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Iran America War: ईरान युद्ध पर सरकारी खजाना लुटा रहे ट्रंप, हर 1 सेकेंड पर कितना खर्च कर रहा अमेरिका?

Iran America War: मिडिल ईस्‍ट में जारी संघर्ष राष्‍ट्रपति ट्रंप की उम्‍मीदों के विपरीत लंबा खिंच गया है। एक महीने से अधिक समय से ये युद्ध जारी है। ट्रप को उम्मीद थी कि ईरान कुछ ही हफ्तों में झुक जाएगा लेकिन ईरान अब खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार कर रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप का जल्‍दी जीत के सपने पर पानी फिर गया है।

ईरान के हमले से बौखलाए ट्रप अब इस युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए तमाम हथकंडे अजमा रहे हैं। इसकी वजह है इस युद्ध का असर दुनिया के सबसे अमीर देशों में शुमार अमेरिका के सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। क्‍योंकि अमेरिकी राष्‍ट्रपति ईरान से युद्ध जीतने के लिए अमेरिकी खजाने के पैसे हर दिन पानी की तरह बहा रहे हैं। आइए जानते हैं अमेरिका ईरान के साथ युद्ध पर हर एक सेकेंड पर कितने रुपये खर्च कर रहा है?

Iran America War

हर 1 सेकेंड पर कितना खर्च कर रहा?

स्वीडन स्थित थिंक टैंक सिप्री (SIPRI) की रिपोर्ट अनुसार, अमेरिका हर दिन इस युद्ध पर लगभग ₹8,455 करोड़ का खर्च हो रहा है और प्रति सेकंड 10 लाख रुपये खर्च कर रहा है। यह अमेरिका के लिए बड़ा आर्थिक बोझ है।

  • बम और मिसाइल: ₹3034 करोड़
  • हवाई कार्रवाई: ₹2337 करोड़
  • नौसेना ऑपरेशन: ₹1472 करोड़
  • थाड मिसाइल सिस्टम: ₹902 करोड़
  • खुफिया और साइबर: ₹427 करोड़
  • लॉजिस्टिक्स: ₹285 करोड़

28 फरवरी से 31 मार्च तक कुल खर्च ₹2.63 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है।

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ट्रंप पर बढ़ा दबाव

युद्ध के जल्दी खत्म होने की उम्मीद रखने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब दबाव में हैं। लंबे खिंचते संघर्ष और बढ़ते खर्च के कारण अमेरिकी प्रशासन पर इसे जल्द समाप्त करने का दबाव बढ़ गया है। साथ ही, व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि इस खर्च का बोझ खाड़ी देशों से वसूला जा सकता है।

ऊर्जा संकट

युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे अहम समुद्री मार्ग पर खतरा मंडराने से तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे एशियाई देशों में संकट गहराने लगा है। एशिया पर युद्ध का असर स‍बसे ज्‍यादा हो रहा

खाड़ी देशों पर निर्भर एशिया के देशों में छाया संकट

पाकिस्तान: 83% तेल आयात
बांग्लादेश: 80%
श्रीलंका: 65%

वहीं, नेपाल और भूटान पूरी तरह भारत पर निर्भर हैं।
तेल आपूर्ति में बाधा आने से इन देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है।

भारत बना संकटमोचक

इस मुश्किल समय में भारत क्षेत्रीय सहयोग की बड़ी भूमिका निभा रहा है। भारत ने श्रीलंका को 38,000 मीट्रिक टन ईंधन भेजा बांग्लादेश को अप्रैल तक 40,000 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीज़ल देने की योजना बनाई
नेपाल और भूटान को लगातार ईंधन सप्लाई जारी रखी। इस मदद के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से आभार भी जताया।

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