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तेल के बाद रूस से दोगुना कोयला खरीदेगा भारत, मोदी सरकार की बहुत बड़ी घोषणा, और भड़केगा अमेरिका?

कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पहले से ही पश्चिमी देशों के निशाने पर है, लेकिन भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि, ''वैध ऊर्जा लेनदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए''।

नई दिल्ली/वॉशिंगटन, मार्च 28: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका समेत पश्चिमी देश पहले ही भारत पर भौहें चढ़ाए हुए हैं, लेकिन ऐसा लग रहा है, कि भारत सरकार ने साफ कर दिया है, कि उसे देशहित के आगे पश्चिमी देशों की 'राजनीति' से कोई फर्क नहीं पड़ता है। यूक्रेन युद्ध को लेकर एक तरफ जहां अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार रूस को प्रतिबंधों के जाल में जकड़ रहे हैं, वहीं भारत ने भारी छूट पर तेल खरीदने के बाद अब रूस से कोयले का ऑर्डर दोगुना कर दिया है।

रूस से दोगुना कोयला खरीदेगा भारत

रूस से दोगुना कोयला खरीदेगा भारत

भारत सरकार ने साफ कर दिया है, कि वो पश्चिमी देशों के प्रभाव में आए बगैर देश का हित देखेगा और जिस देश से उसे फायदा होगा, उस देश के साथ कारोबार करेगा। मोदी कैबिनेट ने रूस से दोगुना कोयला खरीदने को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद माना जा रहा है, कि अमेरिका और पश्चिमी देश भारत पर और भी ज्यादा भड़केंगे। भारत के इस्पात मंत्री ने रविवार को कहा कि, भारत रूस से कोयला खरीदेगा। भारत के केंद्रीय इस्पात मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने रविवार को कहा कि, भारत "रूस से कोकिंग कोल आयात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है"। इस वक्त दुनिया के कई देश यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को लेकर मास्को से व्यापारिक संबंध बढ़ाने पर परहेज कर रहे हैं। लेकिन, रूस से भारी डिस्काउंट मिलने के बाद भारत सरकार ने रूस से कच्चा तेल खरीदने का फैसला किया था और रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनी को भारत की तरफ से ऑर्डर भी मिल चुका है। वहीं, अब भारत सरकार ने रूस से दोगुना कोयला खरीदने का फैसला किया है।

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    इस्पात मंत्री ने क्या कहा?

    इस्पात मंत्री ने क्या कहा?

    नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में भारतीय इस्पात मंत्री ने कहा कि, भारत रूसी कोकिंग कोल के आयात को दोगुना करने की योजना बना रहा है, जो स्टील निर्माण कारखानों के लिए काफी ज्यादा जरूरी होता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की की खबर के मुताबिक, भारत ने रूस से 45 लाख टन कोयले का आयात किया था, हालांकि, कितने वक्त में भारत ने 45 लाख टन कोयला खरीदा, इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी। इस्पात मंत्री ने कहा कि, युद्ध के स्पष्ट संदर्भ में रूस से कोकिंग कोल की "सुचारू आपूर्ति" प्रभावित हुई है।

    रूसी कोयले की क्वालिटी अच्छी

    रूसी कोयले की क्वालिटी अच्छी

    आपको बता दें कि, भारत और चीन खुद भी कोयले का भारी मात्रा में उत्पादन करते हैं, लेकिन भारत और चीन में जिस कोयले का उत्पादन होता है, उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती है और रूसी कोयले में काफी कार्बन होता है, जो स्टील उद्योग के लिए काफी फायदेमंद होता है। चूंकी, भारत में स्टील उद्योग का बाजार विशालकाय है, लिहाजा रूसी कोयले की डिमांड ज्यादा होती है। रिपोर्ट के अनुसार, जहाजों से करीब 10.6 लाख टन कोकिंक कोयला, जो मुख्य तौर पर स्टील बनाने और थर्मल पॉवर स्टेशन में इस्तेमाल किए जाएंगे, वो अगले 2 से 3 दिनों में भारतीय बंदरगाहों पर आ जाएंगे और रिपोर्ट में कहा गया है कि, जनवरी 2020 के बाद भारत ने पहली बार रूस से कोयले के आयात में इतना भारी इजाफा किया है। आपको बता दें कि, भारत वस्तुओं से लेकर हथियारों तक रूसी सामानों का प्रमुख खरीदार है। और भारत ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमले के बाद रूस की अभी तक निंदा नहीं की है और यूनाइटेड नेशंस में भी भारत ने वोट करने से परहेज किया है।

    दूसरा सबसे बड़ा खरीददार भारत

    दूसरा सबसे बड़ा खरीददार भारत

    हाल ही में, भारत ने यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रमण की निंदा करने वाले एक प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग नहीं लिया था और भारत ने फिर दोहराया था कि मतभेदों को केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है। यूएनजीए का प्रस्ताव पिछले महीने 15 देशों की सुरक्षा परिषद में परिचालित प्रस्ताव जैसा ही था, जिस पर भारत ने भी परहेज किया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव, जिसके पक्ष में 11 वोट मिले और तीन अनुपस्थित रहे, स्थायी सदस्य रूस द्वारा अपने वीटो का प्रयोग करने के बाद अवरुद्ध कर दिया गया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कोयला खरीददार देश है और पहले नंबर पर चीन है। वहीं, रूस से कोयला खरीदने वाले देशों में भारत 6वें नंबर पर है, लेकिन ऐसी रिपोर्ट है, कि कच्चे तेल की तरफ रूस की कोलया कंपनियां, भारक को काफी सस्ते कीमत पर कोयला बेचने की पेशकश करने वाला है, क्योंकि यूरोपीय देशों की प्रतिबंधों की वजह से रूसी कंपनियों पर गहरा असर पड़ा है।

    विश्व के सबसे बड़े कोयला उत्पादक देश

    विश्व के सबसे बड़े कोयला उत्पादक देश

    आपको बता दें कि, विश्व में सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश इंडोनेशिया है, जो हर साल 455 मिलियन टन कोयले का निर्यात करता है और इंडोनेशिया के बाद कोयले का सबसे बड़ा व्यापारी देश ऑस्ट्रेलिया है, जो 393 मिलियन डॉलर कोयले का निर्यात करता है और ऑस्ट्रेलिया के बाद तीसरे नंबर पर रूसी कोयले का स्थान है, जो हर साल 217 मिलियन टन कोयले का निर्यात करता है और फिर अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका का स्थान है। वहीं, चीन विश्व में सबसे ज्यादा कोयला खरीदने वाला देश है, जो हर साल 298 मिलियन टन कोयले का आयात करता है, जबकि भारत का स्थान दूसरा है और भारत हर साल 247 मिलियन टन कोयले का आयात करता है, फिर जापान और दक्षिण कोरिया का स्थान है। आपको बता दें कि, भारत में स्टील उद्योग का कारोबार काफी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है और साल 2013-14 के मुकाबले भारतीय स्टील उद्योग के कारोबार में साल 2021-22 में 152 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, लिहाजा भारत को भारी संख्या में कोयले की जरूरत होती है।

    तेल आयात पर भी सख्त है भारत

    तेल आयात पर भी सख्त है भारत

    आपको बता दें कि, कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पश्चिमी देशों के निशाने पर है, लेकिन भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि, ''वैध ऊर्जा लेनदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए''। भारत की तरफ से पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि, "तेल आत्मनिर्भरता वाले देश या रूस से खुद तेल आयात करने वाले लोग विश्वसनीय रूप से प्रतिबंधात्मक व्यापार की वकालत नहीं कर सकते हैं''। भारत का इशारा साफ तौर पर ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस की तरफ है, जो पिछले कई दशकों से रूस से तेल खरीद रहे हैं और यूक्रेन संकट के बाद भी रूस से तेल और गैस खरीदने पर प्रतिबंध लगा नहीं पाए हैं। जर्मनी ने तो रूस से तेल खरीदने पर बैन लगाने से साफ हाथ उठा दिए हैं, तो ब्रिटेन की तरफ से अभी तक विचार ही किए जा रहे हैं।

    पश्चिमी देशों को दो-टूक प्रतिक्रिया

    पश्चिमी देशों को दो-टूक प्रतिक्रिया

    भारत की तीखी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब भारत की शीर्ष तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने 30 लाख बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदा है, जिसे रूस ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय दरों पर भारी छूट के साथ भारत को दिया है। 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद ये पहला मौका था, जब भारत ने रूस के साथ कोई व्यापारिक लेन-देन किया हो और जब पुतिन को 'अलग-थलग' करने के लिए पश्चिमी देश लगातार हाथ-पैर मार रहे हैं और भारत के न्यूट्रल रहने को लेकर भी अमेरिकी और ब्रिटिश सांसदों के लगातार बयान सामने आ रहे हैं। आपको बता दें कि, शुक्रवार को फाइनेंशिय टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, दुनिया में तेल की तीसरा सबसे बड़ा आयातक देश भारत, मार्च में रूसी तेल का चौथा सबसे बड़ा उपभोक्ता बन जाएगा।

    ऊर्जा के लिए दुनिया पर भारत निर्भर

    ऊर्जा के लिए दुनिया पर भारत निर्भर

    आपको बता दें कि, भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। भारत सरकार के एक सूत्र ने कहा कि, 'कच्चे तेल की हमारी जरूरत का करीब 85 फीसदी (5 मिलियन बैरल प्रतिदिन) आयात करना पड़ता है।' वहीं, आपको बता दें कि, अकसर 'तेल' को लेकर भारत के साथ राजनीति की जाती रही है और कई बार तेल आयात को लेकर भारत को 'ब्लैकमेल' करने की भी कोशिश की जाती रही है। भारत अपनी जरूरतों का ज्यादातर तेल आयात पश्चिम एशिया (इराक 23%, सऊदी अरब 18%, संयुक्त अरब अमीरात 11%) से करता है। अमेरिका भी अब भारत (7.3%) के लिए कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। चालू वर्ष में अमेरिका से आयात में काफी वृद्धि होने की संभावना है, संभवत: लगभग 11% और इसकी बाजार हिस्सेदारी 8% होगी।

    ‘भारत देख रहा है अपना हित’

    ‘भारत देख रहा है अपना हित’

    सूत्र ने बताया कि, ''रूस पर हालिया समय में लगाए गये प्रतिबंधों ने रूस को डिस्काउंट पर तेल आयात करने के लिए 'मजबूर' किया है, लेकिन अभी तक भी रूसी तेल कंपनियों को, जब यूरोपीय संघ के चैनल 'स्विफ्ट' से भुगतान लेते हैं, उन्हें अभी तक भी 'स्विफ्ट' से बाहर नहीं किया गया है''। यानि, आप पश्चिमी देशों का दोमुंहा रवैया को समझ सकते हैं, कि अपने स्वार्थ के लिए पश्चिमी देशों को लिए अभी भी कोई 'दीन-ईमान' नहीं है। सूत्र ने बताया कि, "भारत को प्रतिस्पर्धी ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करते रहना होगा। हम सभी तेल उत्पादक कंपनियों के ऐसे प्रस्तावों का स्वागत करते हैं। भारतीय व्यापारी भी सर्वोत्तम विकल्प तलाशने के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों में काम करते हैं''।

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