Iran Ceasefire Terms: 'टेम्परेरी सीजफायर पर नहीं खुलेगा होर्मुज, जो बने-कर लो’, ट्रंप को ईरान की सीधी धमकी

Iran Ceasefire Terms: डोनाल्ड ट्रंप साम-दाम-दंड-भेद और फेक न्यूज, सबका इस्तेमाल कर चुके हैं लेकिन ईरान उनके सीजफायर प्रपोजल को बार-बार ठुकरा रहा है। अब एक बार फिर नए सिरे से दोनों पार्टी के सामने सीजफायर का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें दोनों के लिए कुछ शर्तें और कुछ छूट रखी हैं। आइए जानते हैं कि ये शर्तें और छूट क्या हैं।

क्या दिया ऑफर में?

सूत्रों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका को एक ऐसा प्लान दिया गया है जिससे जंग खत्म की जा सकती है। इस प्लान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को खोलना भी शामिल था, ताकि इंटरनेशनल शिपिंग दोबारा शुरू हो सके। ईरानी अधिकारी ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की ओर से तत्काल युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है, जिस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि ईरान किसी भी तरह के टाइम प्रेशर में आकर फैसला नहीं करेगा।

Iran Ceasefire Terms

दो-स्टेप प्लान: पहले सीजफायर, फिर बड़ा समझौता

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने एक टू-स्टेप प्लान बनाया है:

• पहला स्टेप: तत्काल युद्धविराम
• दूसरा स्टेप: एक व्यापक समझौता, जिससे क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सके

यह प्लान रातोंरात ईरान और अमेरिका के बीच साझा किया गया।

अमेरिका सीजफायर के नाम पर देगा धोखा- ईरान

ईरान ने पाकिस्तान के इस प्रस्ताव में सीजफायर के बदले Strait of Hormuz को फिर से खोलने से साफ इनकार कर दिया है। एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि तेहरान को भरोसा नहीं है कि वाशिंगटन सीजफायर के लिए तैयार है। यही वजह है कि ईरान जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता। ईरान को डर है कि अगर वह बात मान लेगा तो अमेरिका उसे फिर से धोखा देगा। साथ ही ईरान ने साफ कर दिया है कि वह गाजा या लेबनान जैसी स्थिति में नहीं फंसना चाहता- जहां कागज पर युद्धविराम हो, लेकिन हमले जारी रहें।

क्रेडिट खाने के चक्कर में पाक

Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ 45 दिन के संभावित युद्धविराम पर चर्चा कर रहे थे। यह भी एक दो-फेज डील का हिस्सा था, जो आगे चलकर स्थायी शांति की दिशा में जा सकता था। इसमें कई देश शांति लाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पाकिस्तान इसका क्रेडिट अकेले खाना चाहता है।

पाकिस्तान ने नाम दिया 'इस्लामाबाद समझौता'

इस प्रस्ताव को अस्थायी तौर पर "इस्लामाबाद समझौता" नाम दिया गया है। हालांकि दोनों पक्षों में से कोई पक्ष पाकिस्तान नहीं गए हैं। ये समझौता अगर फाइनल हो भी जाएगा तो ऐसा समझौता होगा जहां कोई गया नहीं और उसके नाम पर इसे नाम दिया गया। इस समझौते में ईरान ने पाकिस्तान की होर्मुज खोलने के शर्त को खारिज कर दिया है। जिसके बाद पाकिस्तान को एक बार फिर से झटका लगा है। अब पाकिस्तान फिर कोई दूसरा ऑफर देने की कोशिश में है।

ईरान की सीधी शर्त- दोबारा नहीं हो हमला

अमेरिका की ओर से इस प्रस्ताव पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ईरान ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह तभी स्थायी युद्धविराम के लिए तैयार होगा, जब अमेरिका और इजरायल की तरफ से दोबारा हमला न करने की ठोस गारंटी मिले। ईरान को पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों से भी मध्यस्थता के संदेश मिले हैं।

डील में क्या-क्या शामिल हो सकता है?

सूत्रों के मुताबिक, अंतिम समझौते में ये बातें शामिल हो सकती हैं जैसे- ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील, जमी हुई संपत्तियों की रिहाई और बदले में ईरान का न्यूक्लियर हथियार न बनाने का वादा। हालांकि दो पाकिस्तानी मीडिया में सूत्रों के हवाले से छपी खबर के मुताबिक, इतने कोशिशों के बावजूद ईरान ने अभी तक किसी भी प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी है। एक सूत्र ने साफ कहा, "ईरान ने अभी तक जवाब नहीं दिया है।"

चीन का सपोर्ट फिर भी ईरान राजी नहीं

पाकिस्तान, चीन और अमेरिका तीनों ने मिलकर अस्थायी युद्धविराम का समर्थन किया है, लेकिन ईरान की तरफ से अब तक कोई कमिटमेंट नहीं आया है। चीन ने भी इस मामले पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी। इसकी वजह से होर्मुज़ से गुजरने वाली तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है।

7 अप्रैल तक का अल्टीमेटम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर 7 अप्रैल, 2026 तक होर्मुज़ नहीं खोलने के नजीजे बुरे होंगे। उन्होंने यह बात वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में कही। मध्यस्थ अब ऐसे उपायों पर काम कर रहे हैं, जिससे अमेरिका ईरान की कुछ मांगें मान सके और भरोसा कायम हो सके। इससे समझौते की संभावना बढ़ सकती है। मध्यस्थता करा रहे देशों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े, तो ईरान की जवाबी कार्रवाई खाड़ी देशों के तेल और पानी के ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे पूरे क्षेत्र में बड़ी तबाही आ सकती है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमे कमेंट में बताएं।

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