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कठिन पड़ोसियों के बीच घिरा है भारत, बाइडेन के 'नये दूत' ने बताया भारतीय सीमा की सुरक्षा का प्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के नई दिल्ली में अगले दूत के लिए उम्मीदवार एरिक माइकल गार्सेटी अमेरिकी सांसदों के सामने पेश हुए हैं, जहां उन्होंने भारत-अमेरिका संबंध को लेकर अपने विचार रखे हैं।

वॉशिंगटन, दिसंबर 15: भारत 'कठिन पड़ोसियों' के बीच स्थिति है, लिहाजा हमें भारत की सीमाओं को सुरक्षित करने में मदद करनी होगी, ये बयान दिया है, नई दिल्ली में अमेरिका के अगले राजदूत होने के उम्मीदवार एरिक माइकल गार्सेटी ने। एरिक माइकल गार्सेटी ने अमेरिकी सांसदों के बीच भारत के मसले पर अपने विचार रखे हैं। राष्ट्रपति बाइडेन ने एरिक माइकल गार्सेटी को नई दिल्ली में अगला दूत होने का उम्मीदवार बनाया है और बहुत संभावना है कि, एरिक माइकल गार्सेटी ही नई दिल्ली में अमेरिका के अगले दूत होंगे।

कठिन पड़ोसियों के बीच घिरा है भारत'

कठिन पड़ोसियों के बीच घिरा है भारत'

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के नई दिल्ली में अगले दूत के लिए उम्मीदवार एरिक माइकल गार्सेटी ने मंगलवार को अमेरिकी सांसदों से कहा कि वह "भारत को अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने, अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और अपनी क्षमता को मजबूत करने के लिए अमेरिका के प्रयासों को दोगुना कर देंगे।" 50 वर्षीय एरिक माइकल गार्सेटी वर्तमान में लॉस एंजिल्स के मेयर के रूप में सेवारत हैं और बाइडेन के निजी विश्वासपात्रों में से एक हैं। अमेरिकी सांसदों के सामने अपनी उम्मीदवारी को लेकर अपनी बात रखते हुए गार्सेटी ने भारत को लेकर अपने विचार रखे हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने 'भारत कठिन पड़ोसियों से घिरा है' ये बात कही है।

भारत को लेकर 'नये दूत' के विचार

भारत को लेकर 'नये दूत' के विचार

भारत में अमेरिकी राजदूत के लिए अपनी पुष्टिकरण सुनवाई के दौरान गार्सेटी ने कहा कि, "भारत एक कठिन पड़ोस में स्थित है। अगर मेरे नाम की पुष्टि हो जाती है, तो मैं भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखनेस, भारत की संप्रभुता की रक्षा करने और भारत के खिलाफ आक्रमण रोकने के लिए जारी अमेरिकी प्रयासों को दोगुना करने का इरादा रखता हूं''।

आतंकवाद के खिलाफ भारत की मदद

आतंकवाद के खिलाफ भारत की मदद

गार्सेटी ने अमेरिकी सांसदों के सामने अपने 'इंटरव्यू' के दौरान इस बात पर जोर दिया कि, आतंकवाद को रोकने के लिए, आतंकवाद के खिलाफ समन्वय बनाने के लिए, नेविगेशन को मजबूत करने के लिए वो भारत के साथ सूचवनाएं साझा करने पर जोर देंगे। गार्सेटी ने कहा कि, उन्होंने अमेरिकी नौसेना के साथ काम करते हुए भारतीय नौसेना के अधिकारियों के साथ काफी करीब से काम किया है, लिहाजा वो समुद्री सुरक्षा में भारत की प्रमुखता से मदद कर सकते हैं।

भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

गार्सेटी ने कहा कि, उनकी कोशिश भारत के साथ डिफेंस सेक्टर में टेक्नोलॉजी की बिक्री पर होगी, ताकि हमारी टेक्नोलॉजी के माध्यम से भारत अपनी क्षमताओं को विकसित कर सके। गार्सेटी ने कहा कि, अगर उनके नाम की पुष्टि हो जाती है, तो वो एजेंडा-2030 के जरिए इंटरनेशनल सोलर एलायंस के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहेंगे, ताकि ग्रीन एनर्जी के सेक्टर में दोनों देश विकास कर सके। उन्होंने कहा कि, "भारत के साथ हमारी साझेदारी का आधार मानव संबंध हैं जो हमारे राष्ट्रों को जोड़ता है, जो हमारे देश को मजबूत करने वाले चार मिलियन मजबूत भारतीय-अमेरिकी प्रवासी हैं और लगभग दो लाख भारतीय छात्र और दसियों हजार भारतीय प्रोफेशनल्स हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं"।

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