Indian Economy: भारत का निर्यात मार्च में 13% गिरा, बेरोजगारी बढ़ी, फिर भी अर्थव्यवस्था में लचीलापन बरकरार
यूक्रेन युद्ध के बाद ओपेक प्लस ने तेल उत्पादन कम कर दिया है, जिसका गंभीर असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ा है, क्योंकि इससे उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो गई है।

Indian Economy: निर्यात में आई थोड़ी सी मंदी और बेरोजगारी के आंकड़े में हुए इजाफे के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था में लचीलापन बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च महीने में भारत की आर्थिक गतिविधियों में लचीपालपन बना हुआ है, हालांकि निर्यात की गति कमजोर हुई है और बेरोजगारी दर में भी इजाफा हुआ है।
भारत को लेकर ये आंकड़े उस वक्त आए हैं, जब भारत ने साल 2030 तक अपनी निर्यात क्षमता को 2 ट्रिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा हुआ है और भारत ने जनसंख्या के मामले में अभी भी चीन को पीछे छोड़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि खपत पर लगाए गये टैक्स में इजाफा देखने को मिली है, जो ये दर्शाता है, कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। ब्लूमबर्ग ने ओवरऑल एक्टिविटि ट्रैकर के जरिए आठ संकेतकों के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया है।
ब्लूमबर्ग की इस रीडिंग रिपोर्ट में पिछले सल मई के बाद से, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा लगातार बढ़ाए जाने वाले बेसिक प्वाइंट्स को ध्यान में रखकर मूल्यांकन किया गया है। पिछले साल मई के बाद से आरबीआई 250 बेसिक प्वाइंट्स का इजाफा कर चुकी है, जिससे डेवलपमेंटल प्रोग्राम्स को बल देने की कोशिस की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, खुदरा और थोक मूल्य-लाभ अभी भी बढ़ी हुई दरों पर कम हो गए हैं, जो लंबे समय तक रुकने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आरबीआई ने फिलहाल बेसिक प्वाइंट्स में बढ़ोतरी रोक रखी है।
अर्थव्यवस्था में उछाल के लिए सरकार की कोशिशें
पिछले हफ्ते, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए "पर्याप्त प्रयास" कर रही है, कि अर्थव्यवस्था में उछाल बना रहे, हालांकि उन्होंने ओपेक + उत्पादन में कटौती और यूक्रेन में रूस के युद्ध से संबंधित फैसलों के प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा, कि गुड्स एंड सर्विसेज सेक्टर की मांग में आई कमजोरी, भारत की रिकवरी को कमजोर कर सकता है। आपको बता दें, कि भारत सर्विस सेक्टर में दुनिया में अव्वल देश है, लेकिन सर्विस सेक्टर में पिछले कुछ समय से गिरावट देखने को मिली है, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ना लाजिमी है।
व्यावसायिक गतिविधि
परचेजिंग मैनेजर्स के सर्वेक्षणों ने दिखाया है, कि कच्चे माल की उपलब्धता में वृद्धि के कारण आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव कम होने से विनिर्माण गतिविधि में सुधार हुआ है। मार्च में सर्विस सेक्टर में गतिविधि मार्च में, पिछले 12 महीनों की तुलना में कम हो गई, जिससे समग्र सूचकांक फरवरी में 59 से 58.4 पर आ गया।
एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पोलियान्ना डी लीमा ने कहा, कि "सेवा फर्मों के एक बड़े हिस्से ने लागत में बढ़ोतरी होने के बाद सामानों की बिक्री की कीमत बढ़ा दी, इसीलिए सर्विस सेक्टर पर असर पड़ा है।"
मार्च महीने में निर्यात में 13.9% की गिरावट आई है, जो लगातार चौथे महीने गिरावट है, जबकि आयात एक साल पहले 7.90% गिर गया था।
बार्कलेज पीएलसी के अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा, कि "धीमी वैश्विक अर्थव्यवस्था से आने वाली बाधाओं का असर निर्यात पर अधिक पड़ने लगा है।" इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में एक साल पहले की तुलना में मार्च में 57% की वृद्धि हुई है, क्योंकि प्रमुख मोबाइल उपकरण निर्माता चीन-प्लस-वन रणनीति के साथ भारत में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित कर रहे हैं।
Apple Inc. अब अपने लगभग 7% iPhone भारत में बना रहा है और खुदरा बिक्री को बढ़ाने के लिए इस सप्ताह दक्षिण एशियाई देश में कंपनी के स्वामित्व वाले दो रिटेल स्टोर, मुंबई और दिल्ली में खोले गये हैं।
उपभोक्ता गतिविधियां
केंद्रीय बैंक के आंकड़ों से पता चलता है, कि बैंकिंग प्रणाली में तरलता मार्च में सरप्लस हो गई थीं, जबकि ऋण वृद्धि, फरवरी में 15.52% से घटकर 15% हो गई।
गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स कलेक्शन, जो अर्थव्यवस्था में खपत को मापने में मदद करता है, वो एक साल पहले से 13% बढ़कर मार्च में 1.60 ट्रिलियन रुपये (19.5 बिलियन डॉलर) हो गया है, जो पिछले छह साल पुराने लेवी के इतिहास में दूसरा उच्चतम स्तर है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में 16% की वृद्धि से महीने में नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन 14% तक धीमा हो गए। फिर भी यात्री वाहनों की बिक्री में वृद्धि एक महीने पहले 10.9% की वृद्धि से बढ़कर 14.42% हो गई है। यानि, भारत में उपभोक्ता गतिविधियां जारी हैं, लिहाजा भारतीय अर्थव्यवस्था में भी लचीलापन बना हुआ है।












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