खत्म नहीं हुई हैं भारत की एनएसजी सदस्य बनने की उम्मीदें

नई दिल्‍ली। न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में जब भारत को शामिल नहीं किया गया, तो करोड़ों भारतीय निराश हो गये। भारत सरकार को भी बड़ा झटका लगा क्योंकि बिजली बनाने की तमाम परियोजनाएं इसी पर निर्भर हैं। खैर आपको बताना चाहेंगे कि एनएसजी में भारत की सदस्यता के रास्ते अभी पूरी तरह नहीं बंद हुए हैं। इस साल के अंत तक एक और बैठक होगी, जिसमें भारत की सदस्‍यता पर चर्चा होगी।

Narendra Modi

बात शुरू करते हैं उस वाक्‍ये से जब मीडिया ने भारत के विदेश सचिव विकास स्वरूप से पूछा- एनएसजी के सारे रास्‍ते बंद हो गये, अब भारत क्‍या करेगा? स्वरूप ने सीधे कहा, "कृपया मत कहिये कि भारत के सारे रास्ते बंद हो गये हैं। यह भी कहना गलत है कि भारत के सारे प्रयास विफल रहे।" इस बात से साफ हो गया कि मोदी सरकार ऐसे ही पीछे नहीं हटने वाली।

पढ़ें- क्या है एनएसजी

चीन ने तमाम रोढ़े अटकाये, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भारत को एनएसजी पर पूर्ण समर्थन हासिल नहीं हो सका। विरोधी देशों का एक ही तर्क था कि चूंकि भारत ने एनपीटी पर हस्‍ताक्षर नहीं किये हैं, इसलिये उसे एनएसजी सदस्‍य नहीं बनाया जा सकता है।

अब मौका फिर मिलेगा, जब साल के अंत में उन देशों को एनएसजी की सदस्‍यता दिये जाने पर चर्चा होगी जिन्‍होंने एनपीटी पर हस्‍ताक्षर नहीं किये हैं। खास बात यह है कि भारत पहले ही एनपीटी की सभी शर्तों को पूरा करता है। ऐसे में एनपीटी पर हस्‍ताक्षर करे न करे, अगर गैर-एनपीटी देशों को एनएसजी सदस्यता देने पर चर्चा हुई तो भारत को वरीयता मिलना संभव है।

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