ईरान की एलनाज़ रेकाबी अचानक से छाईं, हर तरफ़ हो रही तारीफ़
ईरान की महिला एथलिट एलनाज़ रेकाबी दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में एशियन क्लाइंबिंग प्रतियोगिता के फ़ाइनल में हिस्सा लेने उतरीं तो वह बिना हिजाब के थीं.
सोल में यह प्रतियोगिता का 16 अक्तूबर को आयोजित हुई थी.

एलनाज़ ईरान का प्रतिनिधित्व कर रही थीं. ईरान की महिलाओं के लिए खेल प्रतियोगिता में भी हिजाब अनिवार्य है. लेकिन ईरान में पिछले क़रीब एक महीने से लोग हिजाब के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं.
इस प्रदर्शन में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. एलनाज़ रेकाबी के बिना हिजाब के उतरने को इस विरोध-प्रदर्शन के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है.
एलनाज़ के बिना हिजाब के क्लाइंबिंग में हिस्सा लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है. लोग बिना हिजाब के उतरने को एलनाज़ की बहादुरी से जोड़ रहे हैं.
- ईरान से कर्नाटक तक: हिजाब या महिलाओं की पसंद का है मामला?
- ईरान में विरोध प्रदर्शन का एक महीना, अब तक क्या हुआ
https://twitter.com/BahmanKalbasi/status/1581795386640826368
बीबीसी फ़ारसी सेवा के संवाददाता बहमान कलबासी ने ट्वीट कर लिखा है, ''दुनिया के क़रीब सभी देशों की महिला एथलिट स्पोर्ट्स आउटफिट में होती हैं. दूसरी तरफ़ ईरान की महिला एथलिट को पिछले 43 सालों से हिबाज के लिए मजबूर किया जा रहा है. ऐसा देश के बाहर खेलने पर भी होता है. हालाँकि एलनाज़ ने बहादुरी से बिना हिजाब के प्रतियोगित में हिस्सा लिया और उनका वीडियो वायरल हो गया.''
https://twitter.com/bbcpersian/status/1581747731768303616
ईरान इंटरनेशल इंग्लिश न्यूज़ ने एलनाज़ का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, ''यह एक एतिहासिक पल है. ईरानी एथलिट एलनाज़ रेकाबी दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में आयोजित एशियन क्लाइंबिंग प्रतियोगिता में ईरान का प्रतिनिधित्व कर रही थीं और उन्होंने बिना हिजाब के क्लाइंबिंग की. एलनाज़ के बिना हिजाब के क्लाइंबिंग करना इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के नियमों का उल्लंघन है. देश के बाहर भी ईरान की महिलाओं को हिजाब में पहनना होता है.''
https://twitter.com/ifsclimbing/status/1581508808219643904
यूएई के हसन सजवानी ने एलनाज़ का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, ''ऐतिहासिक! ईरान की महिला एथलिट एलनाज़ रेकाबी सोल में आयोजित एशियन क्लाइंबिंग प्रतियोगिता के फ़ाइनल में बिना हिजाब के उतरीं. 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद से महिला एथलिट के लिए हिजाब अनिवार्य है लेकिन एलनाज़ ने इसे मानने से इनकार कर दिया. एलनाज़ फ़ाइनल में चौथे नंबर पर आईं लेकिन उन्होंने दुनिया भर में लाखों लोगों का दिल जीत लिया.''
https://twitter.com/HSajwanization/status/1581740684641734658
एलनाज़ जब पहले की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती थीं तो हिबाज में होती थीं. उनके पहले और अभी के वीडियो एक साथ ट्वीट किए जा रहे हैं.
इसराइल और ईरान की दुश्मनी किसी से छुपी नहीं है लेकिन एलनाज़ की तारीफ़ इसराइल के लोग भी कर रहे हैं. इसराइल के हनाया नेफ़्टाली में एलनाज़ का वीडियो क्लिप ट्वीट करते हुए लिखा है, ''एलनाज़ ने इस्लामिक रिपब्लिक के क़ानून को नहीं माना. ईरान की महिलाएं ग़ज़ब की हैं.''
बेल्जियन की सांसद दार्या सफई ने भी एलनाज़ का वीडियो ट्वीट कर उनकी बहादुरी की तारीफ़ की है. दार्या ने लिखा है कि महिलाओं की बग़ावत जारी है.
एलनाज़ को सितंबर 2021 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ स्पोर्ट क्लाइंबिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल मिला था. इस प्रतियोगिता में मेडल जीतने वाली वह ईरान की पहली महिला बनी थीं.
- ईरान में युवती की मौत पर बरपा हंगामा, महिलाओं ने विरोध में उतारे हिजाब
- ईरान हिजाब प्रदर्शन: वो दो लड़कियां जो सड़क पर उतरीं और फिर वापस नहीं लौटीं
https://twitter.com/HananyaNaftali/status/1581780886798077952
तब एलनाज़ ने मेडल जीतने के बाद कहा था, ''मैं बहुत ख़ुश हूँ क्योंकि इस प्रतियोगिता में दुनिया की बेहतरीन क्लाइंबर्स आई थीं. मैंने सोचा भी नहीं था कि मेडल जीत पाऊंगी.''
तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एलनाज़ का निक नेम स्पाइडर वुमन है. एलनाज़ ने स्कूल के दिनों से ही क्लाइंबिंग करना शुरू कर दिया था. एलनाज़ के भाई भी क्लांइबर हैं.
ईरानी पत्रकार सीमा साबेत ने एलनाज़ के वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है, ''एलनाज़ ने अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स में हिजाब हटाकर इतिहास रच दिया है. कमाल की बहादुरी दिखाई. संभव है कि उन्हें दोबारा ईरान का प्रतिनिधित्व करने का मौक़ा ना मिले. ये भी संभव है कि उन्हें सज़ा मिलेगी. लेकिन उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि ईरान की महिलाएं क्या हैं.''
आयरिश डिप्लोमैटिक लेक्चरर डॉ जेनिफ़र कैसिडी ने एलनाज़ की वीडियो रीट्वीट करते हुए लिखा है, ''पूरे ईरान में लोगों के विरोध-प्रदर्शन का ही नतीजा है कि एलनाज़ ने यह हिम्मत दिखाई. यह ऐतिहासिक है. एलनाज़ ने अपनी पसंद को पहले रखा न कि सरकार के क़ानून को.''
ईरान में हिजाब के ख़िलाफ़ क्यों सड़क पर उतरे लोग?
ईरान में हिजाब के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए हैं. 22 वर्षीय अमीनी को 13 सितंबर को मोरेलिटी पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. उन पर हिजाब नियमों के उल्लंघन का आरोप था. ईरान के क़ानून के मुताबिक़ महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलते वक़्त सिर को हिजाब या स्कार्फ से ढकना ज़रूरी है. इस संबंध में कड़े नियम हैं. ऐसी रिपोर्ट सामने आईं हैं कि पुलिस अधिकारियों ने अमीनी को गिरफ़्तार करने के बाद उनके सिर पर डंडे से चोट की थी.
लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अमीनी की 'मौत हार्ट अटैक से हुई.' अपने दावे के समर्थन में उन्होंने अमीनी का फुटेज जारी किया, जिसमें अमीनी को बेहोश होकर गिरते दिखाया गया है लेकिन अमीनी की तस्वीरों ने ईरान के लोगों को ग़ुस्से से भर दिया.
ईरान के आम लोग इससे खासे ख़फ़ा हैं. अमीनी के अंतिम संस्कार के बाद पहला प्रदर्शन ईरान के पश्चिमी शहर सक्कज़ में हुआ. यहाँ महिलाओं ने अमीनी की मौत का विरोध करते हुए अपने सिर पर बंधे स्कार्फ़ फाड़ डाले.
इसके बाद ईरान में लोगों का विरोध बढ़ता ही जा रहा है. अब लोग आज़ादी की मांग से लेकर सरकार को उखाड़ फेंकने के नारे लगा रहे हैं. विरोध इतना बढ़ गया है कि लोग ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए मुखर होते दिख रहे हैं.
कॉपी - रजनीश कुमार
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












Click it and Unblock the Notifications