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Iran-Pakistan: ईरान के राष्ट्रपति का पाकिस्तान में दिल खोलकर स्वागत, 17 अरब डॉलर का जुर्माना होगा माफ?

Iran President Pakistan Visit: ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से मिलने के लिए तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचे हैं और पाकिस्तान की सरकार ने उनका जोरदार स्वागत किया है। पाकिस्तान में 8 फरवरी के आम चुनावों के बाद किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की ये पहली यात्रा है।

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के एक्स अकाउंट में कहा गया है, कि ईरानी राष्ट्रपति का इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया और आवास मंत्री मियां रियाज हुसैन पीरजादा और ईरान में पाकिस्तान के राजदूत मुदस्सर टीपू ने उनका स्वागत किया।

Iranian President pakistan visit

ईरानी राष्ट्रपति का पाकिस्तान दौरा

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि ईरानी राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी और एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान आया है जिसमें विदेश मंत्री और कैबिनेट के अन्य सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। राष्ट्रपति रायसी का पाकिस्तान में एक व्यापक कार्यक्रम है और उनका राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मिलने का कार्यक्रम है। प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ, सीनेट के अध्यक्ष यूसुफ रजा गिलानी और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक से आज उनकी मुलाकात हुई है।

शहबाज शरीफ से मुलाकात के बाद ईरान के राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और फिर दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गये। बाद में, टेट-ए-टेट और प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता के लिए आगे बढ़ने से पहले, राष्ट्रपति रायसी और प्रधान मंत्री दोनों ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का एक-दूसरे से परिचय कराया।

अपने प्रस्थान से पहले तेहरान में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान बोलते हुए, राष्ट्रपति रायसी ने पाकिस्तान को एक "भाईचारे वाला इस्लामी देश" कहा और इसकी सरकार और लोगों के साथ ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया। इसके अलावा, राष्ट्रपति ने इस बात पर भी प्रकाश डाला, कि आतंकवाद विरोधी प्रयासों के साथ-साथ फिलिस्तीन में मानवाधिकारों के उल्लंघन सहित विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर इस्लामाबाद और तेहरान दोनों की समान स्थिति है।

अपनी इस्लामाबाद यात्रा पर टिप्पणी करते हुए रायसी ने कहा, कि उनकी यात्रा में दोनों पक्ष सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और व्यापार सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार करेंगे। ईरानी राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय व्यापार को 10 अरब डॉलर तक बढ़ाने का इरादा जताते हुए कहा, कि इस्लामाबाद को ईरानी बाजार से फायदा हो सकता है।

क्या 18 अरब डॉलर का जुर्माना करेंगे माफ

ईरान के राष्ट्रपति उस वक्त पाकिस्तान का दौरा कर रहे हैं, जब ईरान और इजराइल पिछले हफ्ते जंग की दहलीज तक पहुंच गये थे और इसका असर पाकिस्तान पर पड़ने की संभावना जताई गई थी, क्योंकि ईरान और पाकिस्तान एक गैस पाइपलाइन बिछा रहे हैं और ईरान अपने हिस्से का काम पूरा कर चुका है, लेकिन पाकिस्तान अमेरिका के डर से उस डील से भागता आया है।

पाकिस्तान ईरान गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को पाकिस्तान ने सालों तक लटकाए रखा और जब ईरान ने जुर्माना लगाने की धमकी दी, तो उसने आनाकानी करते हुए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए अमेरिका की इजाजत मांगी। लेकिन, ईरान-इजराइल संघर्ष के बाद अब इस बात की उम्मीद नहीं के बराबर है, कि अमेरिका ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को हरी झंडी देगा।

अमेरिका स्थिति द विलसन सेंटर के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर माइकल कुलेगम का भी यही मानना है। जब ईरान ने इजराइल पर 300 से ज्यादा रॉकेट्स दागे तो उन्होंने एक ट्वीट में कहा, कि "इस घटनाक्रम के बाद, अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को उस गैस पाइपलाइन के लिए प्रतिबंधों से छूट देने की कोई संभावना नहीं है, जिसके बारे में उसका दावा है, कि वह ईरान के साथ निर्माण करने की योजना बना रहा है। और इजरायल पर ईरानी हमले से पहले भी यह संभावना लगभग शून्य थी।"

ऐसे में सवाल है, कि आखिर अब पाकिस्तान क्या करेगा? क्या अमेरिका के खिलाफ जाकर पाकिस्तान इस गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट के काम को आगे बढ़ाएगा, या फिर आर्थिक तंगी से जूझने वाला ये देश, 18 अरब डॉलर का जुर्माना चुकाएगा।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका पाकिस्तान और ईरान को गैस पाइपलाइन परियोजना पर आगे बढ़ने की मंजूरी नहीं देता है, तो फिर पाकिस्तान को 18 अरब डॉलर का जुर्माना भरना होगा। पिछले साल मई महीने में पाकिस्तान की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष नूर आलम खान ने कहा था, कि "संयुक्त राज्य अमेरिका को अपने डबल स्टैंडर्ड से दूर रहना होगा, क्योंकि ऊर्जा जरूरतों को लेकर उसका भारत को लेकर अलग रूख है और पाकिस्तान को लेकर अलग रूख है।"

लिहाजा, सवाल ये है, कि जब ईरान के राष्ट्रपति पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे हैं, तो क्या पाकिस्तान उन्हें गैस पाइपलाइन पूरा करने को लेकर आश्वासन देगा और क्या, ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान को यकीन दिला पाएंगे, कि पाकिस्तान को 18 अरब डॉलर से जुर्माने की जरूरत नहीं है?

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