अफगानिस्तान में बुरी तरह से बिगड़े हालात, भारत सरकार ने लिया बड़ा फैसला
अफगानिस्तान की स्थिति बुरी तरह से खराब हो गई है, जिसे देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
काबुल, जुलाई 06: अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज और नाटो की सेना निकलने के बाद हालात बुरी तरह से खराब हो गये हैं। अफगानिस्तान में लगातार तालिबान अपने पांव पसार रहा है और टोलो न्यूज के मुताबिक करीब 60 जिलों पर तालिबान अभी तक कब्जा जमा चुका है। इसके साथ ही सरकार का गढ़ कहे जाने वाले कांधार प्रांत के कुछ जिलों पर भी तालिबान ने अपना नियंत्रण जमा लिया है, जिसके बाद अब भारत सरकार ने अफगानिस्तान को लेकर बड़ा फैसला लिया है। आशंका जताई जा रही है कि 400 जिलों वाले अफगानिस्तान में अगले एक से दो महीने में तालिबान कब्जा कर सकता है और राजधानी काबुल पर नियंत्रण जमा सकता है।

अफगानिस्तान में बिगड़े हालात
रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में हालात अब बुरी तरह से खराब हो चुके हैं और खुद एक हजार से ज्यादा अफगान सैनिक भागकर ताकिस्तान जा चुके हैं, वहीं रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान से भारी संख्या में लोगों का पलायन होना शुरू हो चुका है। ऐसे में भारत सरकार लगातार बेहद करीब से स्थिति पर नजर रख रही है और रिपोर्ट है कि भारत सरकार अफनागानिस्तान से भारतीय लोगों को बाहर निकालने की तैयारी कर रही है। इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने अफगानिस्तान से भारतीय नागरिकों को बाहर निकालने का फैसला ले लिया है।

निकाले जाएंगे भारतीय नागरिक
इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान के कई हिस्सों में तालिबान बेहद आक्रामक अंदाज में कब्जे जमा रहा है। वहीं, अफगानिस्तान की मीडिया टोलो न्यूज ने दावा किया है कि तालिबान के खिलाफ कई प्रांतों में स्थानीय लोगों ने भी हथियार उठा लिए हैं। ऐसे में इंडिया टूडे से भारत सरकार के बड़े सूत्रों ने कहा है कि ''अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और मजार शरीफ में मौजूद अपने नागरिकों और स्टाफ समेत दूसरे भारतीय कर्मचारियों को बाहर निकालने की कोशिश में है।'' इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक ''अफगानिस्तान के शहरों के अलावा भीतरी इलाकों में स्थिति काफी खराब हो चुकी है और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दूतावासों और भारत सरकार के वाणिज्यिक ऑफिसों का संचालन काफी मुश्किल हो गया है''

कई देशों ने बंद किए वाणिज्यिक दूतावास
रिपोर्ट के मुताबिक कई देशों ने उत्तरी अफगानिस्तान में स्थिति अपने अपने वाणिज्य दूतावासों को बंद कर दिया है और अपने अधिकारियों को अफगानिस्तान से वापस बुला लिया है। जबकि अफगानिस्तान के पड़ोसी देश ताजिकिस्तान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता रखने के लिए सीमा पर सुरक्षा बलों का जमावड़ा लगा दिया है। वहीं, रिपोर्ट है कि अफगानिस्तान के उत्तरी हिस्से में खुद अफगानिस्तान के सरकारी कर्मचारी दफ्तर बंद कर जान बचाने के लिए भाग गये हैं।

भारत के चार दूतावास
दरअसल, पिछले 10 सालों में भारत सरकार ने अफगानिस्तान में 2 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया था और भारत ने अफगानिस्तान में चार वाणिज्य दूतावास का निर्माण किया था, जो राजधानी काबुल में भारतीय दूतावास से जुड़ा हुआ था। वहीं, भारत सरकार का एक सैन्य कार्यालय भी अफगानिस्तान में मौजूद था, जो अफगानिस्तान के अधिकारियों के अलावा अफगान सैनिकों और पुलिसबलों को ट्रेनिंग देते थे। अफगानिस्तान सरकार के कहने पर ही भारत ने वहां पर सैन्य दफ्तर खोला था, लेकिन अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही अफगानिस्तान की स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ चुकी है। हालांकि, अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि सभी भारतीय स्टाफ अफगानिस्तान से वापस बुलाए जाएंगे या फिर कुछ को वहीं पर रखा जाएगा। लेकिन, सरकार की तरफ से ये जरूर कहा गया है कि अफगानिस्तान से भारतीयों को जल्द ही वापस बुला लिया जाएगा।

दो दूतावास हो चुके हैं बंद
रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान के जलालाबाद और हेरात शहर में स्थिति दो भारतीय दूतावास कुछ दिनों पहले बंद हो चुके हैं, जबकि कंधार और मजार शरीफ में अभी भी दो वाणिज्य दूतावास काम कर रहे हैं और वहां से अफगानिस्तान में विकासकार्य चलाए जा रहे हैं, लिहाजा भारतीय कर्मचारियों को सुरक्षा देने के लिए सैनिकों को भी तैनात किया गया है। इसी साल अप्रैल महीने में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान कर दिया था और पिछले हफ्ते अमेरिकी सैनिकों ने अफगानिस्तान में स्थिति अपने सबसे बड़े सैन्य हवाई अड्डा बाग्राम को भी खाली कर दिया था, जिसके बाद तालिबानी और ज्यादा आक्रामक हो चुके हैं।

ताजिकिस्तान ने बढ़ाई सुरक्षा
तालिबान ने उत्तरी अफगानिस्तान के कई जिलों पर अपना कब्जा जमा लिया है और तालिबान से अपनी जान बचाने के लिए करीब एक हजार से ज्यादा अफगान सैनिक भागकर ताजिकिस्तान चले गये हैं। वहीं, रिपोर्ट है कि अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत से करीब 300 अफगान सैनिक ताजिकिस्तान भाग गये हैं। वहीं, एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रखमोन ने अफगानिस्तान से लगती अपनी देश की सीमा पर 20 हजार से ज्यादा सैनिकों को तैनात कर दिया है और सभी को हर वक्त अलर्ट रहने को कहा गया है। वहीं, मजार-ए-शरीफ में स्थिति तुर्की और रूस ने अपने वाणिज्य दूतावास को बंद कर दिए हैं और ईरान ने भी अपने वाणिज्य दूतावास में काम बंद करवाकर अपने अधिकारियों को वापस बुला लिया है।












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