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भारत के साथ भारतीय रुपये में व्यापार करेगा मलेशिया, जानें कैसे बढ़ रहा इंडियन करेंसी का कद?

जैसे-जैसे भारत दुनिया की शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं की फेहरिस्त में आगे बढ़ रहा है, ठीक वैसे वैसे भारतीय रुपया भी ताकतवर बनता जा रहा है और 18 देशों के साथ रुपये में कारोबार को लेकर बात चल रही है।

India-Malaysia to Trade in Indian Rupee

India-Malaysia to Trade in Indian Rupee: भारतीय विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा है, कि भारत और मलेशिया अब अन्य मुद्राओं के अलावा व्यापार को व्यवस्थित करने के लिए भारतीय रुपये का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और इस संबंधित सारे तंत्रों पर काम पूरा कर लिया गया है। भारतीय रुपये में व्यापार को लेकर ये बहुत बड़ी घोषणा है, क्योंकि भारत के साथ अब तक 18 देश रुपये में कारोबार करने के लिए तैयार हो गये हैं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, रूस और सऊदी अरब जैसे देश भी शामिल हैं। लिहाजा, इस लिस्ट में एक और देश का शामिल होना बताता है, कि भारतीय रुपये का कद कैसे दिनों-दिन बड़ा होता जा रहा है।

रुपये में भारत-मलेशिया में व्यापार

भारत और मलेशिया की तरफ से भारतीय रुपये में व्यापार करने की क्षमता को विकसित करने की घोषणा की गई है। आपको बता दें, कि भारतीय मुद्रा में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के निपटान की अनुमति देने की घोषणा पिछले साल जुलाई में भारतीय रिजर्व बैंक ने किया था। रिजर्व बैंक ने ये कदम इसलिए उठाया था, ताकि डॉलर के ऊपर भारत की निर्भरता को कम से कम किया जा सके और डॉलर में आने वाले उतार चढ़ाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम प्रभाव पड़ सके। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "अन्य मुद्राओं में निपटान के मौजूदा तरीकों के अलावा भारत और मलेशिया के बीच व्यापार अब भारतीय रुपये (आईएनआर) में तय किया जा सकता है।" MEA ने कहा, कि RBI की पहल का उद्देश्य व्यापार के विकास को सुविधाजनक बनाना और भारतीय रुपये में वैश्विक व्यापारिक समुदाय के हितों का समर्थन करना है। आपको बता दें, कि कुआलालंपुर में स्थित इंडिया इंटरनेशनल बैंक ऑफ मलेशिया (IIBM) ने भारत में अपने संबंधित बैंक यूनियन, बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से एक विशेष रुपया वोस्ट्रो खाता खोला है और अब इसी अकाउंट के जरिए व्यापार का संचालन किया जाएगा।

भारतीय रुपये का बढ़ता दबदबा

आपको बता दें, कि पिछले महीने फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया था, कि आयात और निर्यात के लिए रुपया-दिरहम में व्यापार को व्यवस्थित करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ चर्चा चल रही है। जल्द ही दोनों देशों के शीर्ष नेता रुपया-दिरहम में व्यापार शुरू करने की घोषणा कर सकते हैं। आपको बता दें, कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच के संबंध हालिया वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं और अगले एक से दो सालों में दोनों देशों के बीच का आपसी व्यापार 100 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। भारतीय अधिकारी ने कहा था, कि भारत यूएई से बड़ी मात्रा में आयात-निर्यात करता है, और खाड़ी देशों से भी काफी धन प्राप्त करता है। अधिकारी ने कहा, कि "अमेरिकी डॉलर या यूरो जैसी किसी तीसरे देश की मुद्रा में के बजाय स्थानीय मुद्रा में लेनदेन करना बहुत आसान हो गया है।"

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    18 देश भारतीय करेंसी में व्यापार को तैयार

    पिछले महीने ही भारत के वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड ने कहा था, कि आरबीआई ने "घरेलू और विदेशी एडी (अधिकृत डीलर) बैंकों को 60 मामलों में 18 देशों के बैंकों के एसआरवीए खोलने के लिए" भारतीय रुपये में भुगतान करने के लिए मंजूरी दे दी है। जिन 18 देशों को भारतीय रुपये में व्यापार करने की अनुमति दी गई है वे हैं, रूस, सिंगापुर, श्रीलंका, बोत्सवाना, फिजी, जर्मनी, गुयाना, इजराइल, केन्या, मलेशिया, मॉरीशस, म्यांमार, न्यूजीलैंड, ओमान, सेशेल्स, तंजानिया, युगांडा और यूनाइटेड किंगडम। रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है, कि "इन देशों के साथ हमारी अपनी मुद्राओं में व्यापार करने के लिए एक द्विपक्षीय शुरुआत की गई है और समय के साथ इसकी मात्रा तेजी से बढ़ेगी।" अगर भारत ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ स्थानीय करेंसी में व्यापार करता है, तो डॉलर का प्रभाव भी रुपये पर उतना कम होगा। इसके साथ ही, डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में सामानों की कीमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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