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Explainer: चीन में पिन प्वाइंट हमला, पूरा पाकिस्तान रडार पर, इंडियन नेवी के तरकश में 'ब्रह्मास्त्र+' शामिल

BrahMos News: भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में प्रतिरोध समीकरण को लगातार बदल रही है और इसी कड़ी में इंडियन नेवी ने समुद्र से जमीन पर हमला करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक्सटेंडेड दूरी का टेस्ट कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षमता का दूसरी बार टेस्ट किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना को चीन और पाकिस्तान के क्षेत्र में गहराई तक हमला करने की रणनीतिक क्षमता हासिल हो गई है।

अत्यधिक पैंतरेबाज़ी और दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक मानी जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल की जवाबी हमला करने की ये क्षमता, चीन जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ भारत-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण डेटरेंट की भूमिका निभाएगी।

Indian Navy tests BrahMos-ER Missile

भारतीय नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सफल परीक्षण की घोषणा की है। इसकी घोषणा में कहा गया है, कि "भारतीय नौसेना और मैसर्स बीएपीएल (ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड) ने एक एडवांस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ बढ़ी हुई सीमा पर भूमि लक्ष्य पर सफल हमला किया है। यह प्रयास, लड़ाकू और मिशन के लिए तैयार जहाजों से विस्तारित दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमता के लिए 'आत्मनिर्भरता' को बढ़ाता है।"

इंडियन नेवी की क्षमता में कितना इजाफा?

ब्रह्मोस मिसाइल की क्षमता का ये नया परीक्षण, जरूरत पड़ने पर और भी ज्यादा गहराई तक हमला करने और समुद्र से दूर भूमि संचालन को प्रभावित करने की भारतीय नौसेना की क्षमता को बढ़ाता है। नई टेस्ट के मुताबिक, इस परीक्षण से ना सिर्फ ब्रह्मोस मिसाइल से और ज्यादा दूरी तक मार की जा सकती है, बल्कि इसमें रडार सिस्टम को और शक्तिशाली किया गया है, जिससे इसकी पिन-प्वाइंट हमला करनी की क्षमता और भी ज्याजदा मजबूत हो गई है।

इस तरह का पहला परीक्षण 5 मार्च 2022 को स्टील्थ विध्वंसक आईएनएस चेन्नई से किया गया था। उस दौरान ब्रह्मोस मिसाइल से एक जटिल युद्धाभ्यास के दौरान एक्सटेंडेड दूरी तक हमला किया गया था।

आपको बता दें, कि ब्रह्मोस मिसाइल और आईएनएस चेन्नई, दोनों का ही निर्माण भारत में हुआ है।

बाद में, 23 मार्च 2022 को भारतीय सेना ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक लॉन्च पैड से सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के विस्तारित-रेंज संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक रिटायर्ड भारतीय नौसेना अधिकारी ने कहा, कि "यह (परीक्षण) दुश्मन के तटीय और मिसाइल डिफेंस की सीमा को चकमा देते हुए, लंबी दूरी तक समुद्र से रणनीतिक भूमि लक्ष्यों को निशाना बनाने की भारतीय नौसेना की गतिरोध क्षमता को बढ़ाता है।"

Indian Navy tests BrahMos-ER Missile

ब्रह्नोस मिसाइल की क्षमता क्या है?

आपको बता दें, कि ब्रह्मोस मिसाइल की बेसलाइन वेरिएंट की क्षमता, नौसेना के युद्धपोतों में फिट करने के बाद और मिसाइल टेक्नोलॉजी की तमाम शर्तों को पूरा करने के बाद 298 किलोमीटर होता है।

भारत ने अपनी इस क्षमता के साथ जून 2016 में एमटीसीआर क्लब में प्रवेश किया था और इस तरह, ब्रह्मोस की रेंज को और बढ़ाने पर काम शुरू किया। हालांकि, भारतीय नौसेना ने मिसाइलों की नई विस्तारित बताने से परहेज किया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे 450 से 500 किलोमीटर के बीच बताते हैं।

इसके अलावा, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में भी चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात की गई हैं। इसके अतिरिक्त, इन मिसाइलों को चालीस से ज्यादा सुखोई लड़ाकू विमानों में फिट किया जा रहा है, जिससे एयरफोर्स की युद्धक क्षमता में भारी इजाफा होगा।

ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी शक्ति ये है, कि इसका इस्तेमाल उन व्यस्त जगहों पर करने के लिए बनाया गया है, जो पर आम नागरिकों के क्षेत्र होते हैं और जहां दूसरे हथियार काफी ज्यादा नागरिकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यानि, ब्रह्मोस से एयरबेस, अलग अलग मुख्यालयों, महत्वपूर्ण सड़कें, रेलवे स्टेशनों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है, जहां पर दुश्मन अपने रणनीतिक ठिकाने बना सकता है।

हालांकि, अभी भी एडवांस रेज का टेस्ट और उसे भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया जाना बाकी है।

ब्रह्मोस मिसाइल में हवा, जमीन, समुद्र और पनडुब्बी से लॉन्च किए जाने वाले वेरिएंट हैं। 2018 में, भारत ने बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के 290 किमी से अधिक दूरी की पनडुब्बी-लॉन्च संस्करण का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक किया था, और यह क्षमता रखने वाला दुनिया का पहला देश बन गया था।

यहां आपके लिए ये भी जानना जरूरी है, कि पाकिस्तान के पास जो एयर डिफेंस सिस्टम है, उसमें ब्रह्मोस को ट्रैक करने की क्षमता तो है, लेकिन उसे गिराने की क्षमता नहीं है। वहीं, चीन को लेकर भी ऐसे ही दावे किए जाते हैं, लेकिन पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता है, कि चीन के पास ब्रह्मोस मिसाइल को रोकने की क्षमता है या नहीं।

सुपरसोनिक ब्रह्मोस ने टॉमहॉक मिसाइलों को पीछे छोड़ा?

ब्रह्मोस 1980 के दशक के अंत में रुतोव डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित सोवियत काल की एंटी-शिप मिसाइलों (ओनिक्स, याकोंट) का एक संशोधन है। यह नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों से लिया गया एक शब्द है।

इसका पहला परीक्षण प्रक्षेपण 12 जून 2001 को भारत के ओडिशा में चांदीपुर रेंज में किया गया था और उसके बाद दोनों देशों के उद्यमों में मिसाइलों का उत्पादन शुरू हुआ।

ब्रह्मोस तकनीकी रूप से एक ठोस प्रणोदक बूस्टर के साथ रैमजेट-संचालित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भूमि-आधारित कनस्तरों, पनडुब्बियों, जहाजों और विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। यह मैक 2.8 से 3.0 की गति से चलता है, लेकिन इसे मैक 5.0 से भी तेज गति से चलने के लिए इसे अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि यह हाइपरसोनिक स्पीड से लैस हो सके।

इसकी एक खास विशेषता, मिसाइल रक्षा प्रणालियों से बचने के लिए जमीन के बेहद करीब से उड़ान भरने की क्षमता है। टर्मिनल टेस्ट के दौरान इस मिसाइल ने जमीन से सिर्फ 10 मीटर की ऊंचाई से उड़ान भरी थी और यही वजह है, कि एयर डिफेंस सिस्टम के लिए ब्रह्मोस को ट्रैक करना और मारना अत्यंत मुश्किल हो जाता है।

आपको याद होगा, पिछले साल ब्रह्मोस मिसाइल गलती से पाकिस्तान की तरफ चल गया था, लेकिन पाकिस्तान इसे मार नहीं पाया था। ऐसा कहा जाता है, कि भारत ने इसके जरिए पाकिस्तान में पूर्व निर्धारित लक्ष्य को कामयाब के साथ भेद दिया था। हालांकि, उस दौरान मिसाइल में वारहेड यानि बम नहीं लगाया गया था।

ब्रह्मोस मिसाइल की अकसर अमेरिका के टॉमहॉक मिसाइल से की जाती है।

वहीं, टॉमहॉक एक अमेरिकी-विकसित क्रूज़ मिसाइल है। अमेरिकी क्रूज मिसाइल को जहाजों और विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। 2900 पाउंड वजनी यह मिसाइल लक्ष्य को भेदने से पहले 500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से 1000 मील तक उड़ान भर सकती है।

जबकि, ब्रह्मोस 2.8 मैक की गति से उड़ान भरता है। इसका वजन टॉमहॉक से दोगुना है और टॉमहॉक से चार गुना तेज है, जिसके कारण यह लक्ष्य पर वार करते समय अधिक गतिज ऊर्जा प्रदान कर सकता है, और छोटे हथियार के बावजूद कहर बरपा सकता है।

ब्रह्मोस की सबसे बड़ी विशेषता कम ऊंचाई पर उड़ान भरते समय सुपरसोनिक स्पीड बनाए रखना है। इससे पता लगाना और रोकना मुश्किल हो जाता है। वहीं, टारगेट पर हमला करने से पहले, ब्रह्मोस मिसाइल एक टालमटोल करने वाली "एस-पैंतरेबाज़ी" करती है, जिससे दुश्मन की सुरक्षा के लिए इसे नज़दीकी सीमा पर गिराना मुश्किल हो जाता है।

ब्रह्मोस मिसाइलें किसी भी आधुनिक युद्धपोत की डिफेंस को ध्वस्त कर सकती हैं। वहीं, अगर इसे लक्ष्य के 120 किलोमीटर के भीतर लॉन्च किया जाए, तो ब्रह्मोस मिसाइलें लक्ष्य तक पूरी तरह से बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है।

वहीं, जो युद्धपोत टारगेट होगा, वो सिर्फ 30 किलोमीटर पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल का पता लगाने में समक्ष होगा, जिससे उसे ब्रह्मोस को रोकने के लिए सिर्फ 30 सेकंड्स का ही वक्त मिल पाएगा, लेकिन तब तक उसका खेल खत्म हो जाएगा।

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