भारत-पाकिस्तान ने स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाएं देने का सिलसिला तोड़ा

Indian-Pakistan News: भारत और पाकिस्तान के नेताओं ने अपने-अपने स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाओं के आदान-प्रदान की परंपरा को इस बार तोड़ दिया है, और इस बार ना ही भारत ने पाकिस्तान को और ना ही पाकिस्तान ने भारत को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी है, जो दोनों परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों के बीच संबंधों की बिगड़ती स्थिति को दर्शाता है।

पाकिस्तान ने सोमवार को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया जबकि भारत ने मंगलवार को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया। हालांकि, दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं ने 14 और 15 अगस्त को मिठाइयों का आदान-प्रदान किया, लेकिन सरकारी स्तर पर पत्रों के आदान-प्रदान की प्रथा बंद कर दी गई।

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भारत-पाकिस्तान में बिगड़ते संबंध

आखिरी बार दोनों देशों ने मार्च 2021 में पाकिस्तान दिवस पर पत्रों का आदान-प्रदान किया था, जब भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तत्कालीन पाकिस्तानी समकक्ष इमरान खान को पत्र लिखकर "पाकिस्तान के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध" की मांग की थी।

हालांकि, भारत की तरफ से जहां शांति और सौहार्दपूर्ण संबंध की बात की गई थी, वहीं इमरान खान ने अपनी आदतों के मुताबिक, उल्टा-पुल्टा जवाब दिया था, जिसके बाद से भारत ने पाकिस्तान को बधाई संदेश भेजना बंद कर दिया।

साल 2021 में भारतीय प्रधानमंत्री ने उस वक्त पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को पत्र भेजा था, जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा पर फिर से सीजफायर की घोषणा की गई थी और दोनों ही देशों की सेना, युद्धविराम के लिए सहमत हो गई थी। उसके बाद से एक-दो मौकों को छोड़ दिया जाए, तो अभी तक भारत और पाकिस्तान के सैनिकों के बीच गोलीबारी नहीं की गई है।

जबकि, इससे पहले लगातार भारतीय प्रधानमंत्रियों की तरफ से पाकिस्तान को शुभकामनाएं संदेश दी जाती थीं और पाकिस्तान के नेता इसका जवाब दिया करते थे।

लेकिन, बाद में इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिसके बाद से भारत ने पाकिस्तान को मुंह लगाना बंद कर दिया। ऑब्जर्वर्स का मानना है, कि यह दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में अगस्त 2019 में गिरावट देखी गई, जब भारत ने जम्मू और कश्मीर क्षेत्र की विशेष स्थिति को रद्द कर दिया था। पाकिस्तान ने भारत के कदम की प्रतिक्रिया में भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम कर दिया। इसने द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित कर दिया और कश्मीर पर एकतरफा भारतीय कदम का विरोध करने के लिए खूब हाथ-पैर मारे।

वहीं, दोनों देशों ने अपने संबंधों में कुछ सामान्यता लाने का प्रयास उस वक्त किया, जब दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों ने 2020 के अंत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कई बैठकें कीं और उन बैठकों की वजह से युद्धविराम का नवीनीकरण हुआ, जो अभी भी बरकरार है।

हालांकि, उस वक्त के पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा भारत के साथ डिप्लोमेटिक संबंधों की बहाली के साथ साथ व्यापारिक संबंधों को शुरू करना चाहते थे, लेकिन इमरान खान ने ऐसा नहीं होने दिया। कई पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया था, कि अप्रैल 2021 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा की प्लानिंग भी की जा रही थी, लेकिन इमरान खान ने वोट बैंक खोने के डर से ऐसा नहीं होने दिया।

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