Iran US Mediation: ईरान ने पाकिस्तान को दिखाया आईना! कहा- 'तुम मध्यस्थ नहीं, अमेरिका के तरफदार हो'

Iran-US Mediation: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान एक 'शांतिदूत' की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तेहरान ने उसकी नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी सांसद इब्राहिम रजाई का मानना है कि पाकिस्तान का झुकाव हमेशा अमेरिका की तरफ रहता है, इसलिए वह एक निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हो सकता।

यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान दूसरे दौर की बातचीत कराने की कोशिशों में जुटा है। ईरान का यह अविश्वास दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों और क्षेत्रीय शांति पर गहरा असर डाल सकता है।

Iran-US Mediation

ईरान का पाकिस्तान पर अविश्वास

ईरानी सांसद इब्राहिम रजाई ने स्पष्ट कहा है कि पाकिस्तान एक अच्छा पड़ोसी तो है, लेकिन मध्यस्थ के तौर पर उसकी साख (credibility) संदिग्ध है। उनका मानना है कि पाकिस्तान की नीतियां हमेशा अमेरिकी हितों, खासकर डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकताओं के इर्द-गिर्द घूमती हैं। ईरान को लगता है कि पाकिस्तान अमेरिका की गलतियों और वादाखिलाफी को छिपाने की कोशिश करता है। ऐसे में, एक तरफा झुकाव रखने वाला देश कभी भी दो दुश्मनों के बीच निष्पक्ष समझौता नहीं करा सकता।

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अमेरिका के साथ पुराना रिश्ता

पाकिस्तान और अमेरिका के बीच दशकों पुराने सैन्य और रणनीतिक संबंध रहे हैं। ईरान का कहना है कि पाकिस्तान चाहकर भी अमेरिका की इच्छा के खिलाफ नहीं जा सकता। उदाहरण के तौर पर, लेबनान सीजफायर और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों के मामले में अमेरिका ने अपने वादे तोड़े, लेकिन पाकिस्तान इस पर खामोश रहा। तेहरान की नजर में पाकिस्तान की यह चुप्पी साबित करती है कि वह वाशिंगटन के दबाव में है और स्वतंत्र होकर काम नहीं कर सकता।

इस्लामाबाद वार्ता की विफलता

अप्रैल के महीने में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच 21 घंटे लंबी बातचीत आयोजित की थी। भारी कोशिशों के बावजूद यह बैठक बेनतीजा रही और कोई ठोस रास्ता नहीं निकल पाया। इस विफलता ने ईरान के शक को और पुख्ता कर दिया है। ईरान का मानना है कि पाकिस्तान केवल दुनिया के सामने अपनी छवि सुधारने के लिए यह दिखावा कर रहा है, जबकि असल में उसके पास अमेरिका को टेबल पर झुकाने की कोई ताकत नहीं है।

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क्षेत्रीय शांति और पाकिस्तान की चुनौती

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर अब दूसरे दौर की बातचीत के लिए जोर लगा रहे हैं। पाकिस्तान के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है क्योंकि वह खुद को इस क्षेत्र में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता है। हालांकि, ईरान की नाराजगी और अमेरिका की सख्त शर्तों के बीच पाकिस्तान के लिए संतुलन बनाना बहुत मुश्किल है। यदि वह ईरान का भरोसा नहीं जीत पाता, तो उसकी मध्यस्थता की यह कोशिश पूरी तरह नाकाम हो जाएगी।

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