भी आग लग गई थी।

इसी तरह से 1989 में भी एक खतरनाक सौर तूफान धरती से टकराया था, जिसकी वजह से कनाडा के क्यूबेक पावर ग्रिड घंटों तक ठप पड़ गई थी।

'इंटरनेट अपोकेलिप्स' से क्या होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक जब सूरज की गतिविधियां चरम (solar maximum) पर होंगी तो एक ही दिन उसपर ऐसा सौर तूफान उठ सकता है, जिससे कि हमारे सैटेलाइट खतरे में पड़ सकते हैं, रेडियो सिंग्लन बंद हो सकते हैं और इंटरनेट के साथ-साथ पावर ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो सकती है।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की एक शोधकर्ता संगीता ज्योति ने इस बात की ओर इशारा किया है कि हमारा ज्यादातर इंटरनेट केबल समुद्र के अंदर बिछी हुई है, जो सौर तूफानों के प्रति बहुत ही ज्यादा संवेदनशील हैं। अगर इसपर असर पड़ा तो इनकी मरम्मत में महीनों लग सकते हैं। इससे वैश्विक तबाही मचने की आशंका है।

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