Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Aircraft Carrier: चीन के फुजियान ने बढ़ाई धड़कन.. तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाएगा भारत, जानिए कितना जरूरी?

Aircraft Carrier: दुनिया के महासागरों के असीमित विस्तार के बीच, समुद्र में प्रभुत्व का विस्तार करने के लिए दुनिया की महाशक्तियों के बीच ग्रेट गेम अपनी चरम पर पहुंचता जा रहा है। खासकर चीन के समुद्री लालच ने भारत की धड़कनें बढ़ा दी हैं और अब भारत भी समुद्र में ड्रैगन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तीसरा एयरक्राफ्ट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।

दुनिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के ये दो दिग्गज अद्वितीय नौसैनिक ताकत का विस्तार करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। चीन के तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर ने समुद्र की अपनी यात्रा शुरू कर दी है, जबकि महीनों की सोच-विचार के बाद आखिरकार भारत भी तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण के लिए तैयार हो गया है।

India To make 3rd Aircraft Carrier

भारत बनाएगा तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर!

तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अहम घोषणा ने समुद्री प्रभुत्व हासिल करने और चीन को मुंहतोड़ जवाब देने भारत की आकांक्षाओं के बारे में चर्चा शुरू कर दी है।

इंडियन नेवी के पास फिलहाल दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। रूस निर्मित INS विक्रमादित्य और भारत में बना स्वदेशी INS विक्रांत। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जिस तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने पर विचार कर रहा है, उसे ICA-2 या INS विशाल नाम दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिकस 65 हजार मीट्रिक टन वाले INS विशाल को बनाने में करीब 6.25 अरब डॉलर (50,000 करोड़ रुपये) का खर्च आएगा और इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड में किया जाएगा। भारतीय नौसेना 2030 तक इस विशाल जहाज को अपने बेड़े में शामिल करने को लेकर आशावादी है, जिससे उसकी लड़ाकू क्षमताएं और बढ़ जाएंगी।

एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की यात्रा काफी कठिन रही है। देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत, आईएनएस विक्रांत को पूरा होने में, 1999 में इसके डिजाइन की शुरुआत से लेकर सितंबर 2022 में इसके चालू होने तक, 23 साल लग गए। और अब उम्मीद है, कि तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने में करीब 10 सालों का वक्त लग सकता है।

भारत को क्यों बनाना होगा तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर?

चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान समुद्र में उतर चुकता है, लिहाजा तीसरे विमानवाहक पोत के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाना, भारत की एक रणनीतिक जवाबी कार्रवाई हो सकती है, जो इस क्षेत्र में शक्ति के नाजुक संतुलन को बनाए रखने के उसके संकल्प का संकेत है।

चीन ने जिस फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण किया है, उसका वजन 80,000 मीट्रिक टन है और यह टाइप-003 क्लास का एयरक्राफ्ट कैरियर है। अमेरिका के पास ही निमित्ज-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर से ज्यादा वजनी है, जिसका वजन 87 हजार मीट्रिक टन है, जबकि फोर्ड क्लास की क्षमता 100,000 मीट्रिक टन है।

फुजियान में कई गुलेल हैं, जो स्की जंप रैंप की जगह लगाए गये हैं, जिससे जहाज के विमानों के ज्यादा व्यापक और शक्तिशाली बेड़े के संचालन की सुविधा मिलती है। दुनिया में अभी 13 देशों की नौसेनाओं के पास ही एयरक्राफ्ट कैरियर हैं और फिलहाल 42 एयरक्राफ्ट कैरियर सक्रिय हैं। इन देशों में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस के बाद अब चीन और भारत मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं।

चीन के विपरीत, भारत एक ज्यादा अनुभवी विरासत होने का दावा करता है, जिसने अपना पहला एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (ब्रिटिश रॉयल नेवी से प्राप्त) को 1961 की शुरुआत में ही चालू कर दिया था। इस ऐतिहासिक लाभ के बावजूद, चीन ने बढ़ते जहाज निर्माण के कारण तेजी से अंतर को पाट दिया है।

India To make 3rd Aircraft Carrier

एयरक्राफ्टर कैरियर का क्या होता है इस्तेमाल?

एयरक्राफ्ट कैरियर अपने आप में एक फ्लोटिला जैसा होता है, जिससे 'अपने देश की सशस्त्र बल को दुनिया के किसी भी हिस्से में ले जाया जा सकता है।' इससे समुद्र के बीच से लड़ाकू विमानों को लॉंच किया जा सकता है, वहीं दुश्मन देश के आंतरिक इलाकों में उनके प्रतिष्ठानों और सेनाओं को नष्ट करने के लिए विमानों को लॉन्च कर सकता है।''

वहीं, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR), पश्चिम एशिया को दक्षिण पूर्व और पूर्वी एशिया के साथ-साथ यूरोप और अमेरिका से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विस्तार, वैश्विक शक्ति प्रक्षेपण का एक केंद्र बन गया है, जहां प्रमुख शक्तियां प्रभाव और महत्वपूर्ण हितों को हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।

अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और समुद्री अवसरों को जब्त करने के लिए, भारत को इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रभुत्व हासिल करना होगा, और इस उपलब्धि को सिर्फ और सिर्फ नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन करके ही हासिल किया जा सकता है। लिहाजा, भारत को तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत है।

एक एयरक्राफ्ट कैरियर महज एक जहाज नहीं है, बल्कि यह एक सावधानीपूर्वक इंजीनियर किया गया तैरता हुआ महानगर है, जो समुद्र में एक शहर जो पारंपरिक नौसैनिक वास्तुकला की सीमाओं को पार करता है। भारत और चीन अपने वाहक बेड़े को मजबूत करने की होड़ में हैं, इन दो एशियाई शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धी रेस के लिए मंच तैयार है। इसलिए, तीसरे विमानवाहक पोत के लिए भारत की खोज एक सावधानीपूर्वक गणना की गई रणनीतिक रणनीति के रूप में उभरती है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+