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Iran War Strategy: ईरान ने रणनीति बदली, अमेरिका और इजरायल को सबक सिखाने के लिए बरसाएगा 1000 किलो के बम!

Iran War Strategy: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अब अपनी युद्ध रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। तेहरान की नई मिसाइल रणनीति से दुनिया सकते में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों में एक-एक टन तक के भारी वॉरहेड लगाने की तैयारी कर रहा है। इस रणनीति के तहत प्रयोग शुरू भी कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव क्षेत्र में युद्ध की स्थिति को और खतरनाक बना सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की इस नई रणनीति की जानकारी IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के एयरोस्पेस कमांडर जनरल मौसवी ने दी है। उन्होंने बताया कि मिसाइल स्ट्राइक को अधिक प्रभावी बनाने और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को कमजोर करने के लिए रणनीति में बदलाव किया गया है। इस नई योजना में ज्यादा वजन वाले वॉरहेड और एक साथ कई मिसाइलों के हमले को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे इजरायल और अमेरिका को भारी नुकसान हो सकता है।

Iran War Strategy

Iran War Strategy: वजनी वॉरहेड से करेगा ईरान हमला

- सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि तेहरान अब पारंपरिक मिश्रित पेलोड वाली मिसाइलों के प्रयोग की रणनीति बदल रहा है। अब एक टन या उससे अधिक वजन वाले वॉरहेड को स्टैंडर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Iran Strategy: इजरायल के संवेदनशील ठिकाने निशाने पर

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अगर भारी वॉरहेड वाली मिसाइलें इस्तेमाल की जाती हैं, तो उनका विनाशक प्रभाव काफी ज्यादा होगा। संभावना जताई जा रही है कि ईरान इजरायल के एयरबेस, बंकर, बंदरगाह, लॉजिस्टिक हब और कमांड सेंटर जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर एक टन वॉरहेड वाली मिसाइल किसी सैन्य ठिकाने पर गिरती है तो उसका प्रभाव सामान्य मिसाइलों से कहीं ज्यादा होता है। इससे मजबूत कंक्रीट संरचनाएं भी पूरी तरह तबाह हो सकती हैं।

Iran Israel Conflict: सामान्य मिसाइलों से कहीं ज्यादा ताकत

आम तौर पर कई बैलिस्टिक मिसाइलों में लगभग 500 किलोग्राम तक का वॉरहेड लगाया जाता है, लेकिन एक टन यानी 1000 किलोग्राम का वॉरहेड विस्फोट की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे हमलों से कंक्रीट शेल्टर, हथियार डिपो और रनवे जैसी संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। अगर इस तरह की मिसाइल किसी एयरबेस पर गिरती है तो रनवे में इतना बड़ा गड्ढा बन सकता है कि उसे ठीक करने में कई दिन लग सकते हैं। इसी तरह यदि मिसाइल तेल भंडार या हथियारों के गोदाम पर गिरती है तो वहां बड़ा विस्फोट और चेन रिएक्शन शुरू हो सकता है, जिससे पूरे सैन्य अड्डे को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने की रणनीति

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान अब डिफेंस सैचुरेशन टैक्टिक्स पर काम कर रहा है। इसका मतलब है कि एक साथ बड़ी संख्या में मिसाइलें दागकर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को थका देना। इससे इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार जल्दी खत्म हो सकता है और कुछ मिसाइलें लक्ष्य तक पहुंचने में सफल हो सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी रणनीति खासतौर पर इजरायल के आयरन डोम, डेविड स्लिंग और एरो एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने के लिए तैयार की गई है।

मिडिल ईस्ट में पहले से जारी तनाव के बीच ईरान की इस नई मिसाइल रणनीति ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। यदि भारी वॉरहेड वाली मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है तो इसका असर सिर्फ इजरायल ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी पड़ सकता है।

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