AMCA: चीन-पाकिस्तान के पास 5th जेनरेशन विमान, भारत में अब डिजाइन को ही मिली मंजूरी, रेस में कितने पीछे हम?
AMCA Programe India: भारत सरकार की सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के डिजाइन और विकसित करने की परियोजना को मंजूरी दे दी है।
Oneindia.com पर हम लगातार लिखते आए हैं, कि काफी लंबे अर्से से भारतीय एएमसीए डिजाइन की फाइल सीसीएस के पास पड़ी थी, लेकिन मंजूरी नहीं मिल रही है, जबकि चीन के पास दो तरह से पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमान हैं, जबकि पाकिस्तान मे चीनी फाइटर जेट खरीदने की घोषणा की है, जबकि पाकिस्तान के पास तुर्की के KAAN लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में भी शामिल होने का ऑफर है।

एएमसीए प्रोजेक्ट, भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में लाएगा, जिन्होंने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित कर लिए हैं या कर रहे हैं। अभी सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन ने ही ऐसे एडवांस जेट विकसित किए हैं। भारत की AMCA परियोजना डीआरडीओ के तहत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के अधीन है और यह विमान के प्रोटोटाइप का निर्माण करेगी।
इस विमान की निर्माण एजेंसी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) होगी।
सुरक्षा पर कैबिनेट समिति के पास AMCA प्रोजेक्ट के डिजाइन की फाइल पिछले डेढ़ सालों लंबित थी, जबकि विमान की प्रारंभिक डिजाइन समीक्षा 2022 में ही खत्म हो गई थी। इस योजना के मुताबिक, डिजाइन को मंजूरी मिलने के साढ़े तीन साल के भीतर विमान को हैंगर से बाहर निकाला जाएगा और उसके एक साल के भीतर इसकी पहली उड़ान भरी जाएगी। AMCA Mk1 मौजूदा 90kN क्लास इंजन (अमेरिका से GE 414 इंजन) पर उड़ान भरेगा और AMCA Mk2 GTRE द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किए जाने वाले 110kN के मजबूत इंजन से संचालित होगा।
लेकिन, आइये जानते हैं, कि चीन के मुकाबले हमारा AMCA प्रोजेक्ट कितना लेट है?

5th जेनरेशन फाइटर जेट निर्माण में कितने पीछे हम?
स्वदेशी लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण में होने वाली देरी, और प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट में लगातार होने वाली देरी की वजह से भारतीय वायुसेना के पास अब, भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए पुराने लड़ाकू विमानों की घटती इकाइयां ही बची हैं।
पिछले साल अगस्त में यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारतीय वायुसेना के पास अब लड़ाकू विमानों की तुलना में, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल इकाइयां ज्यादा हैं। यानि, भारतीय वायुसेना के बेड़े में लड़ाकू विमानों की संख्या काफी कम हो गई है।
भारतीय AMCA (एडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे थे, क्योंकि इसे 10 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन इसका डेवलपमेंट काफी धीमा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत फाइटर जेट के डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया था और प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाले सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) को धन आवंटन के लिए भेजा गया था, जहां फाइल अटकी हुई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के शुरूआती चरण की ही लागत 15 हजार करोड़ रुपये है, लिहाजा इस फाइल को मंजूरी ना मिलने के पीछे बजट का संकट था।
हाल ही में, डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने एक बयान में कहा था, कि अगर सुरक्षा समिति से फंड आवंटित कर भी दिया जाता है, तो भी पहले प्रोटोटाइप के बनने में कम से कम 7 सालों का वक्त लगेगा। और पहले प्रोटोटाइप को अगर टेस्ट के बाद मंजूरी मिल जाता है, तो उसके तीन सालों के बाद विमान को इंडियन एयरफोर्स के हवाले कर दिया जाएगा। यानि, अब जबकि फाइल को ही मंजूरी मिली है और अगर इसी साल फंड भी जारी कर दिए जाते हैं, तब जाकर 2034 तक पांचवी पीढ़ी के विमान भारतीय वायुसेना को मिल पाएंगे।
हालांकि, 2022 में डीआरडीओ ने संकेत दिया था, कि AMCA प्रोजेक्ट के तहत बने स्टील्थ फाइटर जेट 2025-26 तक उड़ान भरने में कामयाब हो जाएगा, लेकिन अब ऐसा करना संभव नहीं है।
अभी तक दूसरी चिंता इस बात को लेकर है, कि इस प्रोजेक्ट में इतनी देरी होने से कहीं इसका हाल भी तेजस प्रोजेक्ट जैसा ना हो जाए। सोवियत मूल के मिग-21 बेड़े को बदलने के लिए 1983 में स्वीकृत तेजस प्रोजेक्ट में काफी देरी हुई। इस प्रोजेक्ट के तहत 2015 तक एयरफोर्स को तेजस MK-1 फाइटर जेट मिल जाने चाहिए थे, लेकिन तेजस विमानों की डिलीवरी अब जाकर शुरू हुई है, जिसकी वजह से इंडियन एयरफोर्स के पास विमानों की काफी कमी हो गई है।
चीन और पाकिस्तान हमसे कितना आगे?
चीन के पास पहले से ही 150 से ज्यादा J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर विमान हैं, और PLA वायु सेना की योजना 2027 तक इनमें से 400 विमान और हासिल करने की है। यानि, चीन के पास 500 से ज्यादा फाइटर जेट्स हो जाएंगे।
जबकि, पाकिस्तान पांचवीं पीढ़ी के जे-31 विमान हासिल करने के लिए पहले ही चीन से संपर्क कर चुका है और 2029 की समय सीमा की बात कर रहा है। पाकिस्तानी वायुसेना की कोशिश चीन से कम से कम 100 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की है। इसके अलावा, पाकिस्तान के पास तुर्की के KAAN फाइटर जेट प्रोजेक्ट में भी शामिल होने का ऑफर है, जिसका प्रोडक्शन अब तुर्की ने शुरू कर दिया है।
पिछले महीने TUSAS ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें KAAN पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट को उड़ान भरते और फिर उत्तरी अंकारा में एक हवाई अड्डे पर लौटते हुए दिखाया गया है। इसमें कोई शक नहीं, कि तुर्की के लिए ये एक ऐतिहासिक उड़ान है, लेकिन अगर पाकिस्तान को ये फाइटर जेट मिलते हैं, तो भारत के लिए ये एक सिरदर्द साबित हो सकता है, क्योंकि भारतीय स्टील्थ फाइटर जेट प्रोग्राम AMCA को अभी अभी रक्षा मंत्रालय में मंजूरी ही मिली है और पहले विमान के बेड़े में शामिल होने में कम से कम 10 साल और लगेंगे।
पाकिस्तान की सेना ने इसी साल जनवरी महीने में घोषणा की थी, कि उसने चीन से फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एफसी-31/जे-31 डबल इंजन वाले स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने करने की योजना बनाई है और ऐसा करके उसकी योजना फाइटर जेट हासिल करने की रेस में भारत से आगे निकलना है। लेकिन, पाकिस्तान ने तुर्की को भी कहा है, कि वो उसके स्टील्थ फाइटर जेट का हिस्सा होना चाहता है।
यानि, पाकिस्तान चीन और तुर्की, दोनों के स्टील्थ फाइटर जेट का हिस्सा बनने की योजना रखता है। हालांकि, आर्थिक संकट की वजह से पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट में किस हद तक शामिल हो पाएगा, ये अभी कहना मुश्किल है, लेकिन पाकिस्तान ने अपने इरादे कम से कम जाहिर कर दिए हैं। हालांकि, देर आए दुरूस्त आए, भारत का AMCA प्रोजेक्ट स्वदेशी होगा, जो भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री को नेक्स्ट लेवल पर ले जाएगा।
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