NASA ने जताई आशंका, भारत के मिशन शक्ति की वजह से अंतरिक्ष में खतरनाक स्थिति में पहुंचा मलबा

वॉशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष संस्‍था, नेशनल एरोनॉटिक्‍स एंड स्‍पेस एडमिनिस्‍ट्रेशन (नासा) ने कहा है कि पिछले दिनों भारत ने एंटी-सैटेलाइट वेपन यानी एसैट मिसाइल का जो परीक्षण किया है उसकी वजह से अंतरिक्ष में मलबे के 400 टुकड़े पैदा हो गए हैं। नासा की मानें तो यह एक खतरनाक स्थिति है और इसकी वजह से इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (आईएसएस) पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी नए खतरे पैदा हो गए हैं।

बड़े ऑब्‍जेक्‍ट्स की ट्रैकिंग जारी

बड़े ऑब्‍जेक्‍ट्स की ट्रैकिंग जारी

नासा के मुखिया जिम ब्राइडेनस्‍टाइन ने सोमवार को संस्‍था के कर्मियों को संबोधित करते हुए यह बात कही है। ब्राइडेनस्‍टाइन ने कहा, 'हर टुकड़ा इतना बड़ा नहीं है कि उसे ट्रैक किया जा सके। हम अभी उन बड़े ऑब्‍जेक्‍ट्स का पता लगा रहे हैं जिन्‍हें आकार की वजह से ट्रैक करना काफी आसान है।' ब्राइडेनस्‍टाइन ने आगे कहा कि फिलहाल अभी हम 10 सेंटीमीटर्स यानी छह इंच या इससे ज्‍यादा बड़े ऑब्‍जेक्‍ट्स को ट्रैक कर रहे हैं। इस तरह के करीब 60 टुकड़ों को ट्रैक किया जा चुका है। उन्‍होंने जानकारी दी कि आईएसएस के इस मलबे से टकराने की संभावना अगले 10 दिनों में 44 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

24 टुकड़ें आईएसएस के लिए खतरनाक

24 टुकड़ें आईएसएस के लिए खतरनाक

ब्राइडेनस्‍टाइन ने कहा कि भारतीय सैटेलाइट को बहुत ही कम ऊंचाई यानी 180 मील या 300 किलोमीटर की दूरी पर ढेर किया गया है जो कि आईएसएस के नीचे है और बहुत से सैटेलाइट्स अपनी कक्षा में हैं। उनकी मानें तो इसके बाद भी 24 ऐसे टुकड़ें हैं जो आईएसएस के ऊपरी हिस्‍से तक जा सकते हैं। ब्राइडेनस्‍टाइन ने कहा, 'यह बहुत ही खतरनाक बात है और इसकी वजह से मलबा आईएसएस के सबसे ऊपरी बिंदु तक जा सकता है। इस तरह की गतिविधि आने वाले समय में होने वाली ह्यूमन स्‍पेसफ्लाइट के लिए खतरनाक है।' हालांकि उन्‍होंने यह भी माना है कि एसैट के परीक्षण के बाद सैटेलाइट का मलबा अगले 10 दिनों में पृथ्‍वी पर गिर सकता है।

चीनी सैटेलाइट का मलबा भी अंतरिक्ष में

चीनी सैटेलाइट का मलबा भी अंतरिक्ष में

ब्राइडेनस्‍टाइन की मानें तो यह बिल्‍कुल भी स्‍वीकार्य नहीं है और नासा मानता है कि इससे उस पर असर पड़ेगा। यूएस मिलिट्री ऑब्‍जेक्‍ट्स को ट्रैक करती है। इसके अलावा वह आईएसएस और दूसरे सैटेलाइट्स से इसके टकराने की संभावना के खतरे का पता लगाती है। मिलिट्री अभी 23,000 ऐसे ऑब्‍जेक्‍ट्स को ट्रैक कर रही है जो 10 सेंटीमीटर्स से ज्‍यादा बड़े हैं। इनमें से 10,000 टुकड़ें अंतरिक्ष के मलबे के हैं। इनमें से तो 3,000 ऐसे हैं जो साल 2007 में चीन के एसैट जैसे परीक्षण के बाद अंतरिक्ष में आए। चीनी सैटेलाइट करीब 800 किलोमीटर की दूरी पर नष्‍ट हुआ था।

दुनिया का चौथा देश बना भारत

दुनिया का चौथा देश बना भारत

27 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को जानकारी दी थी कि भारत ने एक एसैट मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जिसने लो अर्थ ऑर्बिट यानी लियो में 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक सैटेलाइट को तीन मिनट के अंदर गिरा दिया है। इस सफल टेस्‍ट के साथ ही भारत, अमेरिका, रूस और चीन के एलीट क्‍लब में शामिल हो गया जिसके पास अंतरिक्ष में दुश्‍मन को जवाब देने की क्षमता है।पिछले दिनों अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा कि अमेरिका को भारत के मिशन शक्ति की जानकारी थी। पेंटागन ने इसके साथ ही एसैट मिसाइल टेस्‍ट की जासूसी की बात से साफ इनकार कर दिया है।

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