ISIS का फाइव ईयर प्लान- पूरे भारत पर करना है कब्जा
बगदाद/नई दिल्ली। इराक पर आईएसआईएस का साया लगातार गहराता नजर आ रहा है। इराक के कई प्रमुख शहरों पर कब्जा कर चुका यह आतंकी संगठन भारत, म्यानमार, होते हुए ऑस्ट्रेलिया की ओर बढ़ रहा है। जी हां आईएसआईएस ने अपनी पंचवर्षीय योजना रिलीज की है जिसमें विश्व के नक्शे पर उन देशें को दर्शाया है, जहां पर उन्हें कब्जा करना है उनमें भारत भी शामिल है।
सुन्नियों के इस इस्लामिक समूह ने, इराक पर यह हमला सिर्फ शिया समुदाय को दबाने के लिए ही नहीं किया, बल्कि यह हमला जेहादी विचारधारा के फैलाव की ओर भी इंगित कर रहा है। आईएसआईएस के इराक पर इस हमले से ही इसकी मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है। और यह सिर्फ इराक ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
आईएसआईएस ने अपनी जेहादी विचारधारा के प्रचार प्रसार के साथ हर देश के लिए विभिन्न युक्तियों और नीतियों को बना रखा है। लिहाजा, यह हमला कहीं न कहीं विश्व पटल पर जेहादी विचारधारा के लिए गंभीर स्थिति बनाती नजर आ रही है। खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए यह एक खतरनाक हालात पैदा कर सकती है। इनकी संख्या में लगातार हो रही वृद्धि और इनके नापाक़ इरादों को देखते हुए, इस आतंकवादी समूह को नजरअंदाज करना नासमझी होगी।
पांच सालों में होगा विस्तार
हाल ही में इस आतंकी संगठन ने अपने प्लान के मुताबिक अगले पांच सालों में किए जाने वाले क्षेत्रीय विस्तार से संबंधित जानकारियों को रिलीज किया है। जिसके अनुसार अफ्रीका का शीर्ष आधा भाग, इजरायल समेत पूरा मध्य पूर्व, तुर्की, भारत, बांग्लादेश और इंडोनेशिया का पूर्वी भाग इनके प्लान में शामिल है।
आईएसआईएस से जुड़े कुछ तथ्य-

विश्व के नक्शे पर ISIS
दुनिया के नक्शे पर कहां-कहां आईएसआईएस कब्जा करने का प्लान बना रहा है, उसे इस नक्शे में दर्शाया गया है।

अल कायदा इन इराक
आईएसआईएस को इराक में "अल कायदा इन इराक" के नाम से जाना जाता है। फरवरी 2014 में अल कायदा ने आईएसआईएस से सारे संबंध तोड़ दिए थे। और उसके बाद से लगातार आईएसआईएस और अलकायदा के बीच इस्लामिक समूहों पर प्रभाव डालने की स्पर्धा जारी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस रेस में कुछ वर्षों के बाद आईएसआईएस अल कायदा को पीछे छोड़ देगा।

इराक प्रधानमंत्री की भूल
इराक प्रधानमंत्री नूरी-अल-मालिकी एक शिया मुस्लम हैं। इराक में उन्होंने शिया समूह के उत्थान पर पूरा ध्यान केन्द्रीत कर सुन्नियों को काफी पीछे छोड़ दिया।लिहाजा, इस अन्याय की वजह से सुन्नी समूह आईएसआईएस में आसानी के साथ सम्मलित होते गए।

सीरिया
सीरिया में फैली अव्यव्स्था आईएसआईएस के तेजी से फैलने की एक बड़ी वजह है। सीरिया में अपना गढ़ मजबूत करने के बाद आईएसआईएस आतंकियों के लिए इराक पर कब्जा हासिल करने का राह आस़ान बनता गया।

विदेशी सहायता पर निर्भर नहीं
आईएसआईएस दूसरे आतंकी समूहों की तरह सिर्फ विदेशी सहायता पर निर्भर नहीं हैं। बल्कि इनके फंड का मुख्य भाग सीरिया में जब्त किया तेल है। वे वहां से बिजली और तेल का सप्लाई कर बड़ी मात्रा में फंड का जुगाड़ कर लेते हैं। लिहाजा, इसी वजह से यह इस्लामिक संगठन इराक के तेल पर भी जल्द कब्जा हथियाने के प्लान में है।

सिर्फ सरकार विरोधी नहीं
कई विशेषज्ञ इसे सिर्फ सरकार विरोधी इस्लामिक संगठन मानते हैं। जबकि सिर्फ यह एक सरकार विद्रोही न होकर, वैश्विक तौर पर जेहदी विचारधारा का प्रचार करती है।

इरान का साथ
इराक की तरह इरान भी शिया बहुल देश है। लिहाजा, वह नहीं चाहती कि इराक पर आईएसआईएस का कब्जा हो। आईएसआईएस के खिलाफ इस युद्ध में इरान ने इराक में अपने 500 विशेष लड़ाकों को भेजा है।

इरान और अमेरिका की बातचीत
इरान और अमेरिका में कई मुद्दों पर विवाद है। जैसे की मध्य पूर्व से संबंधित मुद्दे, इरान परमाणु योजना, सीरिया और इजरायल के मुद्दे। लेकिन फिर भी इराक मामले में दोनों विरोधी एक हैं। और इराक से आईएसआईएस का खात्मा होने की ख्वाहिश रखते हैं।

अमेरिका है वजह
कई विशेषज्ञ इस पूरे मामले की वजह अमेरिका को भी बताते हैं। अगर बराक ओबामा ने समय रहते इस मामले में हस्पक्षेप किया होता, तो यह युद्ध यहां तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो चुका होता। अमेरिका आईएसआईएस पर हमला कर इस युद्ध में रूकावट डालने में सक्षम था, लेकिन ओबामा की ओर से इस मामले में देर की जा रही है।
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