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India US Trade Deal 2026: '...तो भारत पर लगा देंगे 43% टैरिफ', ट्रंप की 'डरावनी' शर्तों से हड़कंप

India US Trade Deal 2026: भारत और अमेरिका के बीच 2 फरवरी 2026 को हुई ट्रेड डील अब विवादों के घेरे में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 फरवरी को 25% पेनल्टी टैरिफ हटाने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर तो कर दिए, लेकिन इसमें जुड़ी शर्तें भारत के लिए 'डरावनी' साबित हो रही हैं। ट्रंप की सबसे बड़ी शर्त यह है कि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदना पूरी तरह बंद करना होगा।

यदि भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल खरीदता पाया गया, तो अमेरिका न केवल 25% पेनल्टी वापस लगाएगा, बल्कि कुल टैरिफ को 43% तक बढ़ा देगा। इस डील में कृषि उत्पादों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई ऐसे पेंच हैं, जो छिपे हुए नजर आ रहे हैं।

India US Trade Deal 2026

India Russia Oil Import News: रूस से दोस्ती पर मंडराया खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस का साथ छोड़ना होगा। ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसियां भारत की हर तेल खरीद पर निगरानी रखेंगी। यदि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया, तो भारी पेनल्टी टैरिफ फिर से लागू कर दिया जाएगा। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां ट्रंप खुलेआम धमकियां दे रहे हैं, वहीं भारत सरकार इस मुद्दे पर अब तक कोई सीधा जवाब देने से बच रही है।

ये भी पढ़ें: India US Trade Deal: क्या भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया, अमेरिकी दावों पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

पीयूष गोयल की सफाई: क्या सुरक्षित हैं भारतीय किसान?

कृषि उत्पादों को लेकर मचे हंगामे के बीच वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने दावा किया है कि इस डील में किसी भी राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं किया गया है। गोयल के अनुसार, जिन उत्पादों में भारत आत्मनिर्भर है जैसे चावल, गेहूं, चीनी, दूध, और मोटे अनाज-उन्हें डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है। सरकार का तर्क है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने के बावजूद भारतीय किसानों के हितों पर कोई आंच नहीं आएगी।

Trump Executive Order 2026: क्या झुकेगा भारत?

रूस से तेल खरीद बंद करने के सवाल पर विदेश मंत्रालय का रुख बेहद संजीदा है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संकेत दिया कि 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतें सरकार की पहली प्राथमिकता हैं। हालांकि, ट्रंप का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर कहता है कि भारत अमेरिका से ऊर्जा सामान खरीदेगा। कूटनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' को बरकरार रख पाएगा या अमेरिकी दबाव में आकर अपने सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार रूस से नाता तोड़ेगा।

ये भी पढ़ें: Explainer: US Trade Deal के विरोध में क्यों हैं किसान संगठन? क्या है उनकी मांग? 12 फरवरी को भारत बंद का ऐलान

छिपी शर्तें और सार्वजनिक चुप्पी: क्या है इस डील का सच?

भारत और अमेरिका के साझा बयान में तो कोई धमकी नहीं दिखी, लेकिन व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर मौजूद एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की कॉपी पूरी कहानी बयां कर रही है। 'मल्टीलेयर मॉनिटरिंग' के नाम पर अमेरिका भारत की व्यापारिक गतिविधियों की जांच करेगा। इस डील की पूरी शर्तें अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं, जिससे संदेह और बढ़ गया है। ट्रंप की सीधी धमकियों पर भारत की 'खामोशी' अब विपक्ष और विशेषज्ञों के बीच बहस का मुख्य केंद्र बन गई है।

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