Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विकास का जितना दावा करते हैं, क्या वो वास्तविक है?
Narendra Modi News: भारत में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव शुरू हो चुका है और तमाम नेता अपने अपने हिसाब से चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
140 करोड़ लोगों की आबादी वाले देश में अनुमानित 96 करोड़ लोग मतदान में भाग लेने योग्य हैं और शुक्रवार को पहले चरण का मतदान होने जा रहा है और सात चरणों में होने वाला ये चुनाव अभी एक महीने से ज्यादा वक्त तक चलेगा। अलग अलग अनुमानों में संभावना जताई गई है, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक और कार्यकाल हासिल कर लेंगे, जो उन्हें पंडित नेहरू के बाद सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहने वाला नेता बना देगा।

अमेरिका के सीएनएन ने लिखा है, कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत 21वीं सदी की आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, जो विकास की तलाश कर रहे निवेशकों, उपभोक्ता ब्रांडों और अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में जोखिम कम करने की तलाश कर रहे निर्माताओं के लिए चीन का एक वास्तविक विकल्प पेश कर रहा है।
हालांकि, इस वक्त जब चीन के पश्चिमी देशों के साथ संबंध तेजी से खराब हो रहे हैं, उस वक्त भारत के दुनिया के ज्यादातर बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के साथ काफी मजबूत संबंध बन चुके हैं और भारत, देश में कारखाने स्थापित करने के लिए बड़ी कंपनियों को आक्रामक रूप से लुभा रहा है।
लिहाजा, सवाल ये है, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को अपने दो कार्यकालों के 10 सालों में भारत को एक मॉडर्न इंडिया बना पाए हैं? क्या मोदी सरकार ने भारत को उस स्थिति पर ला दिया, जहां से भारत आने वाले सालों में चीन की बराबरी करने के सपने देख सकता है? क्या भारत उस स्थिति में आ पाया है, जहां चीन से निकलने वाले विदेशी निवेशक बिना झिझक भारत पहुंच जाएं? आइये आंकड़ों की कसौटी पर मोदी सरकार के 10 सालों के कार्यकाल को परखने की कोशिश करते हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था में किस रफ्तार से विस्तार?
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भारत की अर्थव्यवस्था 3.7 ट्रिलियन डॉलर की हो चुकी थी, जिससे अब भारत, दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन चुका है और प्रपधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के एक दशक के दौरान, भारत ने इस रैंकिंग में चार स्थान की छलांग लगाई है।
इस दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन चुका है।
साल 2014 से 2023 के बीच भारत की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में 55% की वृद्धि हुई। देश उस समय अवधि के भीतर दुनिया की नौवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया, और भारत ने अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सकल घरेलू उत्पाद में सबसे बड़ी वृद्धि दर हासिल की है।
IMF की हालिया रिपोर्ट में भी भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.8 रहने की उम्मीद जताई गई है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।
वर्ल्ड बैंक, इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014 से लेकर 2023 के बीच अमेरिका की GDP में 54% का इजाफा हुआ है, चीन की GDP में 68% का इजाफा हुआ है, जबकि भारत की GDP में 83% का इजाफा दर्ज किया गया है। और इतना ज्यादा दुनिया के किसी भी अर्थव्यवस्था में विकास दर्ज नहीं किया गया है।
लिहाजा, दक्षिण एशियाई दिग्गज बन चुके भारतीय अर्थव्यवस्था, आने वाले कुछ वर्षों में कम से कम 6% की वार्षिक दर से विस्तार करने के लिए आरामदायक स्थिति में है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है, कि अगर वह आर्थिक महाशक्ति बनना चाहता है, तो उसे 8% या उससे ज्यादा की वृद्धि दर का लक्ष्य रखना होगा।
अगर भारत 6 प्रतिशत से ज्यादा दर से भी विकास दर की रफ्तार को बनाए रखका है, को देश 2027 तक अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर आ जाएगा, जो एक बड़ी उपलब्धि होगी।
हालांकि, विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए अभी भारत को काफी कुछ करना होगा और 2022 की रिपोर्ट में भारत प्रति व्यक्ति इनकम के मामले में 147वें स्थान पर था।
स्विट्जरलैंड में सेंट गैलेन विश्वविद्यालय में मैक्रोइकॉनॉमिक्स के प्रोफेसर गुइडो कोज़ी के मुताबिक, जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ेगी, "प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद पर प्रभाव कम होगा"। लेकिन उन्होंने आगाह किया, कि "ट्रिकल-डाउन अर्थशास्त्र आय असमानता को कम करने की गारंटी नहीं देता है, और समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियां आवश्यक हो सकती हैं।"

मॉडर्न इंडिया बनने का मोदी सरकार का सफर
जैसा कि चीन ने तीन दशक से भी पहले किया था, भारत भी सड़कों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और रेलवे के निर्माण पर अरबों खर्च करके बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार कर रहा है। इस बीच, निजी निवेशक भारत में दुनिया का सबसे बड़ा हरित ऊर्जा संयंत्र बना रहे हैं।
अकेले इस वर्ष के संघीय बजट में, आर्थिक विस्तार को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय के लिए 134 अरब डॉलर का प्रावधान किया गया है।
देश भर में चल रहे आक्रामक रफ्तार से निर्माण का परिणाम जमीन पर देखे जा सकते हैं। भारत ने 2014 से 2023 के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में लगभग 55,000 किलोमीटर जोड़ दिया है, जो कुल लंबाई में 60% की वृद्धि है। बुनियादी ढांचे के विकास से अर्थव्यवस्था के लिए कई फायदे हैं, जिनमें रोजगार पैदा करना और व्यापार करने में आसानी में सुधार शामिल है। इसके अलावा, भारत के ज्यादातर शहरों के आपस में जुड़ने से यातायात और माल ढुलाई काफी आसान हो जाती है।
हाल के वर्षों में, भारत ने कई तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म भी बनाए हैं - जिन्हें डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में जाना जाता है - जिन्होंने लोगों के जीवन और उनके व्यवसायों को बदल दिया है।
उदाहरण के लिए, 2009 में शुरू किए गए आधार कार्यक्रम ने लाखों भारतीयों को पहली बार पहचान का प्रमाण प्रदान किया है। दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक डेटाबेस ने कल्याणकारी पहलों में भ्रष्टाचार को काफी कम करके सरकार को लाखों लोगों तक वेलफेयर कार्यक्रम पहुंचाने में भी मदद की है। इसका सबसे बड़ा फायदा कोरोना संकट के समय देखा गया था। हालांकि, आधार कार्यक्रम की शुरूआत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुई थी, जिसे मोदी सरकार ने तेजी से आगे बढ़ाया और बिजली की रफ्तार से लोगों के बैंक अकाउंट खोले गये।
इसके अलावा, एक और प्लेटफॉर्म, यूनिफ़ाइड पेमेंट इंटरफ़ेस (UPI) ने भारत में एक तरह से क्रांति ला दी है। यूपीआई उपयोगकर्ताओं को QR कोड को स्कैन करके तुरंत भुगतान करने की अनुमति देता है। भारत में कॉफी शॉप मालिकों से लेकर भिखारियों तक यूपीआई को देखा जा सकता है। और ऐसी व्यवस्था दुनिया में अभी भी चीन, अमेरिका और जापान जैसे देशों को छोड़कर कहीं नहीं है।
स्टॉक मार्केट का सुपरपावर बना भारत
भारत की विकास क्षमता को लेकर पूरी दुनिया में जो उत्साह बना है, उसे भारतीय शेयर बाजार में देखा जा सकता है, जो रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच रहा है। भारत के एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध कंपनियों का मूल्य पिछले साल के अंत में 4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है।
भारत में दो प्रमुख एक्सचेंज हैं: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) और बीएसई, एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज, जिसे पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के नाम से जाना जाता था।
CNN की रिपोर्ट में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के हवाले से कहा गया है, कि भारत का नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, इस साल दुनिया का छठा सबसे बड़ा एक्सचेंज बन गया है। फरवरी 2023 से फरवरी 2024 के बीच इसका बाजार पूंजीकरण 50% बढ़ गया है, जो दुनिया के तमाम प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में सबसे ज्यादा वृद्धि दर है।
इसके अलावा, इस साल NSE ने शेन्ज़ेन स्टॉक एक्सचेंज और हांगकांग एक्सचेंज दोनों को पछाड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा एक्सचेंज बन गया है। जनवरी में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के आंकड़ों में इसकी जानकारी दी गई है।
मैक्वेरी कैपिटल के मुताबिक, खुदरा निवेशक अकेले भारत के इक्विटी बाजार मूल्य का 9% हिस्सा रखते हैं, जबकि विदेशी निवेशक 20% से थोड़ा कम पर हैं। हालांकि, विश्लेषकों को उम्मीद है, कि चुनाव खत्म होने के बाद 2024 की दूसरी छमाही में विदेशी निवेश काफी तेजी से बढ़ेगा। फिलहाल, विदेशी निवेशकों की नजर देश में होने वाले चुनाव पर है और वो देखने की कोशिश कर रहे हैं, कि देश में किस पार्टी की कैसी सरकार बनती है?
फैक्ट्रियों में दनादन होते काम
CNN के मुताबिक, मोदी सरकार आक्रामक तरीके से इस दिशा में काम कर रही है, कि आपूर्ति शृंखला संकट की वजह से जो कंपनियां चीन से बाहर निकल रही हैं, वो भारत आए। कई अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां, चीन से दूर अपने ऑपरेशन में विविधता लाना चाहती हैं, जहां उन्हें कोविड महामारी के दौरान बाधाओं का सामना करना पड़ा और बीजिंग और वाशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव ने भी कंपनियों को चिंता से भर दिया है।
एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल से लेकर फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों तक 14 क्षेत्रों में विनिर्माण स्थापित करने के लिए और कंपनियों को आकर्षित करने के लिए, 26 अरब डॉलर का उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन कार्यक्रम शुरू किया है।
जिसकी वजह से, Apple (AAPL) सप्लायर फॉक्सकॉन सहित दुनिया की कुछ सबसे बड़ी कंपनियां भारत में अपने ऑपरेशन का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही हैं।
अरबपति एलन मस्क ने भी पिछले हफ्ते एक्स पर कहा था, कि वह भारत में पीएम मोदी से मिलने के लिए "उत्सुक" हैं। हालांकि, उन्होंने तारीख का खुलासा नहीं किया। ऐसी संभावना है, कि टेस्ला (TSLA) बॉस जल्द ही भारत में एक बड़े निवेश की घोषणा कर सकते हैं। माना जा रहा है, कि इलेक्टिक गाड़ियां बनाने वाली टेस्ला भी चीन के बाहर अपने पहले एशियाई कारखाने के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश कर रही है।
साल 2023 में भारत ने दुनिया के लगभग 11% iPhone का निर्माण किया था, जो कि 2021 की तुलना में तीन गुना से ज्यादा है। टेक्नोलॉजी बाजार विश्लेषक फर्म कैनालिस के मुताबिक, भारत में निर्मित iPhone की हिस्सेदारी 2025 तक 23% तक बढ़ने का अनुमान है।

मोदी सरकार के कार्यकाल में नौकरी कहां है?
इसमें कोई शक नहीं, कि भारत तेजी से विकास कर रहा है, लेकिन एक परफेक्ट इकोनॉमी बनने से अभी काफी दूर है। भारत में रोजगार अभी भी एक बड़ा मुद्दा है और अगर नरेन्द्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री चुने जाते हैं, तो उनके सामने लोगों को रोजगार मुहैया करना एक बड़ी चुनौती होगी।
भारत विश्व स्तर पर सबसे युवा आबादी वाला देश है, लेकिन भारत अभी भी अपनी युवा क्षमता का लाभ उठाने में नाकाम रहा है और नौकरी के अवसर बनाने में मोदी सरकार काफी हद तक नाकाम रही है। 15-29 आयु वर्ग के युवाओं को 2023 में बेरोजगारी का सामना करने की संभावना, 15 वर्ष से ज्यादा आयु के सभी व्यक्तियों की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने पिछले महीने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, कि भारत में युवा बेरोजगारी दर अब वैश्विक स्तर से ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि स्नातक डिग्री वाले युवा भारतीयों के लिए बेरोजगारी दर 29% से ज्यादा है, और जो पढ़ या लिख नहीं सकते, उनकी तुलना में लगभग नौ गुना ज्यादा है।
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