INSTC प्लान क्या है? जिसे अमेरिका के दो दुश्मनों के साथ बनाएगा भारत, जानिए क्यों कहा जा रहा ड्रीम प्रोजेक्ट?
INSTC Project: वो भारत की स्वतंत्र विदेश नीति ही है, जिससे अमेरिका खार खाता रहता है और अब भारत, अमेरिका के दो सबसे बड़े दुश्मनों के साथ मिलकर एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जो अमेरिका फूटी आंखों नहीं सुहा रहा है।
दुनिया के कई देशों के साथ ट्रेड और परिवहन कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए रूस, ईरान और भारत मिलकर नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) पर काम कर रहे हैं, जिससे ना सिर्फ अमेरिकी प्रतिबंध मुंह ताकते रह जाएंगे, बल्कि रूस और ईरान को पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का मुकाबला करने में भी काफी मदद मिलेगी।

हालांकि, अमेरिका जरूर इस प्रोजेक्ट को लेकर मुंह फुलाए बैठा है, लेकिन इस प्रोजेक्ट से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी लाभ होने की संभावना है, खासकर ऐसे वक्त में, जब लाल सागर और स्वेज़ भूमध्य सागर में लगातार हूती विद्रोहियों और समुद्री लुटेरों के हमले होते रहते हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों को लगेगा झटका
अमेरिका और यूरोपीय देशों ने प्रतिबंध को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है और इस वक्त रूस के खिलाफ दर्जनों तरह के प्रतिबंध लगाए गये हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों की बात नहीं मानने का मतलब है, कि वो प्रतिबंध की धमकी देना शुरू कर देते हैं।
अभी इसी हफ्ते ईरान और रूस के साथ काम करने वाली भारत की तीन शिपिंग कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया है। जाहिर तौर पर, ये शक्तिशाली देश प्रतिबंध को अपने शक्ति प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, INSTC एक ऐसे ट्रेड रूट का निर्माण करता है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों को काउंटर करता है।
अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था का एक पहलू उन जलमार्गों या सड़क मार्गों पर निगरानी बनाए रखकर व्यापार मार्गों को नियंत्रित करना है, जिनके माध्यम से दुनिया भर में माल की आवाजाही होती है। हाल के दिनों में, ओवरलैंड राजमार्गों - चीन की बेल्ट एंड रोड पहल एक उदाहरण है - जिसने आर्थिक और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए कनेक्टिविटी के साधन के रूप में बहुत महत्व प्राप्त किया है।

INSTC प्रोजेक्ट क्या है?
INSTC का पूरा नाम इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर है और ये कॉरिडोर 7200 किलोमीटर का गलियारा है और इस रूट में रूस के दो सबसे अच्छे दोस्त आते हैं, ईरान और भारत।
INSTC कॉरिडोर ईरान के रास्ते से रूस और भारत को जोड़ने वाले रेलमार्गों, राजमार्गों और समुद्री मार्गों का 7,200 किलोमीटर लंबा नेटवर्क है। रूस पर लगाए गये सख्त पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से रूस का कई देशों के साथ संपर्क बाधित हो गया है और कई देश, पश्चिमी प्रतिबंधों के खिलाफ भी नहीं जा सकते हैं, जिनमें खुद भारत भी शामिल है, लेकिन INSTC इन प्रतिबंधों से अछूता है और मास्को के लिए एक ऐसे कॉरिडोर का निर्माण करता है, जिसके जरिए रूस काफी आसानी से व्यापार कर सकता है।
आईएनएसटीसी योजना में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से दक्षिणी ईरान के बंदरगाहों और वहां से भारत में मुंबई तक 7,200 किलोमीटर का गलियारा शामिल है। इसके अलावा, विचार एक ऐसे शिपिंग मार्ग बनाने का भी है, जो यूरोप से होकर गुजरे। इससे भूमध्य सागर और स्वेज़ नहर के माध्यम से रूस तक के मौजूदा रास्ते की लंबाई भी लगभग आधी हो जाएगी।
INSTC कॉरिडोर, रूस को तीन मार्गों से ईरान से जोड़ेगा। मुख्य मार्ग, पश्चिमी कैस्पियन मार्ग, रेल और सड़क मार्ग से अज़रबैजान से होकर गुजरता है। केंद्रीय मार्ग जहाज द्वारा कैस्पियन सागर से होकर गुजरता है, और पूर्वी मार्ग कैस्पियन सागर के पूर्वी तट को फॉलो करता है।
भारत के लिए INSTC क्यों है ड्रीम प्रोजेक्ट?
भारत के लिए INSTC कॉरिडोर रणनीतिक महत्व भी रखता है, क्योंकि यह कट्टर दुश्मन पाकिस्तान को सीधे तौर पर दरकिनार करते हुए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच प्रदान करता है।
साल 2016 में भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेहरान यात्रा के दौरान ईरान के चाबहार बंदरगाह पर बर्थ विकसित करने के लिए 85 मिलियन डॉलर निवेश और 150 मिलियन डॉलर का सॉफ्ट लोन ईरान को देने की घोषणा की थी।
नई दिल्ली चाहता है, कि आईएनएसटीसी में चाबहार को भी शामिल कर लिया जाए और अगर ऐसा होता है, तो ईरान के चाबहार पोर्ट, जिसे भारत ने बनाया है, वो एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग बन जाएगा, जिससे आने वाले वक्त में भारत को काफी ज्यादा फायदा होगा।
ईरान पर पश्चिमी प्रतिबंधों ने INSTC में निवेश की संभावना को काफी जटिल बना रखा है, लेकिन अब परिस्थितियां काफी बदल गई हैं, और पश्चिमी प्रतिबंधों ने यूरोपीय रास्ते रूस के लिए बंद कर दिए हैं, लिहाजा अब रूस की प्राथमिकतां भी तेजी से बदल रही हैं। पिछले कई सालों से भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार का लगभग स्थिर स्तर बना हुआ था, जो सालाना आठ अरब डॉलर से 11 अरब डॉलर के बीच मंडरा रहा था, लेकिन अब भारत और रूस का व्यापार रॉकेट की रफ्तार से बढ़ चुका है।
इसके अलावा, उत्तर-दक्षिण गलियारे यानि INSTC का विकास लाल सागर-भूमध्यसागरीय लिंक के व्यावसायिक महत्व को नए दक्षिण कोकेशियान क्षेत्र गलियारे में ट्रांसफर कर देगा। इस प्रोजेक्ट ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। उदाहरण के लिए, ईरान ने अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों के बावजूद, रूस को ड्रोन की आपूर्ति की है।
वहीं, यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि इस प्रोजेक्ट की वजह से अजरबैजान को रेल माल ढुलाई में करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि सड़क माल ढुलाई 35 प्रतिशत बढ़कर 1.3 मिलियन टन हो गई थी। अज़रबैजान को उम्मीद है, कि कुल माल ढुलाई प्रति वर्ष 30 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी। और इसके लिए, वह अरस नदी को पार करते हुए एक रेलवे और सड़क का निर्माण करने की योजना बना रहा है, जो ईरान के साथ इसकी सीमा पर बहती है। यानि, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध ने दुनिया को नये विकल्पों की तरफ कदम बढ़ाने के लिए विवश कर दिया है और आने वाले वक्त एशिया पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध का असर न्यूनतम हो जाएगा।












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