'एंटी इंडिया है भारत का बुद्धिजीवी वर्ग, मोदी विरोध में देश को करते बदनाम', बोले ऑस्ट्रेलियाई प्रोफेसर
प्रोफेसर बेबोनेस ने कहा कि भारत को फासीवादी दर्शाने के पीछे ग्लोबल मीडिया का हाथ है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मीडिया और दुनिया के पास भारत के बारे में सही जानकारी ही नहीं है। भारत का बुद्धिजीवी वर्ग देश विरोधी है।
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच पर समाजशास्त्री सल्वाटोर बाबोनेस ने ग्लोबल मीडिया की खूब आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत की छवि को फासीवादी दिखाने के पीछे ग्लोबल मीडिया का हाथ है। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक छवि को जो चीजें प्रभावित करती है, वह सही जानकारी का अभाव है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा सफल लोकतंत्र है। भारत ने उपनिवेशवाद के दौर से बाहर निकल वैश्विक स्तर पर खुद को साबित किया है।

गलत तरीके से तैयार की जाती है रैंकिंग
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के दूसरे दिन शनिवार को 'डेमोनाइजिंग अ डेमोक्रेसी' सेशन के तहत सिडनी विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सल्वाटोर बाबोन्स ने भारतीय लोकतंत्र, फासीवाद और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को लेकर विस्तार से चर्चा की। हंगर इंडेक्स, प्रेस फ्रीडम सहित एक के बाद एक कई इंटरनेशनल रैकिंग में भारत की बुरी स्थिति से जुड़े सवाल पर प्रोफेसर बेबोनेस कहते हैं कि इन रैंकिंग्स को गलत तरीके से तैयार किया गया है। प्रोफेसर डॉ सल्वाटोर बाबोन्स ने कहा कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 को सर्वे के आधार पर तैयार किया गया है। अब सवाल ये है कि ऐसे सर्वे में कौन लोग शामिल हैं। ये सर्वे किन लोगों पर किए जाते हैं। इनमें बुद्धिजीवी वर्ग से जुड़े लोग, विदेश और भारत के छात्र, एनजीओ और मानवाधिकार संगठनों से जुड़े लोग होते हैं। इन रैंकिंग्स में भारत को गलत आंका जाता है।

भारतीय बच्चे कम पोषित नहीं हैं
प्रोफेसर बाबोन्स ने कहा कि तथ्य यह है कि कई भारतीय बच्चे समान ऊंचाई के अन्य बच्चों की तुलना में हल्के होते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि वे कम पोषित हैं। उन्होंने कहा हैरानी की बात है कि पाकिस्तान एक गंभीर आर्थिक संकट, बाढ़ और चिकित्सा मुद्दों से गुजर रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के अनुसार, यह "दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक है" और अभी भी वैश्विक स्वास्थ्य सूचकांक में 99 वें स्थान पर है।

भारत की झूठी छवि गढ़ी गई
उन्होंने कहा कि हमने भारत में सांप्रदायिक हिंसा की खूब बातें सुनी हैं, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में लेकिन रवांडा और बुरुंडी जैसे अफ्रीकी देशों में लगभग उतनी ही सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई हैं, लेकिन हिंसा की इन घटनाओं को लेकर पूरी दुनिया में यूपी का नाम उछाला जाता है। बिहार में ठीक वहीं हालात हैं जो कांगो में हैं। सवाल यह है कि भारत की एक छवि गढ़ ली गई है, जो खतरनाक बात है।

देश विरोधी है भारत का बुद्धिजीवी वर्ग
पहली बार भारत के दौरे पर आए प्रोफेसर बेबोनेस ने कहा कि भारत को फासीवादी दर्शाने के पीछे ग्लोबल मीडिया का हाथ है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मीडिया और दुनिया के पास भारत के बारे में सही जानकारी ही नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि भारत का बुद्धिजीवी वर्ग देश विरोधी है। यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं यहां वर्ग की बात कर रहा हूं, किसी व्यक्ति विशेष की नहीं। यह बुद्धिजीवी वर्ग मोदी विरोधी भी है और भारतीय जनता पार्टी का भी विरोधी है।












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