हिंद महासागर में 'हिन्दुओं के दूसरे घर' में भारत ने किया हवाई अड्डे का उद्घाटन.. तमतमाया मालदीव में घुसा चीन
India-Mauritius Agaléga airstrip: इस हफ्ते की शुरूआत से मालदीव में तैनात भारत के सैनिक वापस लौटने लगे हैं, जबकि भारत से टेक्निकल कर्मियों की टीम भारतीय सैनिकों की जगह लेने मालदीव पहुंच चुके हैं। भारतीय सैनिकों की मालदीव से वापसी के लिए 10 मार्च डेडलाइन है।
लेकिन, इस बीच प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधान मंत्री प्रविंद जुगनौथ ने संयुक्त रूप से एक हवाई पट्टी और एक जेटी का उद्घाटन किया, जिसे भारत ने पोर्ट लुइस के उत्तर में 1,100 किमी और माले से 2,500 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित अगालेगा पर बनाया है।

मॉरीशस, जिसे हिंद महासागर में हिन्दुओं का दूसरा घर कहा जाता है, वो भारत के लिए बहुत ज्यादा रणनीतिक महत्व रखता है। खासकर उस वक्त, जब मालदीव चीन की गोद में जा बैठा है, उस वक्त हिंद महासागर में चीन की उपस्थिति और उसकी आक्रामकता पर लगाम लगाने में मॉरीशस काफी अहम भूमिका निभा सकता है।
मालदीव से बिगड़े भारत के संबंध
नवंबर 2023 में सत्ता में आने के तुरंत बाद, मालदीव के चीन समर्थक राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से अपने सैन्य कर्मियों को देश से वापस बुलाने का अनुरोध किया। मुइज्जू ने राष्ट्रपति चुनाव में "इंडिया आउट" मुद्दे पर इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को चुनाव में हरा दिया था।
सोमवार देर रात, मालदीव के रक्षा मंत्रालय ने कहा, कि भारतीय नागरिकों की पहली टीम आ गई है, जो देश के सबसे दक्षिणी एटोल अड्डू में एक हेलीकॉप्टर के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। दोनों देश 2 फरवरी को इस बात पर सहमत हुए थे, कि भारत 10 मार्च से 10 मई के बीच मालदीव में तैनात 80 से ज्यादा सैन्यकर्मियों को वापस बुला लेगा।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था, कि मालदीव में दो हेलीकॉप्टर और एक डोर्नियर विमान का संचालन "सक्षम भारतीय तकनीकी कर्मियों" द्वारा किया जाएगा जो "वर्तमान कर्मियों" की जगह लेंगे।

मॉरीशस से चीन को काउंटर
मार्च 2015 में प्रधान मंत्री मोदी की मॉरीशस यात्रा के बाद, भारत ने अगालेगा द्वीप पर "समुद्र और हवाई परिवहन सुविधाओं में सुधार" के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसको लेकर चीनी मीडिया का आरोप है, कि भारत वहां सैन्य अड्डा बना रहा है, लेकिन भारत ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है।
मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुइस में प्रधानमंत्री मोदी और मॉरीशस के तत्कालीन प्रधान मंत्री अनिरुद्ध जुगनौथ की मौजूदगी में साइन किए गये समझौता ज्ञापन में, मॉरीशस के बाहरी द्वीप पर समुद्री और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार के लिए बुनियादी ढांचे की स्थापना और उसे अपग्रेड करने का प्रावधान किया गया था।
इस समझौते का मकसद ये भी है, कि भारत को मॉरीशस की सेना को एडवांस बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि वो अपनी समुद्री जरूरतों को पूरा कर सके।
गुरुवार को नई हवाई पट्टी और जेटी के उद्घाटन पर, प्रधान मंत्री जुगनौथ ने याद किया, कि 2003 के बाद से 70 वर्ग किलोमीटर के द्वीप पर हवाई पट्टी को अपग्रेड करने के कई प्रयास सफल नहीं हुए थे। उन्होंने कहा, कि भारत उनके देश की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है, और मॉरीशस के अंदर और बाहर, बीमार मानसिकता वाले लोगों ने भारत को बदनाम करने की कोशिश की है, इसलिए ऐसे तत्वों की निंदा की जानी चाहिए।

प्रधान मंत्री जुगनौथ ने कहा, कि "मार्च 2015 का एमओयू (हवाई पट्टी और सेट जेम्स जेटी को अपग्रेड करने के लिए) आपसी लाभ के सिद्धांतों को संतुष्ट करते हुए मॉरीशस को उसके विकास लक्ष्यों को पूरा करने में लगातार सहायता करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
दरअसल, मॉरीशस के अंदर भी कई आलोचकों का कहना है, कि अगालेगा द्वीप पर भारत द्वारा हवाई पट्टी का निर्माण करना, मॉरीशस की संप्रभुता का उल्लंघन है। लेकिन, ऐसे लोगों को फटकार लगाते हुए मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने कहा, कि "मॉरीशस के लिए अगालेगा द्वीपों पर अपनी संप्रभुता छोड़ने का कभी कोई एजेंडा नहीं रहा है, जैसा कि मॉरीशस के अंदर और बाहर कुछ बीमार मानसिकता वाले लोगों ने विश्वास दिलाने की कोशिश की है। इसी तरह, अगालेगा को सैन्य अड्डे में बदलने का भी कभी कोई एजेंडा नहीं रहा है... जैसा की मॉरीशस में कुछ लोगों ने टिप्पणी की है, लेकिन मैं भारत को कोसने वाले किसी भी अभियान की जोरदार निंदा करना चाहता हूं।"
प्रधान मंत्री जुगनुथ ने कहा, कि भारत की उपस्थिति से मॉरीशस के विशाल 23 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र की और ज्यादा प्रभावी निगरानी हो सकेगी और अब हम समुद्री डकैती, आतंकवाद, नशीले पदार्थों और मानव तस्करी और अवैध और अनियमित मछली पकड़ने से बेहतर ढंग से निपट सकेंगे।
हिंद महासागर में भारत बनाम चीन
चीन, हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी शक्तिशाली उपस्थिति को बहुत मूल्यवान समझता है। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में समुद्री सुरक्षा विश्लेषक दर्शन एम बरुआ ने अप्रैल 2023 में यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेस की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी को एक गवाही में कहा था, कि "चीन के शीर्ष 10 कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में से नौ हिंद महासागर से होकर गुजरते हैं... जो अफ्रीका, मध्य पूर्व, द्वीप देशों और विशाल महासागर के तटवर्ती इलाकों के साथ संबंधों के लिए चीन के लिए ट्रांजिट रूट का प्राथमिक माध्यम भी है।"
बरुआ ने कहा, कि हिंद महासागर "चीन और यूरोप के बीच मुख्य व्यापारिक मार्ग भी है" और "जैसा कि इतिहास हमें बताएगा, जिसका वर्चस्व रहेगा, उसका व्यापार पर नियंत्रण होगा और इसमें कोई शक नहीं, कि हिंद महासागर में चीन की दिलचस्पी लगातार बढ़ती रहेगी।"
बरुआ ने कहा कि "चीन एकमात्र ऐसा देश है, जिसके पास हिंद महासागर के छह द्वीपों - श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स, मेडागास्कर और कोमोरोस - में से प्रत्येक में एक दूतावास है" और बाकी के दूसरे खिलाड़ी चाहे वो भारत हो, अमेरिका, फ्रांस या फिर ब्रिटेन ही क्यों ना हों, इन सभी देशों में इनके दूतावास नहीं हैं।"
उन्होंने कहा, कि बीजिंग इस क्षेत्र में राजनयिक और व्यापार साझेदारी से आगे बढ़ गया है और साथ ही लगातार सैन्य उपस्थिति भी बनाए रखना शुरू कर दिया है।
2017 में, चीन ने हिंद महासागर में हॉर्न ऑफ अफ़्रीका पर जिबूती में अपनी पहली विदेशी सैन्य सुविधा की स्थापना की और विश्लेषकों का मानना है, कि हिंद महासागर में दूसरी चीनी सैन्य सुविधा स्थापित होने में भी अब सिर्फ वक्त की ही बात है, चाहे वह पाकिस्तान, म्यांमार या पश्चिमी हिंद महासागर में हो।
चीन की आक्रामकता पर नई दिल्ली की सोच क्या है?
भारत इन सभी द्वीप देशों की सरकारों के साथ काम करने की तात्कालिकता और महत्व को देखता है। इन देशों की घरेलू राजनीति अक्सर विदेशों में उनके व्यवहार और नीतियों को प्रभावित करती है - और भारत को क्षेत्र में अपने रणनीतिक हितों को लगातार आगे बढ़ाते हुए अपने राजनयिक संबंधों को अच्छी तरह से प्रबंधित करना होगा।
मॉरीशस में प्रविंद जुगनौथ की सरकार, अब तक मालदीव में सोलिह सरकार की तुलना में भारत की मौजूदगी की घरेलू आलोचना को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में सक्षम रही है।
नई दिल्ली माले की स्थिति पर पैनी नजर रख रही है। मालदीव के भारत समर्थक पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद, जो हाल ही में विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष चुने गए हैं, उन्होंने शनिवार को कहा, कि राष्ट्रपति मुइज्जू ने हजारों भारतीय सैन्य कर्मियों के बारे में झूठा दावा किया था और मालदीव में कोई विदेशी सशस्त्र सैनिक नहीं है।
लेकिन, हकीकत ये है कि अब मालदीव में चीन समर्थित सरकार है और चीन आने वाले दिनों में मालदीव में और आक्रामकता बढ़ाएगा, जो निश्चित तौर पर भारत के लिए सिरदर्द साबित होगा, लेकिन मॉरीशस से भारत चीन को चुनौती देने में सक्षम साबित हो रहा है।
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