धीरे-धीरे यूरोप की तरफ खिसक रहा भारत, नया टेक्टोनिक प्लेट नक्शा देख टेंशन में वैज्ञानिक
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जिगशॉ पजल की तरह जुड़े हैं महाद्वीप
दरअसल ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेड में डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंसेस के लेक्चरर डॉ. डेरिक हैस्टरॉक अपने साथियों के साथ पृथ्वी की बनावट में हो रहे परिवर्तन का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने टेक्टोनिक प्लेटों का नया नक्शा बनाते हुए प्लेटों की बाउंड्री जोन और पुराने महाद्वीपीय क्रस्ट के ढांचे के निर्माण की तुलना की। जिसमें पता चला कि सभी महाद्वीप जिगशॉ पजल (संरचनाओं को जोड़ने वाला खेल) की तरह जुड़े हुए हैं।

यूरोप की तरफ खिसक रहा भारत
स्टडी के मुताबिक जिस तरह आप जिगशॉ पजल को जोड़कर फिर उसे तोड़े देते हैं। फिर उसे दोबारा जोड़ देते हैं, उसी तरह महाद्वीप भी आपस में जुड़ते-टूटते रहते हैं। डॉ. डेरिक ने अपनी स्टडी में यही पता लगाने की कोशिश की। नए नक्शे से पता चलता है कि भारत यूरोप की तरफ खिसक रहा है। इसके अलावा इंडियन प्लेट और ऑस्ट्रेलियन प्लेट के बीच माइक्रोप्लेट को नक्शे में शामिल किया गया।

तीन नए मॉडल बनाए
डॉ. डेरिक के मुताबिक उन्होंने अपनी स्टडी में तीन नए जियोलॉजिकल मॉडल्स बनाए हैं। जिसमें पहला प्लेट मॉडल, दूसरा प्रोविंस मॉडल और तीसरा ओरोगेनी मॉडल है। इसमें सबसे ज्यादा खास ओरोगेनी मॉडल है, जिसमें पहाड़ों के बनने की प्रक्रिया शामिल है। डॉ. हेस्टरोक ने कहा कि इसमें 26 ओरोगेनीस हैं, जो क्रस्ट (भूपर्पटी) के मूवमेंट या फिर प्लेटों के टकराने से बनी है।

2003 के बाद नहीं अपडेट हुआ नक्शा
उन्होंने आगे कहा कि टेक्टोनिक प्लेटों का नक्शा भूकंपीय गतिविधियों पर बना था, लेकिन उसे 2003 के बाद से अपडेट नहीं किया गया। अब उन्होंने जो नया नक्शा बनाया है, जिसमें उन्होंने माइक्रोप्लेट्स को भी शामिल किया। इस नक्शे के अध्ययन के बाद उनको सबसे ज्यादा बदलाव पश्चिमी-उत्तर अमेरिका के प्लेट्स में देखने को मिला है। इसके बाद मध्य एशिया में बदलवा मिला। भूवैज्ञानिकों को भारत के उत्तर में एक डिफॉर्मेशन जोन देखने को मिला, लेकिन वो ये नहीं बता पाए कि भारत के लगातार खिसकने का क्या प्रभाव पड़ेगा?












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