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India EU FTA: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होते ही ट्रंप पर क्यों भड़के यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष कोस्टा, लगा दी लताड़

Antonio Costa on Donald Trump: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत का पूरा होना ग्लोबल मार्केट के लिए एक बड़ी खबर है। गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर हुए इस ऐलान को यूरोपीय संघ ने 'मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स' कहा है। यह समझौता ऐसे वक्त में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से पूरी दुनिया में टैरिफ (Tax) को लेकर डर बना हुआ है।

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इसे ट्रंप के संरक्षणवाद को एक सीधा जवाब बताया है, जो दिखाता है कि भारत और यूरोप व्यापार के खुले रास्तों पर भरोसा करते हैं।

India EU FTA

India EU FTA 2026: ट्रंप के टैरिफ और पाबंदियों को करारा जवाब

एंटोनियो कोस्टा ने साफ शब्दों में कहा कि यह डील दुनिया को एक संदेश देती है कि हम टैक्स की दीवारें खड़ी करने के खिलाफ हैं। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ बढ़ाकर दूसरे देशों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं, तब भारत और यूरोप ने हाथ मिलाकर यह साबित किया है कि व्यापार भरोसे से चलता है, पाबंदियों से नहीं। कोस्टा के मुताबिक, यह समझौता दुनिया में अनिश्चितता को कम करेगा और बिजनेस के लिए एक सुरक्षित माहौल तैयार करेगा।

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India EU Free Trade Agreement Hindi: सिर्फ पैसा नहीं, दोस्ती और सुरक्षा की बात

कोस्टा का मानना है कि आज की दुनिया में भारत और यूरोप का साथ आना बेहद जरूरी है। उनके लिए यह सिर्फ सामान बेचने या खरीदने का समझौता नहीं है, बल्कि एक गहरी दोस्ती का हाथ है। उन्होंने कहा कि भारत और ईयू मिलकर दुनिया में शांति और स्थिरता ला सकते हैं। जब दो बड़ी ताकतें नियमों को मानकर व्यापार करती हैं, तो इससे पूरी दुनिया की इकोनॉमी को मजबूती मिलती है और किसी एक देश की मनमर्जी नहीं चलती।

व्यापार के भारी-भरकम आंकड़े और नई उम्मीद

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है। पिछले साल ही दोनों के बीच करीब 136 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था, जिसमें भारत ने यूरोप को ज्यादा सामान भेजा। अब इस नई डील के बाद यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा। ईयू प्रमुख ने इसे 'मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स' इसलिए कहा है क्योंकि यह समझौता व्यापार के हर छोटे-बड़े पहलू को कवर करता है और आने वाले कई दशकों के लिए एक मजबूत नींव रखता है।

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आम आदमी और छोटे उद्योगों को क्या मिलेगा?

इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारत के कपड़ा, ज्वेलरी, लेदर और केमिकल उद्योगों को होगा। अब तक इन सामानों पर यूरोप में काफी टैक्स लगता था, जो अब खत्म या बहुत कम हो जाएगा। इससे भारतीय सामान यूरोप में सस्ते होंगे और उनकी मांग बढ़ेगी। वहीं, भारत में भी यूरोप से आने वाली मशीनें और दवाएं सस्ती हो सकती हैं। कुल मिलाकर, इस साल के अंत तक जब यह डील साइन होगी, तो युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे।

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