US के साथ खुला दोस्ती का नया अध्याय... मोदी-बाइडेन ने साइन किए वो 8 डील, जिनसे बदल जाएगा इंडिया
India-America Agreements: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अमेरिका दौरा इतिहास बदलने वाला था और इस राजकीय दौरे के दौरान भारत और अमेरिका के बीच जो समझौते किए गये हैं, उनका असर आने वाले सालों में देखने को मिलेगा। भारत और अमेरिका के बीच कुछ ऐसे भी समझौते किए गये हैं, जिनसे भारत भी आने वाले सालों में बदल जाएगा।
अमेरिका के पैसों पर अमीर बनने वाले चीन को काउंटर करने से लेकर, भारत को मैन्युफैक्चर का नया हब बनाने तक... जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच समझौते होने लगे, तो उसमें दुनिया के विकास के साथ साथ भारत और अमेरिका की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया। आइये जानते हैं वो समझौते, जिनसे आने वाले सालों में भारत को जबरदस्त फायदे होने वाले हैं।

मेमोरी चिप डील
अमेरिकी मेमोरी चिप कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने गुरुवार को कहा है, कि वह गुजरात में एक नई चिप असेंबली और परीक्षण सुविधा में 825 मिलियन डॉलर तक का निवेश करेगी। चिप को लेकर भारत और अमेरिका के बीच किया गया ये समझौता वास्तव में भारत को बदलने वाला समझौता है।
सेमिकंडक्टर की जंग पूरी दुनिया में शुरू हो गई है और भारत इस जंग में चीन से पीछे नहीं रहना चाहता है। फिलहाल चीन सेमिकंडक्टर उत्पादन के मामले में संघर्ष कर रहा है, क्योंकि अमेरिका ने टेक्नोलॉजी को लेकर उसके खिलाफ कई प्रतिबंध लगा दिए हैं, लिहाजा भारत के पास सेमिकंडक्टर इंडस्ट्री में आगे निकलने का मौका है।
मेमोरी चिप कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने कहा है, कि वो गुजरात में यूनिट लगाने में 2.75 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इस समझौते के तहत 50% निवेश भारत सरकार की तरफ से किया जाएगा, जबकि 20 प्रतिशत का निवेश गुजरात सरकार की तरफ से किया जाएगा। माइक्रोन टेक्नोलॉजी कंपनी ने कहा है, कि इस निवेश से 5,000 नई नौकरियां तुरंत पैदा होंगी।
लड़ाकू जेट विमान इंजन डील
भारत और अमेरिका के बीच भारत में जेट इंजन के निर्माण को लेकर समझौता किया गया है। दोनों देशों के बीच इस जेट इंजन डील होने के बाद बाद भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस एमके2 के लिए जनरल इंजन के एफ414 इंजन के भारत में निर्माण का रास्ता खुल गया है।
अब अमेरिका से लाइसेंस लेकर भारत अपने इन विमानों के इंजन का निर्माण भारत में ही कर पाएगा। इस समझौते के मुताबिक, अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) मिलकर भारत में जेट इंजन का निर्माण करेगी। अमेरिका की हथियार कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) ने एचएएल को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने की पेशकश कर दी है, जो इंजनों के लिए एक लाइसेंस प्राप्त निर्माता के रूप में कार्य करेगा।
GE-F414 Engine अपनी दमदार क्षमता के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है और अमेरिका की वायुसेना के साथ साथ अमेरिका की नौसेना भी GE-F414 Engine का इस्तेमाल पिछले 30 सालों से ज्यादा वक्त से कर रही है। GE-F414 Engine, जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के फाइटर जेट इंजन के सुइट का हिस्सा है।
वीजा को लेकर अहम समझौता
भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक वीजा समझौता भी किया गया है। जिसके बाद अमेरिका ने अब भारतीयों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में रहना और काम करना आसान बना दिया है। बाइडेन प्रशासन देश में नवीकरणीय एच-1बी वीजा पेश करने के लिए तैयार है, जिसके तहत अब भारतीय नागरिक और अन्य विदेशी कर्मचारी स्वदेश जाए बिना अमेरिका में ही एच1बी वीजा को रिन्यू करा सकेंगे।
आपको बता दें कि भारतीय नागरिक अब तक यूएस एच1-बी वीजा के सबसे सक्रिय उपयोगकर्ता रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 में लगभग 442000 ने एच1-बी वीजा का उपयोग किया, जिनमें से 73% भारतीय नागरिक थे।
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'हम सभी मानते हैं कि हमारे लोगों की मॉबिलिटी ही हमारे लिए एक बड़ी संपत्ति है और इसलिए हमारा लक्ष्य बहुमुखी तरीके से उन्हें सुविधाएं उपलब्ध करना है। विदेश विभाग लंबे समय से इन चीजों में बदलाव लाने के लिए रचनात्मक तरीके से कड़ी मेहनत कर रहा है।'
भारत-अमेरिका में ड्रोन समझौता
बाइडेन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच जनरल एटॉमिक्स द्वारा बनाए गए एमक्यू-9बी सीगार्जियन ड्रोन को लेकर भी समझौता किया गया है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच मेगा करार किया गया है। भारत ने इस डील के तहत जनरल एटॉमिक्स एमक्यू-9 रीपर सशस्त्र ड्रोन खरीदने की मंजूरी दे दी है और ये सौदा 29 हजार करोड़ रुपये का किया गया है।
इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से 30 एमक्यू-9 ड्रोन खरीदेगा, जिसे थल सेना, वायुसेना और नौसेना को दिया जाएगा। फिलहाल ये ड्रोन पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिए जाएंगे और तीनों सेना से फिडबैक मिलने के बाद इसका उत्पादन भी भारत में किया जाएगा।
अंतरिक्ष सेक्टर में हुआ समझौता क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जो बाइडेन के बीच की गई बैठक में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के साथ भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो का बड़ा समझौता किया गया है। अब दोनों देशों की स्पेस एजेंसी 2024 में जॉइंट एस्ट्रोनॉट मिशन के लिए मिलकर काम करेंगी। इसको लेकर व्हाइट हाउस ने एक बयान भी जारी किया।
व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है, कि "भारत ने आर्टेमिस मिशन के तहत समझौते में शामिल होने का फैसला किया है। ये निर्णय समान विचारधारा वाले देशों को नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण पर एक साथ लाता है। 2024 के लिठए अंतरिक्ष स्टेशन के मिशन के लिए नासा(NASA) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दोनों संयुक्त रूप से सहमत हुए हैं।" वहीं, अगले साल नासा के जरिए भारतीय अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की भी यात्रा करेंगे।
इंडियन रेलवे ने किया अमेरिका से करार
भारतीय रेलवे और अमेरिकी संघीय सरकार की एक स्वतंत्र एजेंसी यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट/इंडिया (यूएसएआईडी/इंडिया) ने 14 जून को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर लिए है।
इस समझौते में कहा गया है, कि USAID/India आर्थिक विकास, कृषि क्षेत्रों, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, वैश्विक स्वास्थ्य, लोकतंत्र, मानवीय सहायता, जलवायु परिवर्तन के मुद्दों और संघर्ष प्रबंधन में सहायता करके अंतर्राष्ट्रीय विकास का समर्थन करता है।
रेल मंत्रालय ने बताया है, कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ अनिल कुमार लाहोटी की उपस्थिति में भारतीय रेलवे के रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैक्शन एंड रोलिंग स्टॉक) नवीन गुलाटी और यूएसएआईडी के उप प्रशासक इसाबेल कोलमैन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
indus-x भारत-अमेरिका समझौता
भारत और अमेरिका के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे के दौरान indus-x करार किया गया है, जिसके तहत दोनों देशों के स्टार्ट्सअप्स साथ काम कर पाएंगें। indus-x का फुल फॉर्म है, यूएस-इंडिया डिफेंस एक्सीलेरेशन इकोसिस्टम। इसके तहत एक नेटवर्क की स्थापना की जाएगी।
इस नेटवर्क में दोनों देशों के स्टार्टअप्स, यूनिवर्सिटीज, इंडस्ट्री और अलग स्टार्ट्स अप्स से जुड़े थिंट टैंक शामिल होंगे। इसके जरिए दोनों देशों के बीच संयुक्त तौर पर डिफेंस टेक्नोलॉजी के विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा।
इसका सबसे बड़ा फायदा भारत को ये होने वाला है, कि इस नेटवर्क से जुड़कर भारत के स्टार्ट्स अप्स डिफेंस निर्माण के क्षेत्र में कदम बढ़ा सकते हैं, जैसा कि इजरायल में होता है। ऐसे ही स्टार्ट्सअप्स के जरिए इजरायली रक्षा क्षेत्र में दर्जनों निजी कंपनियां खुल गईं, जो दुनियाभर में हथियारों की सप्लाई करते हैं।
व्यापारिक बाधाओं को सुलझाने की घोषणा
भारत और अमेरिका वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में चल रहे 6 व्यापारिक बाधाओं को सुलझाने के लिए सहमत हो गये हैं। घोषणा के मुताबिक, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व व्यापार संगठन में छह व्यापार विवादों को समाप्त करने पर सहमत हो गये हैं, जिसके तहत नई दिल्ली 28 अमेरिकी उत्पादों पर सीमा शुल्क को हटा लेगा।
ये सीमा शुल्क भारत ने टिट फॉर टैट के तहत लगाया था, जब अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर सीना शुल्क में बढ़ोतरी कर दी थी। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की संभावना है और भारतीय निर्यातकों को प्रमुख कर लाभ प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रथम महिला जिल बाइडेन के निमंत्रण पर भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान ये फैसले लिए गए हैं।
अमेरिका ने 2018 में राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार बनाकर पर कुछ स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों पर क्रमशः 25 प्रतिशत और 10 प्रतिशत आयात टैक्स लगा दिया था। जवाबी कार्रवाई में, भारत ने जून 2019 में चना, दाल, बादाम, अखरोट, सेब, बोरिक एसिड और डायग्नोस्टिक उत्पादों सहित 28 अमेरिकी उत्पादों पर भारी सीमा शुल्क लगा दिया था और उसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक विवाद शुरू हो गये थे, जो अब खत्म हो गये हैं।
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