ड्रैगन की नाक में नाल... चीन से हिंद महासागर का ताइवान स्ट्रेट में बदला, मोदी सरकार ने नौसेना को भेजा
India in Taiwan Strait: भारत ने चीन के खिलाफ अपनी आक्रामकता के एक्सलेटर पर पैर रख दिया है और अब भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब देना शुरू कर दिया है। भारत ने एक साथ दक्षिण एशिया, दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और चीन की नाक का सवाल रहे ताइवान स्ट्रेट में अपने फ्रंट खोल दिए हैं।
ताइवान, जहां की एक हरकत भी चीन को आग-बबूला कर देता है, वहां पर भारत ने अपने नौसैनिक युद्धपोत के साथ साथ हंटर पी-8I एंटी-सबमरीन वारफेयर एयरक्राफ्ट को भेज दिया है, जिसके बाद माना जा रहा है, कि चीन की तरफ से काफी सख्त प्रतिक्रिया दी जाएगी। इसके अलावा, भारत ने अपने तीन पूर्व सशस्त्र बलों के प्रमुखों को भी ताइवान भेजा है।

ताइवान को लेकर नई दिल्ली के रूख के बाद पूरी दुनिया में साफ संदेश जा रहा है, कि अब भारत, चीन के साथ दो-दो हाथ करने के मूड में आ चुका है और पहले, जो चीन भारत को हिमालय में उलझाकर रखना चाहता था, अब भारत चीन की उस रणनीति को काउंटर करने के लिए ताइवान स्ट्रेट पहुंच गया है।
भारत का ताइवान प्लान क्या है?
भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने स्पष्ट किया है, कि ताइवान जलडमरूमध्य, दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर "इस भू-राजनीतिक टकराव में उपरिकेंद्रों में से एक" में बदल रहे हैं, जिसमें ताइवान "सबसे संभावित फ्लैशप्वाइंट" है।
ताइवान में केटागलन फोरम के 2023 इंडो-पैसिफिक सुरक्षा संवाद में, पूर्व एडमिरल ने अमेरिका द्वारा ताइवान को "अधिनायकवाद के खिलाफ लोकतांत्रिक लचीलेपन और मुक्त दुनिया के प्रतीक" के उदाहरण के रूप में वर्गीकृत करने पर सहमति जताई है।
भारतीय नौसेना के पूर्व एडमिरल करमबीर सिंह ने मौजूदा टकराव को, पूर्ण संघर्ष में बदलने से रोकने के लिए तीन-आयामी रणनीति पेश किया। उन्होंने कहा, कि "आज मेरा प्रस्ताव यह है, कि हम सभी को आक्रामक स्थिति को रोकने के लिए मिलकर काम करना चाहिए... ताइवान जलडमरूमध्य को संकट में बदलने से, संकट से संघर्ष में बदलने से रोकने के लिए मेरे विचार से, मेरे पास तीन प्रस्ताव हैं।
एक, हमें क्षेत्र की अस्थिरता को रोकने की आवश्यकता है। दूसरा, यह सुनिश्चित करने के लिए, मध्य शक्तियों और ग्लोबल साउथ के बीच पावर बैलेस्ट का निर्माण किया जाए.. और तीसरा, जो काफी बहुत महत्वपूर्ण है, वो ये कि स्वतंत्र और उदार दुनिया के पक्ष में शक्ति संतुलन बनाए रखा जाए।
भले ही ताइवान मुद्दे को अमेरिका और चीन के बीच सत्ता संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन अगर बीजिंग, ताइवान द्वीप के खिलाफ बल प्रयोग की अपनी धमकियों पर कार्रवाई करने का फैसला करता है, तो भारत पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

भारत का आधा व्यापार इसी दिशा में पूर्व की ओर जाता है, और ताइवान संघर्ष, भारत के सप्लाई चेन को पूरी तरह से रोक देगा। जिससे भारतीय उद्योग पर खतरनाक प्रभाव पड़ेगा।
वहीं, भारत में सेमीकंडक्टर आपूर्ति में व्यवधान, भारत के कई सेक्टर को ना सिर्फ अपंग बना सकता है, बल्कि भारत में भारी बेरोजगारी भी उत्पन्न हो सकती है। वहीं, ताइवान स्ट्रेट में महत्वपूर्ण केबल बिछाए गये हैं, जिनमें आने वाला नुकसान, डेटा फ्लो को ध्वस्त कर सकता है।
एडमिरल सिंह ने कहा कि पिछले दो वर्षों की भू-राजनीतिक घटनाएं, विशेष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध ने, दुनिया को दो भागों में विभाजित करने का खतरा पैदा कर रहा है। "चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया का गठबंधन, पश्चिम और अमेरिका की नीतियों के विरोध के लिए आधार बनता दिख रहा है।"
क्वाड कैसे कर रहा चीन को काउंटर
ऑस्ट्रेलिया अपने जल क्षेत्र में अपने पहले मालाबार-2023 नौसैनिक अभ्यास की मेजबानी कर रहा है, और भारत अपने दो युद्धपोतों के साथ इसमें हिस्सा ले रहा है और P-8I पोसीडॉन एंटी-सबमरीन वारफेयर एयरक्राफ्ट सैन्य अभ्यास का संचालन करेगा।
मालाबार अभ्यास आज से शुरू हो रहा है और ये अगले 10 दिनों तक चलेगा। डीडी न्यूज ने कहा है, कि यह "भारत-प्रशांत में चीन के लगातार आक्रामक कदमों के बीच सैन्य अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देगा।"
क्वाड के बाकी देश, अमेरिका और जापान भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ इस सैन्य अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं, जिसे सीधे तौर पर चीन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।
चीन को उसके 'घर' में चुनौती
एडमिरल करमबीर सिंह को विश्वास है, कि ताइवान जलडमरूमध्य में टकराव की संभावना है, क्योंकि चीन हमेशा अपनी शक्ति के शिखर पर होने पर बल का प्रदर्शन करता है।
उन्होंने कहा, कि साल 1993 में, जब चीन की जीडीपी 500 अरब डॉलर के आसपास थी, उस वक्त चीन भावनात्मक तौर पर आग्रह करता था और आज जब चीन की जीडीपी 17.5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई है, तो वो अपने बल का प्रदर्शन कर रहा है।
आपको बता दें, कि चीन ने हाल ही में कहा है, कि ताइवान पर "हम बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप का बल प्रयोग या अन्य आवश्यक साधनों से जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।"
चीन और अमेरिका की व्यापक राष्ट्रीय शक्ति के बीच का अंतर तेजी से कम हो रहा है और एडमिरल सिंह ने कहा, कि चीन ताइवान के खिलाफ तभी कार्रवाई करेगा, जब उसे लगेगा कि शक्ति संतुलन चीन के पक्ष में है।
वहीं, भारत के लिए, चूंकी चीन बार बार हिंद महासागर में घुस रहा है, तो भारत ताइवान स्ट्रेट में घुसकर अब चीन को ये साफ शब्दों में संदेश देना चाहता है, कि जिस अधिकारी से चीन हिंद महासागर में घुसता है, भारत के पास भी वही अधिकार हैं और अब भारत, चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए तैयार है।












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