भारत जा रहे पानी के जहाज पर हमला करने का आरोप बेबुनियाद... ईरान ने अमेरिका के दावे को सिरे से किया खारिज
Iran rejects US claim on Vessel Attack: ईरान ने सोमवार को अमेरिका के इस दावे को ''निराधार'' बताकर खारिज कर दिया है, कि उसने 23 दिसंबर को गुजरात तट के पास अरब सागर में एक रासायनिक टैंकर पर हमला किया था।
हमले के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, कि "अमेरिका का आरोप निराधार है।"

यह प्रतिक्रिया पेंटागन के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें कहा गया था, कि ईरान से लॉन्च किए गए एक ड्रोन ने हिंद महासागर में जहाज पर हमला किया था।
यह घटना शनिवार सुबह लगभग 10 बजे वेरावल से लगभग 200 समुद्री मील दक्षिण-पश्चिम में हुई, जब जहाज को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया। हालांकि, इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन जहाज को नुकसान पहुंचा था।
पेंटागन के प्रवक्ता ने रविवार को जारी एक बयान में समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, कि जहाज पर ईरान की ओर से दागे गए एकतरफ़ा हमले वाले ड्रोन ने हमला किया था।
आपको बता दें, पिछले एक हफ्ते में भारत आने वाले दो जहाजों को निशाना बनाया गया है और पिछले दो महीने में लाल सागर में 10 व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाते हुए 100 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल हमले किए गये हैं, जहां इज़राइल हमास आतंकवादियों से लड़ रहा है।
शुक्रवार को, व्हाइट हाउस ने सार्वजनिक रूप से अमेरिकी खुफिया जानकारी जारी की है, कि ईरान ने हूतियों को ड्रोन, मिसाइल और सामरिक खुफिया जानकारी प्रदान की, जो राजधानी सना सहित यमन के विशाल हिस्सों को नियंत्रित करते हैं।
लेकिन, रविवार को भी ईरान के उप विदेश मंत्री ने शनिवार को अमेरिकी आरोपों को खारिज कर दिया था, कि तेहरान वाणिज्यिक जहाजों पर यमनी विद्रोहियों के हमलों में शामिल है। ईरान के उप-विदेश मंत्री ने कहा था, कि यमनी विद्रोही समूह अपने दम पर काम कर रहा था। पेंटागन ने दावा किया है, कि यमन के ईरान-गठबंधन हूती विद्रोहियों ने गाजा में फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए हूती विद्रोहियों ने ये हमसले किए हैं।
ईरान के उप विदेश मंत्री अली बघेरी ने मेहर समाचार एजेंसी को बताया, कि "प्रतिरोध (हूती विद्रोही) के पास अपने उपकरण (हथियार) हैं... और वह अपने निर्णयों और क्षमताओं के अनुसार कार्य करता है।"
समुद्र में जहाजों को उस वक्त निशाना बनाया जा रहा है, जब इजराइल और हमास के बीच भीषण लड़ाई हो रही है और ईरान, हमास का समर्थन कर रहा है।
गाजा पट्टी पर नियंत्रण रखने वाले हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है, कि गाजा पट्टी ने 11 सप्ताह तक इजरायली हवाई और जमीनी हमलों को झेला है, जिसमें 20,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं।
इजरायली आंकड़ों के आधार पर एएफपी टैली के अनुसार, फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह द्वारा 7 अक्टूबर को सीमा पार से किए गए हमले के बाद इजरायल ने हमास को कुचलने की कसम खाई है, जिसमें इजरायल में लगभग 1,140 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे। फ़िलिस्तीनी उग्रवादियों ने करीब 250 लोगों का अपहरण भी कर लिया, जिनमें से 129 इसराइली अभी भी गाजा पट्टी में हैं।
ईरान, जो आर्थिक और सैन्य रूप से हमास का समर्थन करता है, उसने इज़राइल पर 7 अक्टूबर के हमले की सराहना की है, लेकिन इसमें किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
इस्लामी गणतंत्र ने बार-बार व्यापक संघर्ष की चेतावनी दी है, और पिछले महीने, ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने कहा था, कि युद्ध की तीव्रता ने इसके विस्तार को "अपरिहार्य" बना दिया है। वहीं, इजराइल पर हमास के हमले के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा था, कि वो 'उस शख्स के हाथ चूमना चाहते हैं, जिसने इजराइल पर हमला किया है।'












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