Interview: भारत पर हावी होने के लिए साऊदी का हथियार है वहाबिज्म
नयी दिल्ली। भारत के सूफी मुस्लिमों पर ईरान का कितना प्रभाव है? विकीलीक्स केबल के हालिया खुलासों को मानें तो साऊदी अरब भारत पर ईरान के प्रभाव को देखना चाहता है। शिया समुदाय का कहना है कि उनका समुदाय बहुत छोटा है इसलिए भारत पर ईरान का कोई असर नहीं।

सदा ए सूफिया हिंद या सूफी वॉयस ऑफ इंडिया के प्रमुख सैयद बाबर अशरफ का कहना है कि इसका मुख्य मकसद वहाबिज्म को फैलाना है। वनइंडिया को दिए खास इंटरव्यू में वहाबिज्म के विरुद्ध कई रैलियां करने वाले सैयद बाबर अशरफ ने कहा कि साऊदी का मुख्य मकसद पूरी दुनिया के सामने वहाबिज्म को खड़ा करना है।
उनका कहना है कि ' मुझे नहीं लगता कि भारत के सूफी मुस्लिमों पर ईरान का प्रभाव है। हम अल्पसंख्यक में है क्योंकि मुस्लिमों में ज्यादातर संख्या शिया समुदाय से ताल्लुक रखती है। उन्होंने कहा कि अगर हम ईरान को समर्थन देना भी चाहें तो सिर्फ नैतिक रूप से दे सकते हैं। और इतनी कम संख्या के साथ ईरान खुद भारत पर यह प्रभाव डालना नहीं चाहेगा।
साऊदी किस मुद्दे को उठाना चाहता है?
साऊदी अरब का सिर्फ एक एजेंडा है। वो चाहता है कि हर सुन्नी मुस्लिम वहाबिज्म का अनुसरण करे। साउदी का सिर्फ एक ही मानना है कि भारत में वहाबिज्म संस्कृति फैलाया जाए। इसलिए वो ईरान के प्रभाव का जिक्र कर रहा है। यह कोई शिया बनाम सुन्नी की कोई लड़ाई नहीं बल्कि वहाबिज्म को फैलाने की एक मुहिम है।
क्या भारत में वहाबिज्म का प्रभाव है?
साऊदी अरब हर संभव प्रयास कर रहा है कि भारत में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक वहाबिज्म फैलाया जा सके। यहां 8 ऐसे फोरम हैं जो ऐसा करने के लिए फंडिंग भी कर रहे हैं। वहाबिज्म लागू करने का मुख्य मकसद है कि भारत में एकता से रह रहे मुस्लिमों में फूट डाली जा सके और एक बड़े विवाद को जन्म दिया जा सके।
वहाबिज्म को लागू कराने का क्या है तरीका
सुपर पॉवर की तरह यह भी एक एजेंडा है। वहाबिज्म से जुड़े लोग भारत के उन हिस्सों को टारगेट करते हैं जहां जनसंख्या ज्यादा हो और निरक्षरता भी हो। वहाबिज्म को भारत में फैलाने वाले लोगों के पास बहुत पैसा है और वो पैसे के बल पर ऐसा एरिया के लोगों को अपने में शामिल करना चाहते हैं।












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