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आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान की भारत ने बढ़ाई टेंशन, सिंधु घाटी जल संधि को लेकर भेजा नोटिस

सिंधु जल संधि दुनिया का इकलौता समझौता है, जिसे उदार समझौता कहा जाता है, क्योंकि इसमें भारत सिर्फ 20 प्रतिशत पानी लेने पर ही तैयार हो गया। हालांकि, भारत 20 प्रतिशत पानी भी नहीं लेता है।

Indus Water Treaty

Indus Water Treaty: आर्थिक बदहाली में फंसने के बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और अब उसने सिंधु घाटी जल संधि को लेकर गड़बड़ किया है। जिसके बाद भारत ने सितंबर 1960 की सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस जारी किया है। सूत्रों ने शुक्रवार को बताया है, भारत ने 25 जनवरी को पाकिस्तान को नोटिस भेजा है,और आईडब्ल्यूटी के अनुच्छेद XII (3) के अनुसार नोटिस दिया गया है।

भारत के नोटिस भेजने का मतलब

भारत के नोटिस भेजने का मतलब

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सूत्रों ने बताया है, कि "भारत हमेशा अक्षरशः IWT को लागू करने में एक दृढ़ समर्थक और एक जिम्मेदार भागीदार बना रहा है। हालांकि, पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने आईडब्ल्यूटी के प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है और भारत को आईडब्ल्यूटी में संशोधन के लिए एक उचित नोटिस जारी करने के लिए मजबूर किया है। यानि, भारत ने पाकिस्तान को अपनी गलतियों को सुधारने और सिंधु जल समझौते में किए गये उल्लंघन को सही करने के लिए 90 दिनों की मोहलत दी है

पाकिस्तान ने समझौते का क्या उल्लंघन किया?

पाकिस्तान ने समझौते का क्या उल्लंघन किया?

भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल समझौता हुआ था, जो इंडस-वाटर ट्रिटी के तौर पर प्रसिद्ध है। इस संधि में वर्ल्ड बैंक ने भी दस्तखत किए थे। सूत्रों के मुताबिक, 2015 में, पाकिस्तान ने भारत की किशनगंगा और रातले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स (एचईपी) पर अपनी तकनीकी आपत्तियों की जांच के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए अनुरोध किया था। लेकिन, साल 2016 में पाकिस्तान ने एकतरफा रूप से इस अनुरोध को वापस ले लिया और प्रस्तावित किया, कि एक मध्यस्थता अदालत उसकी आपत्तियों पर फैसला सुनाए। पाकिस्तान का ये प्रस्ताव आईडब्ल्यूटी के अनुच्छेद IX का गंभीर उल्लंघन है, लिहाजा भारत ने इस मामले को एक तटस्थ विशेषज्ञ के पास भेजने का अनुरोध किया। लेकिन, पिछले पांच सालों के दौरान, 2017 से 2022 के बीच भारत की तरफ से बार बार इस मुद्दे को उठाया गया और बीच का रास्ता निकलने की कोशिश की गई, लेकिन पाकिस्तान, इन पांच सालों में सिंधु आयोग की पांच बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा करने से ही इनकार करता रहा। लिहाजा, पाकिस्तान ने सिंधु घाटी समझौते का उल्लंघन किया है और भारत को नोटिस जारी करने के लिए मजबूर किया है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

भारतीय विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने ट्वीट करते हुए कहा है, कि भारत को इंडस वाटर ट्रिटी को ही सस्पेंड कर देना चाहिए। उन्होंने लिखा है, कि "अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत, भारत सिंधु जल संधि (IWT) को एकतरफा रूप से सस्पेंड कर सकता है और इसके लिए भारत, पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद का हवाला दे सकता है, क्योंकि इससे "परिस्थितियों में मौलिक परिवर्तन" होता है, लिहाजा, ये IWT के लिए इसकी मूल सहमति का आवश्यक आधार है"। उन्होंने आगे लिखा है, कि "इसके बजाय, भारत ने संधि के विवाद-निपटान प्रावधानों के तहत पाकिस्तान के समझौते के उल्लंघन के जवाब में सिर्फ एक आईडब्ल्यूटी-संशोधन नोटिस भेजा है"। उन्होंने लिखा है, कि वर्ल्ड बैंक इस मामले में खुले तौर पर पक्षपात कर रहा है और पाकिस्तान को फायदा पहुंचा रहा है और इस तरह के दुरुपयोग ने, भारत को अपने ऊर्जा-क्षेत्र में कमजोर जम्मू और कश्मीर के लिए जलविद्युत उत्पादन करने परेशानी पैदा किया है।

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    क्या है सिंधु जल समझौता?

    क्या है सिंधु जल समझौता?

    सिंधु जल समझौते पर 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक पूर्वी हिस्से की तीनों नदियों रावी, ब्यास और सतलज पर भारत का अधिकार है। इसके बदले भारत पश्चिमी हिस्से के तीनों नदियों सिंधु, चेनाब और झेलम के जल को बेरोक-टोक पाकिस्तान में बहने देगा। समझौते के मुताबिक भारत पश्चिमी हिस्से की नदियों के जल का भी इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन इस तरह से कि पाकिस्तान को उससे कोई नुकसान न हो। भारत उन नदियों के पानी का घरेलू इस्तेमाल और सिंचाई और बिजली पैदा करने के लिए भी कर सकता है, बशर्ते वह समझौते के मुताबिक हो। वहीं, इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार सिंधु नदी के कुल पानी का 20% का ही उपयोग भारत कर सकता है, जबकि 80 प्रतिशत इसका इस्तेमाल भारत करता है।

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