अमेरिकी हमले में मरने वाले 3 भारतीय कौन थे? मौत पर क्या कर रही मोदी सरकार? अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?
US Navy Attack on Indian Sailors Update: अंतरराष्ट्रीय राजनीति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की जान। ओमान तट के पास हुए अमेरिकी नौसैनिक हमले ने इन तीनों मुद्दों को एक साथ दुनिया के सामने ला खड़ा किया है। एक कारोबारी जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश की मौत ने सिर्फ उनके परिवारों को नहीं झकझोरा, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों, समुद्री कानून और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर भारत की नाराजगी जाहिर की। वहीं संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी भी इस तरह की कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ऐसे में आइए जानते हैं कि अमेरिकी हमले में मरने वाले 3 भारतीय कौन थे? साथ में ये भी जानेंगे कि इस पूरे मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

ओमान के तट के पास पलाऊ ध्वज वाले कारोबारी टैंकर एमटी सेटेबेलो पर 10 जून 2026 को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हुई। जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। हमले के बाद 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन तीन भारतीय नाविक लापता हो गए। बाद में उनकी मौत की पुष्टि कर दी गई।
अमेरिका का दावा है कि जहाज उसके निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था और क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों तथा नाकेबंदी के दौरान उसे निशाना बनाया गया। हालांकि भारत और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
कौन थे वो 3 भारतीय नाविक जिन्होंने अमेरिकी हमले में गंवाई जान?
🔷कौन थे आदित्य शर्मा? (who was Deck Cadet Aditya Sharma)
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के गलोड क्षेत्र (हड़ेटा) के रहने वाले आदित्य शर्मा की उम्र महज 23 साल थी। वह जहाज पर बतौर डेक कैडेट काम सीख रहे थे। अपने बूढ़े दादा अशोक कुमार के वह इकलौते पोते थे। उनके पिता राजेश शर्मा ने बताया कि 7 जून को आदित्य से उनकी आखिरी बात हुई थी, जिसमें आदित्य ने कहा था कि अमेरिकी नौसेना पिछले दो हफ्तों से उनके जहाज को रोकने की चेतावनी दे रही है, लेकिन फिर भी जहाज को हॉर्मुज स्ट्रेट की तरफ आगे बढ़ाया जा रहा था।

परिवार का आरोप है कि जहाज के कप्तान की गलती और अमेरिकी क्रूरता के कारण यह हादसा हुआ। पिता ने इस कृत्य को 'युद्ध अपराध' (War Crime) करार देते हुए बेटे के शव को जल्द से जल्द घर वापस लाने की मांग की है।
🔷कौन थे शिवानंद चौरसिया? (who was Engine Fitter Shivanand Chaurasia)
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले शिवानंद चौरसिया जहाज के सबसे संवेदनशील हिस्से यानी इंजन रूम में 'इंजन फिटर' के तौर पर तैनात थे। अमेरिकी सेना का पहला वार सीधे इंजन रूम पर ही हुआ, जिसके कारण शिवानंद को संभलने का मौका तक नहीं मिला। वह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जिन पर पूरे घर का बोझ था।

उनके पिता रामजी चौरसिया ने रोते हुए बताया कि हमले से ठीक एक दिन पहले रात को उनकी बात हुई थी, जब शिवानंद ने सब ठीक होने और जल्द घर लौटने का वादा किया था। पत्नी के भाई संजय चौरसिया ने बताया कि उन्हें काफी देर बाद सिर्फ उनके लापता होने की खबर मिली थी, जो बाद में मौत की पुष्टि में बदल गई।
🔷कौन थे पटनाला सुरेश? (who was Chief Engineer Patnala Suresh)
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के रहने वाले 44 वर्षीय पटनाला सुरेश इस कमर्शियल जहाज पर चीफ इंजीनियर की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पिछले 15 सालों से मरीन इंजीनियर के तौर पर दुनिया भर की यात्रा करने वाले सुरेश एक अन्य चीफ इंजीनियर की मदद के लिए इस जहाज पर अस्थायी ड्यूटी पर गए थे। उनकी पत्नी भार्गवी ने बताया कि 10 जून के बाद से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया था।

बाद में दुबई ऑफिस और शिपिंग कंपनी ने पुष्टि की कि जब जहाज के जनरेटर में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने सुरेश नीचे गए थे, ठीक उसी वक्त अमेरिकी हमला हुआ। दोपहर में उनका शव बरामद कर लिया गया। भार्गवी ने भारत सरकार से अपील की है कि कागजी कार्रवाई को तेज कर उनके पति का शव तुरंत भारत लाया जाए।
क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून? क्या अमेरिका ने की है बड़ी अवहेलना? (What Does International Law Say on Sea Attacks)
समुद्री मामलों और वैश्विक संबंधों के जानकारों के मुताबिक, इस हमले में अंतरराष्ट्रीय कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं।
🔷संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन: अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर का अनुच्छेद 2(4) किसी भी देश के खिलाफ बल प्रयोग या सैन्य हमले को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। सैन्य कार्रवाई की अनुमति केवल दो ही शर्तों पर दी जा सकती है-या तो कोई देश अपनी आत्मरक्षा (Self-Defense) में ऐसा कर रहा हो या फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने इसकी विशेष मंजूरी दी हो। इस मामले में दोनों ही शर्तें लागू नहीं होती थीं।
🔷नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation): अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुच्छेद 87 और 90 के तहत दुनिया के सभी देशों के कमर्शियल जहाजों को खुले समुद्र (High Seas) में बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने की पूरी आजादी है। चूंकि 'एमटी सेटेबेलो' एक व्यापारिक पोत था न कि कोई युद्धपोत, इसलिए उस पर सीधे सैन्य हमला करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।
🔷वैश्विक संगठनों ने की तीखी आलोचना: संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी 'अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन' (IMO) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने इस अमेरिकी कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि समुद्र में किसी भी नाविक की जान को खतरे में डालना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी इस बयान का समर्थन किया है।
अमेरिकी हमले पर मोदी सरकार का कड़ा एक्शन: राजनयिक को दोबारा किया तलब
इस बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले पर भारत की मोदी सरकार पूरी तरह एक्शन में नजर आ रही है। भारत ने इस घटना को लेकर अमेरिका के सामने बेहद कड़ा और कूटनीतिक रुख अपनाया है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार (13 जून) को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर सीधी बात की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर इसकी जानकारी देते हुए साफ लिखा कि उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
उन्होंने अमेरिका को दो टूक कहा कि व्यापारिक जहाजों के खिलाफ ऐसी घातक और जानलेवा सैन्य कार्रवाई को किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।
नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राजनयिक जेसन मीक्स (Jason Meeks) को दूसरी बार तलब किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि भारतीय क्रू मेंबर्स वाले मर्चेंट जहाजों पर ऐसे हमले तुरंत रुकने चाहिए। भारत ने साफ किया है कि क्षेत्र में शांति के लिए केवल बातचीत और कूटनीति का रास्ता ही अपनाया जाना चाहिए, न कि सैन्य बल का।
भारत सरकार ने अपनी सभी समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और भारतीय नौसेना को अंतरराष्ट्रीय समुद्री अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में किसी अन्य भारतीय नाविक की सुरक्षा खतरे में न पड़े।
अमेरिका की क्या है सफाई?
इस चौतरफा घिरने के बाद अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने अपनी सफाई पेश की है। उनका दावा है कि 'एमटी सेटेबेलो' नाम का यह टैंकर ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और नाकेबंदी (Blockade) का उल्लंघन कर रहा था।
अमेरिकी सेना के मुताबिक, उनके बलों द्वारा जहाज को रुकने और जांच कराने के लिए कई बार निर्देश और चेतावनियां दी गईं थीं, लेकिन जहाज प्रशासन ने उन निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू करने के लिए अमेरिकी सैन्य विमान ने जहाज के इंजन कक्ष को निशाना बनाकर प्रोजेक्टाइल हमला किया।
क्या कहते हैं देश के बड़े एक्सपर्ट्स? (What Geopolitical Experts Say on India's Stance)
इस मामले पर देश के बड़े भू-राजनीतिक विश्लेषकों और थिंक टैंकों ने गहरी चिंता जताई है और भारत की रणनीति पर सवाल भी उठाए हैं।
🔷BBC की रिपोर्ट के मुताबिक अशोक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कांति वाजपेयी का मानना है कि आज का अमेरिका भारत को एक आदर्शवादी रणनीतिक साझेदार के रूप में देखने के बजाय केवल एक बड़े बाजार, हथियारों के खरीदार और निवेश के केंद्र के रूप में देखता है। भविष्य की राजनीति पूरी तरह से व्यावहारिक हितों (Transactional Politics) पर आधारित है।
🔷जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट जोरावर दुलत सिंह ने लिखा कि पश्चिमी देश अपने घरेलू कानूनों और प्रतिबंधों को पूरी दुनिया पर जबरन थोपना चाहते हैं। खुद को अंतरराष्ट्रीय कानून से ऊपर समझने का यह अमेरिकी रवैया ही आज वैश्विक अस्थिरता का सबसे बड़ा कारण है। भारत को अमेरिका के इस आक्रामक रवैये के पीछे के तर्कों को समझने के बजाय सख्त रुख अपनाना होगा।
🔷ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के निदेशक अजय श्रीवास्तव ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद भी अमेरिका ने अब तक एक बार भी सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी है और न ही पीड़ितों के परिवारों के प्रति कोई संवेदना व्यक्त की है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर ऐसे एकतरफा हमले वैश्विक व्यापार और मानवीय मूल्यों के लिए बेहद खतरनाक हैं।













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