ईरान की बमबारी से थर्राया इजराइली फाइनेंशियल हब, मिसाइल अटैक में स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग तबाह
ईरान और इजराइल के बीच टकराव ने बुधवार को खतरनाक मोड़ ले लिया। इस तनातनी के बीच ईरानी मिसाइलों ने सीधे इजराइली स्टॉक एक्सचेंज की बिल्डिंग को निशाना बनाया। इस हमले में आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई और वैश्विक बाजारों में भी चिंता का माहौल बन गया है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने बुधवार को इजराइल पर एक साथ 25 से अधिक मिसाइलें दागीं। इनमें से कुछ मिसाइलों ने तेल अवीव स्टॉक एक्सचेंज (Tel Aviv Stock Exchange - TASE) को भी निशाना बनाया, जिससे बिल्डिंग को भारी नुकसान पहुंचा। इस घटना से ठीक पहले एक इजराइली अस्पताल पर भी हमला हुआ जिसमें कई लोग घायल हो गए हैं।

तनाव के बीच स्टॉक एक्सचेंज का प्रदर्शन अब तक मजबूत
दिलचस्प बात यह है कि इस संकट के बावजूद TASE ने बीते एक महीने में 3.24% की बढ़त दर्ज की है, और पिछले 6 महीनों में 40% से अधिक की तेजी आई है। स्टॉक एक्सचेंज स्थानीय समय अनुसार सुबह 9:59 बजे (भारतीय समय अनुसार दोपहर 12:29 बजे) खुलता है और शाम 5:14 बजे (भारतीय समय 7:44 बजे) बंद होता है।
ईरानी मिसाइल से इजराइल के अस्पताल में भारी नुकसान
इजराइल के सोरोका अस्पताल (Soroka Hospital) के डायरेक्टर जनरल शलोमी कोडेश (Shlomi Kodesh) ने कहा कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों ने अस्पताल की एक पुरानी सर्जिकल इमारत को निशाना बनाया, जिसे हाल ही में खाली किया गया था।
मरीजों और स्टाफ को शेल्टर में भेजा
उन्होंने बताया कि, अस्पताल के कई अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा है। सभी मरीजों और स्टाफ को समय रहते शेल्टर में भेज दिया गया था। जो लोग घायल हुए हैं, उनकी चोटें मामूली हैं और ज्यादातर शॉकवेव से हुई हैं।' कोडेश ने जनता से अपील की है कि जब तक हालात सामान्य न हों, अस्पताल के पास न आएं, सिर्फ इमरजेंसी में ही संपर्क करें।
ईरान का कड़ा संदेश: 'अगर जरूरत पड़ी तो सिखाएंगे सबक'
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी (Kazem Gharibabadi) ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर वह युद्ध में सीधी दखलंदाजी करता है, तो ईरान जवाब देने को तैयार है।
रॉयटर्स के हवाले से उन्होंने कहा कि, 'ईरान युद्ध को और फैलाना नहीं चाहता, लेकिन अगर किसी ने हमला किया, तो हम जवाब देंगे और सबक सिखाएंगे। हमारे पास सभी जरूरी विकल्प मौजूद हैं।' यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियां मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित हैं।
'तेहरान की तानाशाही को चुकानी होगी भारी कीमत'- बेंजामिन नेतन्याहू
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने ईरानी हमले को 'आतंकी तानाशाही की कार्रवाई' बताया और कहा कि इसका जवाब जरूर दिया जाएगा। उन्होंने X (ट्विटर) पर लिखा कि, 'आज सुबह, ईरान के आतंकी तानाशाहों ने बीर शेवा स्थित सोरोका अस्पताल और देश के केंद्र में नागरिक इलाकों पर मिसाइलें दागीं। हम तेहरान के तानाशाहों से इसकी भारी कीमत वसूलेंगे।' नेतन्याहू की यह टिप्पणी इजराइली जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि देश की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की असली वजह क्या है?
ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध जैसे हालात का कारण सिर्फ एक या दो घटनाएं नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक, धार्मिक और रणनीतिक टकराव हैं।
क्षेत्रीय वर्चस्व की जंग
- ईरान और इजराइल, दोनों ही मध्य पूर्व में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
- ईरान खुद को एक इस्लामी ताकत के रूप में स्थापित करना चाहता है
- इजराइल अमेरिका और पश्चिमी देशों के समर्थन से लोकतांत्रिक और सैन्य ताकत बना हुआ है
- दोनों एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी (Rival) मानते हैं।
ईरान का समर्थन शिया आतंकी संगठनों को
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान, हमास (Gaza में) और हिज़्बुल्लाह (Lebanon में) जैसे संगठनों का समर्थन करता है, जो इजराइल के खिलाफ हमले करते हैं। इजराइल इन संगठनों को आतंकी संगठन मानता है। ईरान का इनका समर्थन इजराइल को सीधे निशाने पर लाता है।
परमाणु हथियारों को लेकर डर
- इजराइल को शक है कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बना रहा है।
- इजराइल इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
- कई बार ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर गुप्त हमले (covert attacks) भी किए हैं।












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