'पीएम मोदी को सपोर्ट करता हूं इसलिए हुआ भेदभाव', लंदन में भारतीय छात्र ने लगाया दुर्व्यवहार का आरोप
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के एक भारतीय छात्र सत्यम सुसुराणा ने आरोप लगाया है कि उसे बदनाम करने के लिए नफरत से भरा अभियान चलाया जा रहा है। सत्यम पिछले साल तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में भारतीय उच्चायोग पर खालिस्तानी समर्थकों द्वारा किए गए हमले के दौरान जमीन पर गिरा तिरंगा उठा लिया था।
सत्यम ने छात्र संघ चुनावों में अपने खिलाफ यह अभियान चलाए जाने का दावा किया है। भारतीय छात्र ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वो पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत में हो रहे विकास की पैरवी करते हैं और खालिस्तानियों को आतंकी बुलाने में परहेज नहीं करते।

पुणे के निवासी सत्यम सुराणा ने इसकी जानकारी अपने एक पोस्ट के जरिए दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किए एक वीडियो में बताया कि वो जनरल सेक्रेट्री पद का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ नफरती और बदनामी भरा कैंपेन चलाया जाना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि वोटिंग से ठीक 12 घंटे पहले बहुत ही सुनियोजित ढंग से ये शुरू हुआ है।
उन्हें फासीवादी, इस्लामविरोधी और ट्रांसफोब करार दिया जा रहा है। सत्यम ने कहा कि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में चुनावों की घोषणा इस साल फरवरी और मार्च की शुरुआत में की गई थी, जिसके बाद उन्होंने महासचिव पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया।
लेकिन बाद में उनके लिए मुश्किलें खड़ी की जाने लगीं। सत्यम ने कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के साथ उनकी तस्वीर का इस्तेमाल उसे भाजपा से जोड़ने के लिए किया गया। सत्यम ने यह भी दावा किया कि जिन लोगों ने उन्हें निशाना बनाया, वे वही लोग थे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफलता को पचा नहीं सके, इसलिए इस तरह के झूठे और दुर्भावनापूर्ण प्रचार का सहारा ले रहे हैं।
सत्यम ने कहा कि अपने प्रचार अभियान के शुरुआती फेज में पर्याप्त समर्थन जुटाने के बावजूद वह जीत नहीं सके। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद भी इस अभियान ने उन पर और उनके जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव छोड़ा।
सत्यम सुसुराणा पिछले साल तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने भारतीय उच्चायोग पर चरमपंथी तत्वों के हमले के दौरान सड़क से बेखौफ होकर तिरंगे को उठा लिया था। पिछले साल 2 अक्टूबर को खालिस्तानी लोगों ने भारतीय उच्चायोग के सामने महात्मा गांधी की जयंती पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने भारतीय ध्वज को आग के हवाले कर दिया था। ठीक इसी दौरान सत्यम सुराणा हिंसक और उग्र खालिस्तान समर्थकों के बीच में गया और तिरंगे को जमीन से उठाया।












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