डिफेंस सेक्टर के लिए मोदी सरकार के खोला पिटारा, चीन को रोकने के लिए हिंद महासागर में बनेगा 'चक्रव्यूह'
भारतीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2022-23 के लिए 5.25 लाख करोड़ का रक्षा बजट बनाया है। मोदी सरकार ने पिछले साल डिफेंस सेक्टर को 4.78 लाख करोड़ रुपये आवंटित किया था।
नई दिल्ली, फरवरी 01: मोदी सरकार ने साल 2022-23 का बजट पेश कर दिया है और मोदी सरकार का ये बजट खास तौर पर डिफेंस सेक्टर पर फोकस है और हिंद महासागर में 'चक्रव्यूह' बनाने की तैयारी खास तौर पर की गई है। चीन लगातार हिंद महासागर में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है और पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान भी चीन के कंधे पर चढ़कर हिंद महासागर में घुसने की फिराक में है, लिहाजा मोदी सरकार ने हिंद महासागर में रक्षा कवच चढ़ाने की पूरी तैयारी कर ली है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
भारत सरकार की पूरी कोशिश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की है और मोदी सरकार ने इस साल भी देश का रक्षा बजट बढ़ा दिया है। भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि, देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की है और मोदी सरकार ने रक्षा बजट का भी एक बड़ा हिस्सा घरेलू उपकरणों को बनाने और स्वदेशी हथियार के निर्माण पर खर्च करने का फोकस रखा है। भारत सरकार की कोशिश रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ाने पर रखा गया है, ताकि आने वाले सालों में भारत में खुद उन्नत हथियारों का निर्माण किया जा सके। ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री के साथ ही भारत ने हथियारों के निर्यात की तरफ भी कदम बढ़ा दिया है, लिहाजा फोकस इस बात पर रखा गया है कि, देश में ही रिसर्च संस्थानों को बढ़ावा दिया जाए और हाई टेक्नोलॉजी हथियारों का निर्माण देश में ही किया जाए।
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रक्षा बजट को समझिए
भारतीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2022-23 के लिए 5.25 लाख करोड़ का रक्षा बजट बनाया है। मोदी सरकार ने पिछले साल डिफेंस सेक्टर को 4.78 लाख करोड़ रुपये आवंटित किया था और इस साल रक्षा बजट में 47,000 करोड़ रुपये का इजाफा किया है। यानि, मोदी सरकार ने पिछले साल के मुकाबले करीब 10 फीसदी रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है। इस साल, रक्षा मंत्रालय को सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हालांकि, इसमें करीब 68 प्रतिशत घरेलू हथियारों को खरीदने पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा सके। पिछसे साल रक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1.35 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो पिछले साल के मुकाबले 13 प्रतिशत ज्यादा है।

नौसेना की मजबूती की तरफ कदम
भारत सरकार ने इस साल के बजट में नौसेना पर 47 हजार 590 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है और नौसेना के बजट में इजाफे को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि, मोदी सरकार का ध्यान खासतौर पर हिंद महासागर पर केन्द्रित है, लिहाजा नौसेना को और मजबूत करने पर ध्यान दिया गया है। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन सिर्फ भारत को पहाड़ों में ही नहीं, बल्कि समंदर में भी घेरना चाहता है और भारत की पिछली सरकारें पहले ही हिंद महासागर को लेकर उदासीन रही हैं और उसका फायदा चीन ने जबरदस्त तरीके से उठाया है। चीन की नौसेना पहले से ही साउथ चायना सी से लेकर अफ्रीकी देशों की गश्ती करती रहती है और अफ्रीकी देशों में चीन की सेना सीक्रेट सैन्य बंदरगाहों का भी निर्माण कर रही है।

भारत के लिए हिंद महासागर का महत्व
भारत के लिए हिंद महासागर भू-राजनीतिक, सामरिक, आर्थिक और व्यापारिक महत्व रखता है और हिंद महासागर के तटीय देशों की कुल जनसंख्या का 50 फीसदी लोग रहते हैं और हिंद महासागर का सबसे ज्यादा तटीय हिस्सा भारत में ही है, जो कुल क्षेत्रफल का 12.5% है। इतना ही नहीं, एशिया के साथ साथ यूरोप और अफ्रीका को भी हिंद महासागर जोड़ता है और हिंद महासागर का तेल भी व्यापारिक दृष्टिकोण से काफी महत्व रखता है। इसके साथ ही भारत का करीब 78 प्रतिशत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भी हिंद महासागर से ही होता है और भारत अपनी जरूरत का बड़ी मात्रा में संसाधन भी हिंद महासागर से ही प्राप्त करता है और भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी मछली भी हिंद महासागर से ही प्राप्त करता है।

भारतीय नौसेना की ताकत
ताकत के लिहाज से देखें तो भारतीय नौसेना की ताकत पूरी दुनिया में चौथे नंबर पर है और भारतीय नौसेना के पास कुल जहाजों की संख्या 285 है, वहीं भारतीय नौसेना के पास 13 फ्राइगेट्स हैं, वहीं भारत के पास 10 विध्वंसक पोत हैं और इंडियन नेवी के पास 23 कोर्वेट्स हैं, जबकि इंडियन नेवी के पास 17 सबमरीन्स हैं और निगरानी जहाजों की संख्या भारतीय नौसेना के पास 139 है। (ये आंकड़े ग्लोबल पॉवर डॉट कॉम से लिए गये हैं)। इसके साथ ही, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने हिंद महासागर में ज्यादा युद्धपोतों को गश्ती पर भेजना शुरू कर दिया है। भारत के साथ साथ हिंद महासागर में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और पश्चिमी देशों की जहाजों ने भी गश्ती बढ़ाना शुरू कर दिया है, लिहाजा भारत सरकार ने अब तेजी से इंडियन नेवी की ताकत को बढ़ाने का फैसला किया है।

2021 में चीन की नौसेना की ताकत
साल 2021 में चीन की नौसेना ने अपने बेड़े में टाइप 094A बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी(SSBN), टू टाइप 075 हेलीकॉप्टर लैंडिंग डॉक (LHD), थ्री टाइप 055 क्रूजर, सेवन टाइप052D विध्वंसक जहाज, सिक्स टाइप 056A कोरवेट, सिक्स टाइप 082II माइम काउंटरमेयर वेसल और एक केबल-बिछाने वाला जहाज शामिल किया है। इसके साथ ही चीन की नौसेना ने अपनेबेड़े में टाइप थ्री 927 सर्विलांस जहाज को भी शामिल किया है। चीन अपनी नौसेना को जिस रफ्तार से विस्तार दे रहा है, वो साफ बताता है कि, चीन की प्लानिंग आने वाले समय के लिए क्या है। अत्याधुनिक जहाजों की विशाल संख्या और विविधता चीन की नौसेना को और भी ज्यादा आत्मविश्वास से भर रही है, जो पहले से ही एक मार्शल कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा समर्थित राष्ट्रवाद से मजबूत है। इसके साथ ही चीन की नौसेना के पास 350 जंगी जहाज भी हैं, जबकि भारत के पास अभी सिर्फ 130 युद्धपोत है।












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