भारत और UAE में ऐतिहासिक व्यापार समझौता, जानिए मोदी सरकार के लिए कितनी बड़ी है उपलब्धि?
भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापारिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के उद्देश्य से एक कॉम्प्रिंहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं।
नई दिल्ली/दुबई, फरवरी 22: सरकार में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और मुस्लिम देशों के संबंध विस्तार पर काफी ध्यान दिया और अब जब पीएम मोदी का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, पीएम मोदी द्वारा उठाए गये वो कदम भारत के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता हुआ है और साल 2030 तक भारत और यूएई ने 100 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य हासिल करने का लक्ष्य रखा है। आईये जानते हैं, दोनों देशों के लिए ये व्यापारिक करार इतना महत्वपूर्ण क्यों है? और देश के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि क्यों है?

100 अरब डॉलर द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य
भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापारिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के उद्देश्य से एक कॉम्प्रिंहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। पिछले कुछ सालों में भारत और संयुक्त अरब अमीरात काफी करीब आए हैं और अभी तक यूएई का सिर्फ चीन के साथ ही 100 अरब डॉलर से ज्यादा का द्विपक्षीय व्यापार था, लेकिन पिछले साल आखिरी महीनों में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए यूएई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया।

व्यापार समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
संयुक्त अरब अमीरात वो पहला देश है, जिसके साथ पिछले 10 सालों में भारत ने सीईपीए व्यापार समझौता किया है और करीब 10 सालों के भारत ने किसी देश के साथ सीईपीए व्यापार समझौता किया है। इस व्यापारिक समझौते के तहत दोनों देश प्रमुख व्यापारिक भागीदार बन गये हैं। इससे पहले साल 2011 में भारत ने जापान के साथ फ्री ट्रे़ड एग्रीमेंट (एफटीए) समझौता किया था। दरअसल, भारत सरकार ने साल 2030 तक भारत का निर्यात बढ़ाकर एक ट्रिलियन डॉलर रखा है और इसी कड़ी में भारत सरकार ने अलग अलग देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के रास्ते बढ़ने का फैसला किया है और संयुक्त अरब अमीरात के साथ हुआ व्यापार समझौता उसी कड़ी का एक हिस्सा है।

अलग अलग देशों के साथ बात
मोदी सरकार का लक्ष्य भारत को जल्द से जल्द पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है, लिहाजा भारत सरकार तेजी से व्यापारिक समझौतों पर आगे बढ़ रही है और सिर्फ संयुक्त अरब अमीरात ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, ब्रिचेन, कनाडा, इजरायल और यूरोपीय संघ के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में भारत सरकार की बातचीत चल रही है। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यह भी कहा है कि, भारत इस साल के अंत तक खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों के समूह (बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई) के साथ एक एफटीए समझौता कर सकता है।

इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार कैसे बढ़ेगा?
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए इस समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात अपनी 80 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क टैक्स समाप्त करने के लिए तैयार हो गया है, जो कि मूल्य के हिसाब से यूएई में भारतीय सामानों के निर्यात का 90 फीसदी हिस्सा है और इस समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात के बाजार में भारतीय कपड़ों की बिक्री काफी ज्यादा बढ़ने की संभावना बन गई है। इस समझौते के बाद भारतीय निर्यातक दुनिया की बाकी कंपनियों के साथ वस्तुओं की कीमत पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। भारत के वाणिज्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि, वर्तमान में भारतीय कपड़ा और चमड़ा निर्यात पर संयुक्त अरब अमीरात में 5 प्रतिशत शुल्क लगाया जाता है, जबकि वियतनाम और बांग्लादेश की वस्तुओं पर शुल्क शून्य है, लिहाजा भारतीय प्रोडक्स को काफी नुकसान होता था।

खाड़ी देशों में भारत की मौजूदगी
खाड़ी देशों में भारत की मौजूदगी सालों से रही है और संयुक्त अरब अमीरात के साथ साथ सऊदी अरब, कतर, ओमान और कुवैत जैसे देशों में भारत के करीब सवा करोड़ से ज्यादा नागरिक रहते हैं। इतना ही नहीं, इन देशों में रहने वाले भारतीयों से साल 2021 में भारत को 87 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा आया, लिहाजा मोदी सरकार जानती है, कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध को अगर और भी ज्यादा मजबूत किया जाए, तो इसका जबरदस्त फायदा भारत को मिल सकता है। लिहादा खुद पीएम मोदी ने 2015, 2018 और 2019 में यूएई के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात की और दोनों देशों के संबंधों को नये स्तर पर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। पीएम मोदी से पहले भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1981 में संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की थी।

किन भारतीय उत्पादों को फायदा?
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए इस समझौते से कई भारतीय प्रोडक्ट्स को काफी लाभ होगा। जिन प्रमुख घरेलू क्षेत्रों को लाभ होने वाला है उनमें रत्न और आभूषण, कपड़ा, चमड़ा, जूते, खेल के सामान, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं। मई के पहले सप्ताह में लागू होने वाले समझौते से भारत में "अतिरिक्त 10 लाख नौकरियां" पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, भारत ने उत्पादों की एक "संवेदनशील सूची" के माध्यम से कुछ वस्तुओं को समझौते से बाहर रखा है, जो कि 10 प्रतिशत टैरिफ लाइनों की राशि है, जिन्हें समझौते से पूरी तरह से बाहर रखा गया है। डेयरी, फल, सब्जियां, अनाज, चाय, कॉफी, चीनी, खाद्य पदार्थ, तंबाकू, खिलौने, प्लास्टिक, एल्युमीनियम का स्क्रैप और तांबा उन उत्पादों में शामिल हैं जिन्हें समझौते से बाहर रखा गया है।












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