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डॉलर को रुपये ने दिया बहुत बड़ा झटका, 18 देशों के साथ UAE भी इंडियन करेंसी में व्यापार करने को तैयार

भारत और संयुक्त अरब अमीरात काफी करीबी व्यापारिक भागीदार बन गये हैं और दोनों देशों का लक्ष्य अगले कुछ सालों में व्यापार को 100 अरब डॉलर की सीमा रेखा को पार ले जाना है।

UAE Indian trade in local Currency

UAE Indian Currency: जैसे-जैसे भारत दुनिया की शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं की फेहरिस्त में आगे बढ़ रहा है, ठीक वैसे वैसे भारतीय रुपया भी ताकतवर बनता जा रहा है और अब डॉलर को बड़ा झटका देने की तैयारी में है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई जल्द ही उन 18 देशों में शामिल हो सकता है, जो भारतीय रुपये में दोनों देशों के बीच के व्यापार में डॉलर को बाहर रखने के लिए सहमत हो गया है। यानि, भारतीय रुपया का प्रभुत्व लगातार बढ़ता जा रहा है और आज के जियो-पॉलिटिक्स को देखते हुए ये बहुत अहम कदम है।

UAE Indian trade in local Currency

भारतीय रुपये का बढ़ता दबदबा

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है, कि आयात और निर्यात के लिए रुपया-दिरहम में व्यापार को व्यवस्थित करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ चर्चा चल रही है। जल्द ही दोनों देशों के शीर्ष नेता रुपया-दिरहम में व्यापार शुरू करने की घोषणा कर सकते हैं। आपको बता दें, कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच के संबंध हालिया वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं और अगले एक से दो सालों में दोनों देशों के बीच का आपसी व्यापार 100 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। फिलहाल, चीन और अमेरिका के बाद यूएई का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भारत ही है, हालांकि भारत पिछले साल अमेरिका को दूसरे नंबर से तीसरे नंबर पर भी धकेल चुका है। भारतीय अधिकारी ने कहा, कि भारत यूएई से बड़ी मात्रा में आयात-निर्यात करता है, और खाड़ी देशों से भी काफी धन प्राप्त करता है। अधिकारी ने कहा, कि "अमेरिकी डॉलर या यूरो जैसी किसी तीसरे देश की मुद्रा में के बजाय स्थानीय मुद्रा में लेनदेन करना बहुत आसान हो गया है।"

UAE Indian trade in local Currency

भारत-UAE में मजबूत व्यापारिक संबंध

संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और चीन के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच द्विपक्षीय व्यापार 44 अरब डॉलर का हो चुका है। जबकि, वित्तीय वर्ष 2022 में, भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार लगभग 73 अरब डॉलर था, जिसके इस वित्तीय वर्ष में और बढ़ने की संभावना है। पिछले महीने के अंत में, शीर्ष भारतीय बैंकिंग और वित्त अधिकारियों ने रुपया-दिरहम सौदे के विवरण पर चर्चा करने के लिए अबू धाबी का दौरा किया था। दोनों देशों के केंद्रीय बैंक और वित्त विभाग के अधिकारी पिछले साल से रुपया-दिरहम भुगतान तंत्र स्थापित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और UAE के सेंट्रल बैंक के अधिकारियों ने स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार शुरू करने के लिए पहले ही जमीनी स्तर पर सारे काम फाइनल कर लिए हैं। इसके साथ ही, भारत और यूएई के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भी हो चुका है, जो पिछले साल मई से एक्टिवेट हो चुका है।

UAE Indian trade in local Currency

रुपया-दिरहम में व्यापार से क्या फायदे?

संयुक्त अरब अमीरात और भारत वर्तमान में व्यापार भुगतानों को निपटाने के लिए अमेरिकी डॉलर का उपयोग करते हैं। यदि वे स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करना शुरू करते हैं, तो दोनों देशों को विदेशी मुद्रा रूपांतरण शुल्क (foreign currency conversion fees) नहीं देना होगा, जिसकी वजह से पूंजी की बचत होगी और सामान भी सस्ता रहेगा। इसके साथ ही, स्थानीय करेंसी में व्यापार से पूंजी का काफी आसानी से प्रवाह हो जाएगा। इसके साथ ही, निर्यातकों और आयातकों के लिए लेन-देन की लागत कम हो जाएगी। इस सिस्टम के प्रभावी होने के बाद रुपया-दिरहम में व्यापार, दोनों देशों के बैंकों के वोस्ट्रो अकाउंट के माध्यम से किया जाएगा।

UAE Indian trade in local Currency

18 देश भारतीय करेंसी में व्यापार को तैयार

पिछले हफ्ते, भारत के वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड ने कहा था, कि आरबीआई ने "घरेलू और विदेशी एडी (अधिकृत डीलर) बैंकों को 60 मामलों में 18 देशों के बैंकों के एसआरवीए खोलने के लिए" भारतीय रुपये में भुगतान करने के लिए मंजूरी दे दी है। जिन 18 देशों को भारतीय रुपये में व्यापार करने की अनुमति दी गई है वे हैं, रूस, सिंगापुर, श्रीलंका, बोत्सवाना, फिजी, जर्मनी, गुयाना, इजराइल, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, म्यांमार, न्यूजीलैंड, ओमान, सेशेल्स, तंजानिया, युगांडा और यूनाइटेड किंगडम। रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है, कि "इन देशों के साथ हमारी अपनी मुद्राओं में व्यापार करने के लिए एक द्विपक्षीय शुरुआत की गई है और समय के साथ इसकी मात्रा तेजी से बढ़ेगी।" अगल भारत ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ स्थानीय करेंसी में व्यापार करता है, तो डॉलर का प्रभाव भी रुपये पर उतना कम होगा। इसके साथ ही, डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में सामानों की कीमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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