गाजा पर शांति मिशन में भारत की एंट्री! ट्रंप का PM मोदी को न्योता, जानें ‘Board of Peace’ का पूरा प्लान
India Gaza Peace Mission: गाजा को लेकर अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक पहल में अब भारत की भूमिका भी सामने आ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए बनाए जा रहे 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) में भारत को शामिल होने का न्योता दिया है। यह वही मंच है, जिसे ट्रंप प्रशासन इस्राइल-हमास युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने और गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अहम मान रहा है। खास बात यह है कि इस बोर्ड में भारत के साथ पाकिस्तान को भी आमंत्रित किया गया है।
क्या है गाजा का 'Board of Peace'
गाजा बोर्ड ऑफ पीस को ट्रंप ने युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तौर पर पेश किया है। इसका मकसद सिर्फ गोलीबारी रुकवाना नहीं, बल्कि गाजा में शासन व्यवस्था को दोबारा खड़ा करना, बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण करना, निवेश लाना और लंबे समय तक शांति बनाए रखना है। यह बोर्ड एक तकनीकी समिति की निगरानी करेगा, जो गाजा के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को संभालने में मदद करेगी।

भारत को क्यों माना जा रहा है अहम खिलाड़ी?
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद भारत को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है। भारत की छवि एक संतुलित वैश्विक शक्ति के तौर पर देखी जाती है, जो पश्चिम एशिया में किसी एक धड़े के बजाय स्थिरता और बातचीत पर जोर देता है। भारत पहले भी मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और विकास परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है, यही वजह है कि अमेरिका उसे इस पहल में शामिल करना चाहता है।
पाकिस्तान को भी मिला आमंत्रण
भारत के न्योते के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी ट्रंप की ओर से बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का आमंत्रण मिला है। इससे साफ है कि अमेरिका इस मंच को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देना चाहता है, जिसमें क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों तरह के देश शामिल हों।
कौन-कौन से देश और नेता होंगे शामिल
इस बोर्ड में तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन के अलावा फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के नेताओं को भी न्योता दिए जाने की खबर है। यानी यह मंच सिर्फ पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रहेगा।
पैसे की शर्त और सदस्यता का खेल
ट्रंप प्रशासन की ओर से भेजे गए ड्राफ्ट चार्टर के मुताबिक, अगर कोई देश तीन साल से ज्यादा समय तक स्थायी सदस्य बनना चाहता है, तो उसे 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा। हालांकि तीन साल की सदस्यता के लिए किसी तरह की वित्तीय प्रतिबद्धता जरूरी नहीं होगी। इस चार्टर के कुछ हिस्से अर्जेंटीना और पैराग्वे के राष्ट्रपतियों को भेजे गए पत्रों के जरिए भी सामने आए हैं।
कौन संभालेगा बोर्ड की कमान
ट्रंप ने ऐलान किया है कि इस बोर्ड के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, उनके दामाद जेरेड कुश्नर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, मध्य पूर्व के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष अजय बंगा शामिल होंगे। यही टीम गाजा के लिए बनाए जाने वाले प्रशासनिक ढांचे पर नजर रखेगी।
गाजा को लेकर आगे क्या?
ट्रंप की योजना के मुताबिक गाजा को फिर से रहने लायक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर फंड जुटाया जाएगा और स्थिर शासन व्यवस्था खड़ी की जाएगी। हालांकि युद्धविराम के बावजूद गाजा में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। ऐसे में भारत जैसे देशों की भागीदारी इस पहल को कितना असरदार बनाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।












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