फ्रांस से करीब 30 और राफेल विमान खरीदेगा भारत, इंडियन नेवी में होगी तैनाती, PM मोदी की यात्रा में होगी डील
PM Modi in France: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की राजकीय यात्रा के दौरान अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर करने के बाद, भारत को अब राफेल लड़ाकू जेट के नौसैनिक/समुद्री वेरिएंट की खरीद के लिए फ्रांस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले हफ्ते फ्रांस की यात्रा से पहले रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में अंतिम फैसला होने की संभावना है। पीएम मोदी 13-14 जुलाई को बैस्टिल डे परेड में सम्मानित अतिथि के रूप में फ्रांस की यात्रा पर होंगे।

इंडियन नेवी की बढ़ेगी ताकत
अपनी यात्रा के दौरान, प्रधान मंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच कई डिफेंस डील होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान भारत और फ्रांस के बीच ज्वाइंट डिफेंस प्लेटफॉर्म पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, मोदी सरकार फ्रांस से इंडियन नेवी के लिए रफाल विमान के समुद्री वेरिएंट की खरीददारी के लिए समझौता कर सकती है। इसके अलावा, भारत और फ्रांस के बीच अरबों डॉलर की डिफेंस डील होने की संभावना है।
माना जा रहा है, कि भारत सरकार फ्रांस को करीब 24 से 30 राफेल-मरीन जेट विमानों का ऑर्डर दे सकती है। इससे पहले रिपोर्ट थी, कि अमेरिका के एफ-18 सुपर हॉर्नेट विमान को लेकर भी बातचीत की गई थी, लेकन इंडियन नेवी ने राफेल विमान को लेकर अपनी पसंद जाहिर की है। हालांकि, फ्रांस के साथ नेवी राफेल की डील की कीमत क्या होगी, इसकी फिलहाल जानकारी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस राफेल विमानों को एयरक्राफ्ट कैरिय आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा।
इसके अलावा, भारत और फ्रांस के बीच न्यूक्लियर रिएक्टर और स्पेस सेक्टर में भी सहयोग को गहरा करने की डील होगी।
गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील
रिपोर्ट के मुताबिक, राफेल-एम विमान डील के लिए कोई ओपन टेंडर नहीं होगा, बल्कि ये सौदा सरकार से सरकार के बीच होगी। वक्त बचाने के लिए ऐसा किया जाएगा। इससे पहले भारतीय वायुसेना के लिए भी भारत और फ्रांस सरकार के बीच ऐसी ही डील की गई थी, जिसके तहत भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे थे।
फ्रांस और भारत के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए साल 2016 में राफेल विमान का सौदा हुआ था और सात सालों में फ्रांस ने भारत को सभी 36 राफेल विमानों की डिलीवरी दे दी थी।
भारतीय नौसेना अपने पुराने मिग-29K को बदलने के विकल्पों पर विचार कर रही है। इसके अलावा, भारत अपने एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए डबल-इंजन फाइटर जेट विमानों की तलाश कर रही है। वहीं, भारत की योजना, ट्विन-इंजन डेक-आधारित लड़ाकू विमान (TEDBF) विकसित करने की भी है, जिसके लिए काम चल रहा है, लिहाजा तब तक के लिए नौसेना कथित तौर पर अपनी विमानन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिग्रहण के साथ आगे बढ़ने का विकल्प चुन रही है।
राफेल ही क्यों खरीदेगी सरकार?
2022 के अंत तक फ्रांस ने सभी 36 राफेल फाइटर जेट भारत को सौंप दिए थे। राफेल विमान खरीदने का ही विकल्प काफी समझदारी से लिया गया फैसला है।
दरअसल, भारत सरकार ने इंडियन एयरफोर्स के लिए जो राफेल विमान खरीदे हैं और नेवी के लिए जिन राफेल विमानों का सौदा किया गया है, उन दोनों के 80 प्रतिशत से ज्यादा कंपोनेन्ट्स एक समान हैं। जिसकी वजह से मरम्मत और रखरखाव में काफी खर्च बच जाएगा। लिहाजा, अमेरिकी हॉर्नेट की जगह राफेल खरीदने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा, भारतीय वायु सेना पहले से ही भारत में दो बेस से 36 राफेल लड़ाकू जेट संचालित करती है। दोनों सेनाओं के लिए राफेल पायलट प्रशिक्षण भी एक हद तक सामान्य हो सकता है।












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