भारत में श्रीलंका जैसे हो सकते हैं हालात? इस सवाल पर एस. जयशंकर ने क्या जवाब दिया?
नई दिल्ली, 19 जुलाईः बीते कई महीने से भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका आर्थिक व राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। इस संकट को ध्यान में रखते हुए मंगलवार को केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत की नजर श्रीलंका के पूरे हालात पर है।

श्रीलंका को लेकर चिंतित है भारत
इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ''श्रीलंका में बहुत गंभीर संकट है, कई मायनों में अभूतपूर्व स्थिति है। चूंकि मामला करीबी पड़ोसी से संबंधित है, हम स्वाभाविक रूप से परिणामों को लेकर चिंतित हैं।'' लोगों द्वारा भारत में श्रीलंका जैसी स्थिति उत्पन्न होने वाले प्रश्न पर एस जयशंकर ने कहा कि उन्होंने श्रीलंका के संदर्भ में गलत सूचना वाली तुलना देखी है।
शामिल हए कई पार्टियों के सांसद
इस बैठक में कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम, वाईएसआरसीपी के विजयसाई रेड्डी, अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई, भाकपा के बिनॉय विश्वम, नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, द्रमुक के टीआर बालू, एमडीएमके के वाइको और अन्य सांसद श्रीलंका की स्थिति पर पार्टी के सभी नेताओं की बैठक के लिए पहुंचे थे।

श्रीलंका मामले में हस्तक्षेप करने की मांग
संसद के मॉनसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के दौरान तमिलनाडु के दो प्रमुख दलों द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने भारत से श्रीलंका के मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इस बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने संवाददाताओं से कहा था कि सरकार मंगलवार को श्रीलंका की स्थिति पर एक सर्वदलीय बैठक करेगी।

श्रीलंका में कई महीनों से समस्या बरकरार
बता दें कि श्रीलंका को अपनी बुनियादी जरूरतें पूरा करने के लिए अगले छह महीनों में पांच अरब डॉलर की जरूरत है। पिछले कई महीनों से देश में जरूरी सामान और ईंधन की किल्लत बनी हुई है। इसके लिए श्रीलंका कई देशों के सामने अपने हाथ फैला चुका है लेकिन उसे अधिकांश जगहों पर निराशा ही हाथ लगी है।

भारत छोड़ किसी ने नहीं की मदद
इसी बात को लेकर श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री कंचना विजेसेकारा का दर्द भी छलकता नजर आया। उन्होंने कहा कि हम बीते कुछ समय से अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहे हैं। हमने अपनी स्थिति सुधारने के लिए हम अब तक कई देशों से गुहार लगा चुके हैं मगर अब तक भारत ही एकमात्र देश है, जिसने इस संकट में हमारी कई बार मदद की है।

प्रदर्शन के सौ दिन हुए पूरे
श्रीलंका में बीते रविवार को प्रदर्शन के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच राष्ट्रपति रहने के दौरान गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए हैं और देश के बिगड़ते आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो गए। लेकिन द्वीप राष्ट्र की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। श्रीलंका, ईंधन, दवा और भोजन की भारी कमी का सामना कर रहा है। इन जरूरी चीजों को खरीदने के लिए पैसे खत्म हो गए हैं। सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुआ है और स्कूलों को बार-बार बंद करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।












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