Hormuz Conflict: होर्मुज में ईरान का खूनी तांडव, IRGC ने जहाज को गोलियों से छलनी किया, बाल-बाल बची क्रू की जान
Hormuz Strait Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर है। वार्ता टूटने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य जंग का मैदान बन गया है। हाल ही में एक कंटेनर शिप पर ईरान की ओर से हुई फायरिंग ने आग में घी डालने का काम किया है।
ओमान के पास हुई इस घटना में जहाज के कंट्रोल रूम को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग को बेहद खतरनाक बना दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

एक कंटेनर जहाज को बनाया निशाना
ओमान के तट से करीब 15 समुद्री मील दूर एक कंटेनर जहाज को ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने निशाना बनाया। जहाज के कप्तान के अनुसार, गनबोट्स ने पास आकर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे जहाज का मुख्य कंट्रोल रूम क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह है कि हमले के बाद जहाज में आग नहीं लगी और न ही तेल का रिसाव हुआ। सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं, लेकिन इस हमले ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान का रुख
होर्मुज के इलाके में अमेरिकी नौसेना ने अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए रणनीतिक नाकेबंदी की है, जिससे ईरान चिढ़ा हुआ है। इसके जवाब में ईरान ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और अब वह वहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है। दोनों देशों के बीच वर्चस्व की इस लड़ाई में यह तीसरी बड़ी घटना है। अब यह इलाका केवल व्यापारिक मार्ग न रहकर सैन्य शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन चुका है।
टोल टैक्स और नियंत्रण का विवाद
इस पूरे विवाद की एक मुख्य वजह आर्थिक नियंत्रण भी है। ईरान चाहता है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से उसे 'टोल' वसूलने का अधिकार मिले, क्योंकि यह उसके भौगोलिक क्षेत्र के बेहद करीब है। दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और यहां 'फ्री पैसेज' का नियम लागू होता है, यानी कोई भी देश यहां से बिना टैक्स दिए गुजर सकता है।
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कानूनी स्थिति बनाम जमीनी हकीकत
कानूनी तौर पर देखा जाए तो 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है, जहां दुनिया के किसी भी देश के जहाज को आने-जाने का अधिकार है। लेकिन जमीन पर स्थिति बिल्कुल उलट है। ईरान अपनी मजबूत सैन्य मौजूदगी के कारण यहां अपनी मर्जी चलाना चाहता है, जबकि अमेरिकी हस्तक्षेप उसे रोकने की कोशिश कर रहा है। इसी खींचतान के कारण आए दिन जहाजों को रोकने, उन पर फायरिंग करने और चालक दल को बंधक बनाने जैसी घटनाएं हो रही हैं।












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