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इस वजह से भारत में हैं सबसे अधिक महिला पायलट्स, दुनिया का कोई देश नहीं कर सकता बराबरी

इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ वुमन एयरलाइन पायलेट के अनुमान के अनुसार, भारत में 12.4 फीसदी महिला पायलेट हैं जबकि अमेरिका में यह 5.5 फीसदी है जो दुनिया का सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है। इसके अलावा ब्रिटेन में यह आंकड़ा 4.7 फीसदी है।

नई दिल्ली, 09 अगस्तः आज से ठीक 33 साल पहले निवेदिता भसीन 1989 में पहली बार सबसे कम उम्र की कॉमर्शियल एयरलाइंस की पायलट बनी थीं। उन दिनों ऐसी स्थिति थी कि अन्य चालक दल महिला पायलटों को जल्द से जल्द कॉकपिट में बुला लिया करते थे ताकि विमान उड़ाती महिला पायलट को देख उन्हें घबराहट न हो। अब जब इस घटना के तीन दशक बीत चुके हैं भारत में महिला पायलट दिखना दुर्लभ बात नहीं है। यह एक सुखद तथ्य है कि अनुपातिक दृष्टि से भारत में विश्व स्तर पर सबसे अधिक महिला पायलट हैं।

भारत में US से दोगुने महिला पायलट्स

भारत में US से दोगुने महिला पायलट्स

इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ वुमन एयरलाइन पायलेट के अनुमान के अनुसार, भारत में 12.4 फीसदी महिला पायलेट हैं जबकि अमेरिका में यह 5.5 फीसदी है जो दुनिया का सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है। इसके अलावा ब्रिटेन में यह आंकड़ा 4.7 फीसदी है। ऐसे में यह आंकड़े सवाल उठाते हैं कि जो देश लैंगिक समानता में 146 देशों में 135वें स्थान पर हो, वहां एविएशन इंडस्ट्री की तस्वीर कैसे बदल रही है?

भारत में महिलाओं को मिलते हैं कई फायदे

भारत में महिलाओं को मिलते हैं कई फायदे

इस सवाल के जवाब में निवेदिता भसीन कहती है, " भारतीय महिलाओं को एविशन इंडस्ट्री में आउटरीच कार्यक्रमों से लेकर बेहतर कॉर्पोरेट नीतियों और मजबूत पारिवारिक सर्मथन जैसे कई कारकों से प्रोत्साहन मिलता है। इसके अलावा कई महिलाएं नेशनल कैडेट कॉर्प्स के एयरविंग से उड़ानों की ओर आकर्षित होती हैं। 1948 में बनी एनसीसी एक यूथ प्रोग्राम है जहां छात्रों को हल्के एयरक्राफ्ट उड़ाना सिखाया जाता है। इससे महंगी कमर्शियल पायल ट्रेनिंग तक पहुंच महिलाओं के लिए आसान हो जाती है।

महिला पायलटों के लिए बेहतर माहौल

महिला पायलटों के लिए बेहतर माहौल

इसके साथ ही कुछ राज्य सरकारें भी सब्सिडी दे रही हैं। जैसे कि होंडा मोटर जैसी कंपनियां इंडियन फ्लाइंग स्कूल में महिलाओं को 18 महीने के कार्यक्रम की फुल स्कॉलरशिप देती हैं और उन्हें नौकरी ढूंढने में मदद करती हैं। फ्लोरिडा में रह रहीं प्रोफेसर मिशेल हॉलरन के मुताबिक भारत ने दशकों पहले पायलटों सहित एसटीईएम पदों पर महिलाओं की नियुक्ति करनी शुरू की। बाकी देशों में ऐसा नहीं रहा। अगर भारत की बात की जाए तो भारतीय एयरफोर्स ने महिला पायलेट्स को हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट के लिए 1990 के दशक से रिक्रूट करना शुरू कर दिया था।

महिलाओं के लिए अलग पॉलिसी

महिलाओं के लिए अलग पॉलिसी

भारत में कुछ एयरलाइन्स भी महिला प्रतिभा को तैयार करने के लिए पॉलिसी बना रही हैं। भारत की सबसे बड़ी पैसेंजर एयरलाइन इंडिगो महिला पायलेट्स को काम की आसान शर्तें देती है। उन्हें गर्भावस्था के दौरान उड़ान की ड्यूटी नहीं दी जाती साथ ही कानून के अनुसार 26 महीने की तनख्वाह के साथ मैटरनिटी लीव भी दी जाती है। इसके साथ ही बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच भी होते हैं। महिला पायलेट्स फ्लेक्सिबल कॉन्ट्रेक्ट ले सकती हैं जिसमें एक कैलेंडर महीने में 2 हफ्ते की छुट्टी दी जाती है जब तक उनका बच्चा 5 साल का न हो जाए।

महिला पायलट को मिलते हैं गार्ड्स

महिला पायलट को मिलते हैं गार्ड्स

इसके अलावा विस्तारा गर्भवति महिला पायलेट्स और केबिन क्रू को अस्थाई तौर पर ग्राउंड या प्रशासनिक ड्यूटी का विकल्प देता है, जब तक कि वो दोबारा उड़ान के लिए तैयार ना हो जाएं। इसके साथ ही उन्हें 6 महीने की तनख्वाह के साथ मैटरनिटी लीव भी मिलती है और उनकी क्रेच की फीस का भी पैसा मिलता है। कुछ विमान कंपनियां देर रात उड़ान भरने वाली महिलाओं को एक ड्राइवर और गार्ड भी देते हैं।

परिवार का मिलता है समर्थन

परिवार का मिलता है समर्थन

एक कमर्शियल पायलेट हाना खान के मुताबिक महिला पायलेट्स के हित में सबसे जरूरी चीज जो जाती है वह है पारिवारिक संचरचना। भारत जैसी पारिवारिक संचरचा पश्चिमी देशों में मिलना मुश्किल है। वह बताती हैं कि महिला पायलेट्स को भारत में परिवार का खूब समर्थन मिला हुआ है। भारतीय परिवार में बच्चों के दादा-दादी या नाना-नानी होते हैं जो बच्चों को बड़ा करने में और घर संभालने में मदद करते हैं।

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