Iran-Israel-US War: 'ईरान की एयर डिफेंस, नेवी-लीडरशिप खत्म, अब वार्ता का वक्त भी खत्म' – ट्रंप का हमला
Iran-Israel-US War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब बातचीत की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका-इजरायल गठबंधन के हमलों से तेहरान की सैन्य क्षमता बुरी तरह तबाह हो चुकी है। पश्चिम एशिया में छिड़ी इस जंग ने सैकड़ों जानें ली हैं, और ट्रंप का मानना है कि अब डिप्लोमेसी का समय निकल चुका है।

युद्ध की शुरुआत और वर्तमान स्थिति क्या है?
28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के सैन्य ऑपरेशन ने ईरान को झकझोर दिया। इजरायल और वाशिंगटन ने मिलकर ईरानी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई टॉप मिलिट्री और पॉलिटिकल लीडर्स मारे गए। ईरान ने जवाब में मिसाइल और ड्रोन अटैक्स तेज कर दिए, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।
ईरानी ड्रोनों ने सऊदी अरब और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों को निशाना बनाया, जहां मामूली नुकसान और आग लगी।
अमेरिका ने इन दूतावासों को बंद कर दिया और मिडिल ईस्ट के कई देशों से नॉन-इमरजेंसी स्टाफ और उनके परिवारों को निकालने का आदेश जारी किया।
तेहरान ने पड़ोसी अरब देशों पर मिसाइलें दागीं और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोक दी। यह स्ट्रेट दुनिया के 20% ऑयल और LNG ट्रेड का रूट है, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट प्रभावित हो रहा है।
ट्रंप का बयान: क्या कहा और क्यों?
- ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक आर्टिकल पर कमेंट करते हुए लिखा:- 'ईरान की एयर डिफेंस, एयर फोर्स, नेवी और लीडरशिप सब खत्म हो चुकी है। वे अब बातचीत करना चाहते हैं। मैंने कहा, 'बहुत देर हो चुकी है!'
- यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान अमेरिकी एसेट्स पर अटैक्स जारी रखे हुए है। ट्रंप का मानना है कि ईरान की मिलिट्री पावर इतनी कमजोर हो चुकी है कि अब नेगोशिएशन का कोई मतलब नहीं। लेकिन क्या यह उनका फाइनल स्टैंड है?
ट्रंप ने रुख बदला?
दरअसल, ट्रंप का यह स्टेटमेंट उनके हालिया इंटरव्यू से उलट लगता है। अटलांटिक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था: 'ईरान का नया लीडरशिप मुझसे बात करना चाहता है, और मैं सहमत हूं। उन्हें यह पहले कर लेना चाहिए था - यह बहुत आसान था। लेकिन उन्होंने देर कर दी।'
फ्लोरिडा से दिए इस इंटरव्यू में ट्रंप ने बातचीत की संभावना जताई, लेकिन डिटेल्स नहीं बताए - जैसे किससे बात होगी या कब। अब उनका नया बयान दिखाता है कि जंग की गर्मी में डिप्लोमेसी की उम्मीद कम हो गई है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जहां पहले हमले से दबाव बनाया जाता है, फिर बातचीत की मेज पर मजबूत पोजिशन ली जाती है।
मानवीय नुकसान: कितनी जानें गईं?
ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के मुताबिक:
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ईरान में अमेरिका-इजरायल के अटैक्स से कम से कम 787 मौतें।
- इजरायल में ईरानी मिसाइलों से 11 मौतें।
- लेबनान में इजरायल के जवाबी हमलों से 52 मौतें(ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के अटैक्स के बाद)।
- यह आंकड़े बढ़ सकते हैं, क्योंकि युद्ध जारी है।
क्या होगा आगे?
अमेरिका और इजरायल के हमले रुकने के कोई संकेत नहीं हैं, जबकि ईरान क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए काउंटर-अटैक कर रहा है। ग्लोबल पावर जैसे रूस और चीन की भूमिका अभी साफ नहीं, लेकिन ऑयल प्राइसेज में उछाल से दुनिया भर की इकॉनमी प्रभावित हो रही है। ट्रंप का बयान बताता है कि शॉर्ट टर्म में जंग जारी रहेगी, लेकिन लॉन्ग टर्म में नेगोशिएशन का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं।












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