Analysis: हिंद महासागर के बाद अरब सागर... क्या विश्वरक्षक की भूमिका में आ गई भारतीय नौसेना? जानिए मकसद
Indian Navy News: हिंद महासागर में इंडियन नेवी ने हमेशा नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका निभाई, लेकिन अब भारतीय नौसेना ने अरब सागर में व्यापारिक जहाजों पर समुद्री डकैती और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए फर्स्ट रिस्पांउडर की भूमिका निभाना शुरू कर दिया है।
लाल सागर और अरब सागर में सोमालिया के समुद्री लुटेरों, खासकर हूती विद्रोहियों ने व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया है और इंडियन नेवी ने इन हमलों के खिलाफ अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी है।

17 जनवरी को भारतीय नौसेना के डायरेक्टेड-मिसाइल विध्वंसक आईएनएस विशाखापत्तनम, जो अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती विरोधी मिशन पर तैनात 10 भारतीय युद्धपोतों में से एक है, उसने एमवी जेनको पिकार्डी जहाज पर हमले की स्थिति में फर्स्ट रिस्पाउंडर की भूमिका निभाई और बचाने के लिए कॉल मिलने के बाद फौरन उस कॉल का जवाब दिया, जिसपर रात के वक्त हमला किया गया था।
भारतीय नौसेना के अनुसार, आईएनएस विशाखापत्तनम, उस क्षेत्र में समुद्री डकैती रोधी गश्त कर रहा है, जो अब बढ़ती समुद्री डाकू गतिविधि और हूती आतंकवादियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण तनाव में है। इंडियन नेवी लगातार संकट कॉल्स को अटेंड कर रही है और उस हिसाब से रिस्पॉउंड कर रही है। अभी तक इंडियन नेवी ने संकट में फंसे 18 व्यापारिक जहाजों को हूती विद्रोहियों और सोमालिया के लुटेरों से बचाया है।
फर्स्ट रिस्पाउंडर की भूमिका में भारत
समुद्र में संकट में फंसे जहाजों को बचाने के लिए भारत ने काफी तेजी से जहाजों को बचाना शुरू किया है, खासकर ऐसे वक्त में, जब हाल के महीनों में अरब सागर में समुद्री डकैती और ड्रोन/मिसाइल हमलों में वृद्धि हुई है। इजराइल-हमास संघर्ष ने पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीकी तटों के समुद्री जल क्षेत्र में समस्या को बढ़ा दिया है।
17 जनवरी को जहाज पर किया गया हमला, अरब सागर में जहाज पर हुआ सबसे नया हमला है। भारत ने उभरती सुरक्षा स्थिति का जवाब देने के लिए 10 से ज्यादा युद्धपोत तैनात करते हुए अरब सागर में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है।
भारतीय नौसेना ने हाल के महीनों में समुद्र में होने वाली घटनाओं पर काफी आक्रामक तरीके से प्रतिक्रिया दी है और अरब सागर में भारतीय तट से लगभग 700 समुद्री मील दूर तक जहाजों को बचाने के लिए अपनी टीम भेजी है।
इस महीने की शुरुआत में, भारतीय नौसेना ने P8I समुद्री गश्ती विमान के अलावा अपने समुद्री कमांडो को तैनात करके, अरब सागर में लाइबेरिया के ध्वज वाले थोक वाहक पर अपहरण के प्रयास को नाकाम कर दिया।
भारतीय नौसेना की चेतावनी के बाद अपहरण करने वालों की एख बड़ी टीम अपनी जहाज छोड़कर भाग खड़े हुए।
इन घटनाओं के बाद, भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री सुरक्षा और निगरानी ड्यूटी जारी रखने के लिए अरब सागर में अपने मिशन-तैनात युद्धपोतों को बढ़ा दिया।
P8I लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमान, डोर्नियर नौसैनिक विमानों और MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन के अलावा, 10 से ज्यादा फ्रंटलाइन विध्वंसक और फ्रिगेट को सुरक्षा ड्यूटी के लिए तैनात किया है।

ग्लोबल एलायंस का हिस्सा बनने से इनकार
इंडियन नेवी फर्स्ट रिस्पाउंडर की भूमिका में तो है, लेकिन भारत ने लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों से निपटने के लिए किसी भी बहुराष्ट्रीय बल का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि भारत क्षेत्र की स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा और अरब सागर समुद्री मार्ग में अपने तट की रक्षा के लिए अपने युद्धपोतों को तैनात करना जारी रखेगा।
अमेरिका ने भारत को दिसंबर में गठित अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व में कई देशों की नौसेना बलों ने लाल सागर में नौवहन मार्ग को यमन के ईरान स्थित हौथी विद्रोहियों के हमलों से बचाने के लिए ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन शुरू किया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने 4 जनवरी को एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा था, कि भारत नेविगेशन की स्वतंत्रता और वाणिज्यिक शिपिंग की मुक्त आवाजाही को "बहुत अधिक" महत्व देता है।
उन्होंने कहा, कि "हम स्थिति को देख रहे हैं। यह एक उभरती हुई स्थिति है और हम इसके सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं, हमारे पास भारतीय नौसेना के जहाज क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं। वे वहां भारतीय जहाजों पर भी नजर रख रहे हैं। अब तक, हम इस क्षेत्र में किसी भी बहुपक्षीय पहल या परियोजना का हिस्सा नहीं हैं। हम वहीं हैं, लेकिन हम उभरती स्थिति को बहुत करीब से देख रहे हैं।"

आपको बता दें, कि संयुक्त समुद्री बलों के तहत अमेरिका के नेतृत्व वाला गठबंधन, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और वैश्विक शिपिंग मार्गों की रक्षा करना चाहता है, जिसे हूती हमलों ने तेजी से निशाना बनाया है। ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन में यूके, बहरीन, कनाडा, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे, सेशेल्स और स्पेन जैसे देश शामिल हैं।
हालांकि, भारत कंबाइंड मेरीटाइम फोर्सेस का सदस्य है, लेकिन ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन में शामिल होने के अमेरिकी निमंत्रण को स्वीकार करने में वह सतर्क रहा है। फ्रांस और इटली की तरह, भारत ने इस क्षेत्र में एक अलग नौसैनिक उपस्थिति बनाए रखने को प्राथमिकता दी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इसके पीछे भारत का मकसद ग्लोबल पावर की तरफ अकेले ही अपनी भूमिका निभाना हो सकता है, ताकि इंडियन नेवी का वर्चस्व कायम हो सके।
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