India Korea Summit 2026:'चिप्स से लेकर शिप्स' तक, पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच हुए ये 5 बड़े समझौते

India Korea Summit 2026: भारत और दक्षिण कोरिया के बीच हाल ही में हुई शिखर वार्ता ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग के बीच हुई इस मुलाकात में 'चिप्स से लेकर शिप्स' (Chips to Ships) तक के सफर पर सहमति बनी।

दोनों नेताओं ने व्यापार, तकनीक और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। सरकार के मुताबिक इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य आपसी व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर पर ले जाना और डिजिटल भविष्य की नींव रखना है।

India Korea Summit 2026

PM Modi President Lee Jae Myung Meet: व्यापार और निवेश का नया लक्ष्य

दोनों देशों ने आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए बड़ा लक्ष्य रखा है। वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 'इंडिया-कोरिया फाइनेंशियल फोरम' की शुरुआत की गई है। साथ ही, कोरियाई कंपनियों, विशेषकर छोटे उद्योगों (SMEs) को भारत में बढ़ावा देने के लिए खास 'कोरियाई इंडस्ट्रियल टाउनशिप' स्थापित की जाएंगी, जिससे निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

डिजिटल ब्रिज और आधुनिक तकनीक

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए 'इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज' लॉन्च किया गया है। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में दोनों देशों को करीब लाएगी। पीएम मोदी ने जोर दिया कि भारत की प्रतिभा और कोरिया की तकनीक मिलकर दुनिया के लिए बेहतरीन समाधान तैयार कर सकती है। इस सहयोग से भारत को 'सेमीकंडक्टर हब' बनाने के सपने को भी मजबूती मिलेगी।

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रक्षा और बुनियादी ढांचे में सहयोग

शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण), स्टील और पोर्ट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देश रक्षा क्षेत्र में भी अपनी साझेदारी को गहरा कर रहे हैं। राष्ट्रपति ली ने भारत को वैश्विक दक्षिण (Global South) का एक प्रमुख नेता बताया और कहा कि जहाज निर्माण और रणनीतिक उद्योगों में भारत-कोरिया की जोड़ी सबसे आदर्श साझेदार साबित हो सकती है, जिससे दोनों की समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी।

पर्यावरण और सौर ऊर्जा पर साथ

सतत विकास के लिए दक्षिण कोरिया अब 'इंटरनेशनल सोलर एलायंस' (ISA) में शामिल हो गया है। पर्यावरण की रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में यह एक बड़ा कदम है। दोनों नेताओं ने माना कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से लड़ने के लिए तकनीक और अनुभव साझा करना जरूरी है। भारत के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य में कोरिया एक महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरा है, जो हरित ऊर्जा में सहयोग करेगा।

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सांस्कृतिक और रचनात्मक जुड़ाव

सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि फिल्म, एनीमेशन और गेमिंग जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। 'कल्चरल और क्रिएटिव इंडस्ट्री' के जरिए लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाया जाएगा। पीएम मोदी ने रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियों को याद करते हुए कोरिया को 'पूर्व का दीप' बताया। वहीं राष्ट्रपति ली ने कहा कि भारत की जीवंत संस्कृति और कोरियाई तकनीक का मिलन आने वाली पीढ़ी के लिए नए अवसर पैदा करेगा।

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