Indian Navy का Project 76 क्या है? भारत के 'अंडरवाटर फाइटर जेट' से चीनी ड्रैगन को लगेगा 440 वोल्ट का झटका
What is Indian Navy Project 76: भारत अपने नौसैनिक बेड़े को आधुनिक बनाने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पनडुब्बी अधिग्रहण और विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है। जिसका मकसद चीनी सेना की आक्रामकता को उसी आक्रामकता के साथ काउंटर करना है।
अपने इसी मिशन के तहत, चल रहे Project-75 इंडिया (P75I) और परमाणु ऊर्जा से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पहलों के साथ भारत ने प्रोजेक्ट-76 (पी-76) के तहत स्वदेशी पारंपरिक पनडुब्बी के निर्माण के लिए रिसर्च शुरू कर दी है।

Project-76: अगली पीढ़ी की पनडुब्बियां
Project-76 का मकसद एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP System) सिस्टम से लैस छह अगली पीढ़ी की डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियां बनाना है। यह प्रोजेक्ट रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो के बीच एक संयुक्त प्रयास है। पनडुब्बियों का डिसप्लेसमेंट 4,000 टन होगा और भारत की कोशिश इस पनडुब्बी निर्माण में 80% स्वदेशी सामग्री का उपयोग करना है।
प्रोजेक्ट-76 का डिजाइन चरण 2025 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है और पहला प्रोटोटाइप 2030 तक तैयार होने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट, भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कुल 30 पनडुब्बियां बनाई जाएंगी, जिनमें परमाणु ऊर्जा चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN), जहाज-पनडुब्बी परमाणु पनडुब्बियां (SSN) और डीजल-इलेक्ट्रिक हमलावर पनडुब्बियां (SSK) शामिल हैं।
प्रोजेक्ट-75 और प्रोजेक्ट-75I: नौसेना क्षमताओं में इजाफा
पी-76 के अलावा भारत दूसरी पनडुब्बी परियोजनाओं पर भी लगातार काम कर रहा है। प्रोजेक्ट-75 में एक विदेशी निर्माता के साथ मिलकर छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है।
इनमें से पांच पनडुब्बियां पूरी हो चुकी हैं, जबकि छठी का निर्माण पूरा होने वाला है। प्रोजेक्ट-75 इंडिया (पी-75आई) भारत की पनडुब्बी अधिग्रहण रणनीति के अगले चरण का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका लक्ष्य एक विदेशी मूल उपकरण निर्माता से डिजाइन सहायता और ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी को शामिल करके छह पनडुब्बियों का निर्माण करना है।
भारत के पनडुब्बी कार्यक्रम रणनीतिक विचारों से को ध्यान में रखकर तैयार किए गये हैं, खासकर पाकिस्तान और चीन के साथ दो मोर्चों पर संघर्ष की संभावना को काउंटर करने की रणनीति तैयार की गई है। अपने पनडुब्बी बेड़े में विविधता लाकर और स्वदेशी विकास को बढ़ावा देकर, भारत का लक्ष्य अपनी नौसेना की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना है।

भारत की रणनीति को समझिए
पनडुब्बी कार्यक्रमों को भारतीय नौसेना की ताकत को मजबूत करने और अपने शस्त्रागार को स्वदेशी तकनीक से अपडेट करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ये पहल रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के माध्यम से अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कुल मिलाकर, भारत की महत्वाकांक्षी पनडुब्बी परियोजनाएं, स्वदेशी तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देते हुए अपनी नौसेना क्षमताओं को आधुनिक बनाने के उसके दृढ़ संकल्प को सामने रखती हैं। इन कोशिशों का मकसद न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, बल्कि रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देना है।
Project 75 (P-75) क्या है?
यह परियोजना भारत के आधुनिक पनडुब्बी बेड़े की नींव रखती है। पनडुब्बी एक्सपर्ट और भारतीय समुद्री फाउंडेशन के उपाध्यक्ष कमोडोर अनिल जय सिंह के मुताबिक, "पी-75 विदेशी निर्माताओं के साथ साझेदारी में छह पनडुब्बियों के निर्माण की 30 वर्षीय दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है।"
इस परियोजना के तहत, भारतीय नौसेना को छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां मिल रही हैं: INS कलवरी, INS वेला, INS खंडेरी, INS करंज, INS वागीर और INS वाग्शीर। ये पनडुब्बियां मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और फ्रांसीसी रक्षा फर्म नेवल ग्रुप के बीच सहयोग का परिणाम हैं, और छठी पनडुब्बी का निर्माण किया जा रहा है।












Click it and Unblock the Notifications