कल भारत हटाएगा गुलामी की आखिरी निशानी, PM मोदी नौसेना के ध्वज से हटाएंगे सेंट जॉर्ज क्रॉस
साल 2004 में जब यूपीए की सरकार लौटी तो मनमोहन सिंह के शपथग्रहण से एक महीने पहले फिर से इंडियन नेवी के ध्वज को बदल दिया गया और पुराने झंडे को फिर से अपना लिया गया।
नई दिल्ली, सितंबर 01: कल यानि दो सितंबर भारत के लिए काफी ज्यादा अहम और ऐतिहासिक दिन होने वाला है, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्रिटिश हुकूमत की आखिरी निशानी को भी हटा देंगे। 2 सितंबर यानि कल भारतीय नौसेना को एक नया नौसेना ध्वज (निशान) मिलेगा, जिसका अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत को इंडियन नेवी को समर्पित करने के बाद कोच्चि में करेंगे। अब तक इंडियन नेवी के ध्वज पर सेंट जॉर्ज क्रॉस का झंडा लगा होता है, लेकिन कल के बाद वो झंडा हमेशा के लिए हट जाएगा।

इंडियन नेवी को मिलेगा नया ध्वज
प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी करते हुए इंडियन नेवी को नया ध्वज देने की बात कही है और पीएमओ ने जो बयान जारी किया है, उसमें कहा गया है, कि इंडियन नेवी का नया पताका "औपनिवेशिक अतीत से दूर ... समृद्ध भारतीय समुद्री विरासत के अनुरूप" होगा। नौसेना का वर्तमान पताका क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर लाल धारियों वाला एक सफेद झंडा है, जो भारत के प्रतीक के साथ सेंट जॉर्ज के क्रॉस का प्रतीक है। ऊपरी कैंटन में स्टाफ के बगल में तिरंगा रखा गया है। इंडियन नेवी का ये ध्वज अब तक गुलामी के दिनों की याद दिलाता था, जब भारत पर ब्रिटिश हुकूमत थी और ये झंडा काफी हद तक ब्रिटिश झंडा के समान ही लगता था, लेकिन अब मोदी सरकार इसे कल बदलने जा रही है, लिहाजा भारत के लिए ये एक ऐतिहासिक दिन होगा।

झंडे से हट जाएगा क्रॉस
रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्र ने हालांकि, नए डिजाइन के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं दी है, लेकिन द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बात की पुष्टि कर दी गई है, कि क्रास को हमेशा के लिए भारतीय नौसेना का ध्वज से हटा दिया जाएगा। इसके अलावा, नये झंडे में कुछ रंग परिवर्तनों के अलावा एक लंगर को दर्शाने वाली नौसेना शिखा को भी जोड़ा जाएगा। सूत्रों ने कहा कि, सेना और भारतीय वायु सेना के झंडे के साथ एक समानता बनाए रखी जाएगी। 1950 के बाद यह चौथी बार है, जब नौसेना के पताका में बदलाव किया जाएगा। जब 26 जनवरी 1950 को भारत एक गणतंत्र बना, उस वक्त नौसेना के शिखर और झंडों का विधिवत 'भारतीयकरण' किया गया। हालांकि, (एनसाइन एंड डिस्टिंग्विशिंग फ्लैग्स) ने ब्रिटिश विरासत, रेड सेंट जॉर्ज क्रॉस को झंडे पर बनाए रखा। लेकिन, ब्रिटिश संघ के झंडे को तिरंगे से बदल दिया गया।

अब तक क्यों था सेंट जॉर्ज का निशान
सबसे ज्यादा दिलचस्प बात ये है कि, कि औपनिवेश काल के बाद जैसे जैसे देश ब्रिटिश हुकूमत से आजाद होते गये, उन्होंने अपनी नौसेना के झंडे से रेड सेंट जॉर्ज के क्रास को हटा दिया, यहां तक की पाकिस्तान ने भी ब्रिटिश गुलामी की निशान को हटा दिया, लेकिन भारतीय नौसेना ने इसे 2001 तक बरकरार रखा और फिर साल 2001 में जब अटल बिहारी बाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इंडियन नेवी के ध्वज में बदलाव किया और सेंट जॉर्ज क्रॉस को इंडियन नेवी के ध्वज से हटा दिया। अटल बिहारी बाजपेयी ने उस वक्त लालकिले से अपने भाषण में कहा था, कि हमें ब्रिटिश मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है और हमें अपने प्रतीकों के साथ आगे बढ़ना होगा। नौसेना के ध्वज को बदलने का विचार 1970 के दशक की शुरुआत में वाइस एडमिरल विवियन बारबोज़ा से आया था। एडमिरल बारबोजा भारतीय नौसेना से पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे।

कांग्रेस सरकार फिर से क्रॉस लेकर आई
साल 2004 में जब यूपीए की सरकार लौटी तो मनमोहन सिंह के शपथग्रहण से एक महीने पहले फिर से इंडियन नेवी के ध्वज को बदल दिया गया और पुराने झंडे को फिर से अपना लिया गया। यानि, 2004 में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने तो एक बार फिर से इंडियन नेवी के ध्वज में सेंट जॉर्ज क्रॉस लौट आया और इसके ऊपरी खाने पर तिरंगा जोड़ दिया गया। यानि, झंडा एक बार फिर से हमें ये अहसास दिलाने लगा, कि हम एक वक्त ब्रिटिश के गुलाम थे। जबकि, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे छोटे देशों ने भी अपने झंडे से ब्रिटिश उपनिवेश के निशान को हटा दिया था। साल 2014 में जब नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इंडियन नेवी के झंडे में थोड़ा बदलाव किया और उन्होंने नये झंडे में अशोक स्तंभ और सत्यमेव जयते लिखा गया और अब जब नरेन्द्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने और वो देश को आईएनएस विक्रांत एयरक्राफ्ट कैरियर सौंपने वाले हैं, तो वो इंडियन नेवी के नये झंडे का अनावरण करने जा रहे हैं।

ध्वज में पहला परिवर्तन कब किया गया था?
भारतीय नौसेना का उद्गम औपनिवेशिक काल से है। 2 अक्टूबर 1934 को नौसेना सेवा का नाम बदलकर रॉयल इंडियन नेवी (RIN) कर दिया गया और फिर 26 जनवरी 1950 को भारत के गणतंत्र बनने के साथ, उपसर्ग 'रॉयल' को हटा दिया गया और इसे भारतीय नौसेना के रूप में फिर से नाम दिया गया। जबकि भारतीय रक्षा बलों ने स्वतंत्रता के बाद ब्रिटेन के औपनिवेशिक झंडों के साथ जारी रखा।

सेंट जॉर्ज क्रॉस क्या है?
भारतीय नौसेना के ध्वज में सेंट जॉर्ज रेड क्रॉस का नाम ईसाई योद्धा सेंट जॉर्ज के नाम पर रखा गया है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे तीसरे धर्मयुद्ध के दौरान एक योद्धा थे। सेंट जॉर्ज का क्रॉस सफेद पृष्ठभूमि पर एक लाल क्रॉस है। भारतीय नौसेना की पहली टुकड़ी ने नीले रंग की पृष्ठभूमि पर यूके का झंडा लहराया और ब्रिटेन की इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल का प्रतीक था। वहीं, कांग्रेस सरकार ने जब इंडियन नेवी के झंडे को बदलकर उसपर फिर से सेंट जॉर्ज का निशान वाला पुराना झंडा लेकर आई, तो उसके पीछे दलील ये दी गई, कि जिस झंडे का इस्तेमाल किया जा रहा है, वो समुद्र के नीले रंग से मिल जाता है। हालांकि, इस बात का कोई जवाब नहीं है, कि अगर झंडा बदलना ही था, तो फिर नये ध्वज का डिजाइन क्यों नहीं किया गया और सेंट जॉर्ज निशान को ही वापस क्यों लाया गया?
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